भारतीय रेल ने कुल्हड़ में चाय और लस्सी बेचने का बनाया प्लान
भारतीय रेल ने कुल्हड़ में चाय और लस्सी बेचने का बनाया प्लान Priyanka Yadav -RE
दिल्ली

भारतीय रेल ने कुल्हड़ में चाय और लस्सी बेचने का बनाया प्लान

Author : Sushil Dev

हाइलाइट्स

  • भारतीय रेलवे ने कुल्हड़ में चाय-लस्सी बेचने की बनाई योजना

  • जल्द ही देश के करीब 400 रेलवे स्टेशनों पर मिलेगी ये सुविधा

  • कुम्हारों के बीच 30,000 इलेक्ट्रिक चाक का वितरण करने का फैसला

  • चाक से रोजाना 2 करोड़ कुल्हड़ और मिट्टी के सामान बनाए जा सकते हैं

  • 31 मार्च 2019 तक 10,620 बिजली से चलने वाले चाक उपलब्ध कराए गए हैं

राज एक्सप्रेस। रेलवे ने यात्रियों की सुविधाओं के लिए चाय, लस्सी या खाने-पीने की कुछ सामग्री को कुल्हड़ में उपलब्ध करने की योजना बनाई है। खबर है कि जल्द ही देश के करीब 400 रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को खान-पान से संबंधित कोई भी वस्तु ज्यादातर कुल्हड़, ग्लास या अन्य दूसरे बर्तनों में मिलने लगेंगीं।

खादी और ग्रामोद्योग आयोग यानी केवीआईसी ने गुरुवार को कहा कि रेल मंत्रालय ने 400 रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को खाने-पीने का सामान मिट्टी से बने बर्तनों में उपलब्ध कराने का फैसला किया है। इस कदम से जहां एक तरफ स्थानीय और पर्यावरण अनुकूल उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा, वहीं प्लास्टिक के उपयोग पर अंकुश लगेगा, दूसरी तरफ कुम्हारों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। सनद रहे कि रेलवे में खद्दर और कुल्हड़ का प्रचलन पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के कार्यकाल में भी शुरू किया गया था।

30 हजार इलेक्ट्रिक चाक करेंगे वितरित :

केवीआईसी के चेयरमैन विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि रेलवे की इस पहल से उत्साहित आयोग ने कुम्हारों के बीच 30,000 इलेक्ट्रिक चाक का वितरण करने का फैसला किया है, साथ ही मिट्टी के बने सामानों को रिसाइकिल और नष्ट करने के लिये मशीन भी उपलब्ध कराएगा। उन्होंने बताया कि चाक से रोजाना 2 करोड़ कुल्हड़ और मिटटी के सामान बनाए जा सकते हैं। यह प्रक्रिया अगले 15 दिनों में शुरू होने की संभावना है।

केवीआईसी के बयान के अनुसार :

केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम मंत्री नितिन गडकरी ने पिछले महीने इस बारे में रेल मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर रेलवे स्टेशनों पर कुल्हड़ जैसे मिट्टी के बर्तन के उपयोग को लेकर संबंधित अधिकारियों को निर्देश देने का आग्रह किया था। केवीआईसी के इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए रेलवे ने विभिन्न रेल मंडलों के सभी प्रधान मुख्य वाणिज्यिक प्रबंधकों और आईआरसीटीसी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक को पत्र लिखकर स्थानीय रूप से उत्पादित पर्यावरण अनुकूल मिट्टी से बने कुल्हड़, गिलास और प्लेट के उपयोग करने का निर्देश दिया है।

ज्ञात हो कि खादी एवं ग्रमोद्योग आयोग कुम्हारों को सशक्त बनाने के लिए ‘कुम्हार सशक्तिकरण योजना’ चला रहा है, इसके तहत् 31 मार्च 2019 तक 10,620 बिजली से चलने वाले चाक उपलब्ध कराए गए हैं। ज्ञात हो कि बिजली से चलने वाले चाक के कारण कुम्हारों की उत्पादन क्षमता काफी बढ़ी है।

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