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DHFL पर 5,200 करोड़ की FD का दावा, 6 कंपनियों का मार्केट कैप घटा

कर्ज का बोझ झेल रही दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (DHFL) कंपनी पर 5,200 करोड़ रुपये के FD के दावे की खबर सामने आई है। इसके अलावा भारत की प्रमुख 6 कंपनियों के मार्केट कैप में कमी दर्ज की गई है।

Kavita Singh Rathore

Kavita Singh Rathore

राज एक्सप्रेस। कॉरपोरेट इन्सॉल्वेंसी प्रोसेस में शामिल होने वाली पहली हाउसिंग कंपनी दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (DHFL) कर्ज का बोझ झेल रही है और ऊपर से अब DHFL पर 5,200 करोड़ रुपये के फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) का दावा हुआ है। इतना ही नहीं कंपनी पर हुए दावों की रकम 93,105 करोड़ रुपये के पार पहुंच गई है। इसके अलावा धारकों द्वारा किये गए लगभग 4,800 करोड़ रुपये के दावे मंजूर हुए हैं।

क्या है पूरा मामला :

दरअसल, हाल ही में DHFL का यूपी पावर कॉर्पोरेशन से जुड़ा एक मामला सामने आया था। जिसमे यूपी कॉर्पोरेशन ने कर्मचारियों के PF की रकम का निवेश किया था। वहीं अब DHFL के प्रशासक द्वारा कंपनी के FD लेने वालों के लगभग 4,800 करोड़ रुपये के दावे को मंजूरी मिल गई है। जबकि, DHFL से UP पावर कॉर्पोरेशन के कर्मचारियों और लगभग 55,000 खुदरा निवेशकों ने पैसों की मांग की है। मांगे गए पैसों की रकम कुल 5,200 करोड़ रुपये है।

प्रशासक की जांच में सामने आया :

प्रशासक और रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल आर. सुब्रमन्या कुमार द्वारा की गई जांच में इस पूरे दावे में लगभग 4,800 करोड़ रुपये की रकम के दावों को ही भुगतान करने योग्य पाया है। जानकारी के लिए बता दें, सुब्रमन्या कुमार की नियुक्ति भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने की है। इसके अलावा DHFL से जुड़े फाइनेंशियल कर्जदाताओं, परिचालन कर्जदाताओं कर्मचारियों, FD वाले और अन्य कर्जदाताओं द्वारा कंपनी से लगभग 93,105 करोड़ रुपये की मांग की है। जिंसमे से बैंक द्वारा केवल 85,800 करोड़ रुपये की मांगों को भुगतान योग्य पाया है।

DHFL के कर्जदार :

  • बैंक ऑफ इंडिया - 4,125.52 करोड़ रुपये

  • केनरा बैंक - 2,681.81 करोड़ रुपये

  • यूनियन बैंक ऑफ इंडिया- 2,378.05 करोड़ रुपये

  • बैंक ऑफ बड़ौदा - 2,078.9 करोड़ रुपये

  • नेशनल हाउसिंग बैंक - 2,433.79 करोड़ रुपये

  • एचएम टावर प्राइवेट लिमिटेड, मैन रियल्टी, मेरिनो शेल्टर्स और नीलकमल रियल्टर्स टावर - कुल 930.55 करोड़ रुपये

दावे पेश करने के आदेश :

DHFL से जुड़े मामले पर 3 दिसंबर 2019 को नेशनल कंपनी लॉ टिब्यूनल (NCLT) के द्वारा लिए गए फैसले के अनुसार सुब्रमन्याकुमार ने एक जानकारी सार्वजनिक की, जिसके अनुसार, उन्होंने कंपनी के सभी कर्जदाताओं और FD धारकों को आदेश दिए कि, सभी अपने दावे 17 दिसंबर तक अपने-अपने पेश करें। जब सभी कर्जदाताओं और FD धारकों द्वारा अपने दावे पेश किये गए तो, कुल 86,892.30 करोड़ रुपये की राशि सामने आई। वहीं परिचालन कर्जदाताओं द्वारा की गई दावा राशि 60.76 करोड़ रुपये है।

SBI की शाखाओं के दावे :

कंपनी द्वारा वित्तीय कर्जदाताओं में शामिल भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने अपनी और सिंगापुर की SBI शाखा की तरफ से कुल 10,082.90 करोड़ रुपये का दावा किया है। यह कुल दावे में सबसे ज्यादा वाली रकम है। कुल दावों में से अब तक 7,131.31 करोड़ रुपये की रकम के दावे को मान्यता मिली और 2,951.59 करोड़ रुपये के दावों को मान्यता मिलने के लिए प्रोसेस अभी भी जारी है। SBI की मॉरीशस शाखा द्वारा 97.58 करोड़ रुपये का दावा किया गया है। वहीं, कंपनी के कर्मचारियों और वर्कर्स द्वारा 2.01 करोड़ रुपये की रकम का दवा किया गया। जबकि, डिबेंचर ट्रस्टी कैटालिस्ट ट्रस्टीशिप के बांडधारकों द्वारा DHFL से 45,550.07 करोड़ रुपये की रकम मांगी गयी है।

अन्य 6 भारतीय कंपनियों का मार्केट कैप घटा :

इन सब मुश्किलों के बीच DHFL का मार्केट कैप भी घटा। भारत की प्रमुख 10 कंपनियों में 6 कंपनियों का मार्केट कैप घटा। इन सभी कंपनियों का मार्केट कैप कुक 26,624.10 करोड़ घटा है। जबकि मात्र 4 के मार्केट कैप में ही बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।

मार्केट कैप घटने वाली 6 कंपनियों के नाम :

  1. रिलायंस इंडस्ट्री

  2. हिन्दुस्थान यूनिलीवर

  3. कोटक महिंद्रा बैंक

  4. SBI बैंक

  5. HDFC बैंक

  6. DHFL

मार्केट कैप में बढ़ोतरी दर्ज करने वाली कंपनियां :

  1. TCS

  2. HDFC

  3. ITC

  4. इंफोसिस

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