आयुष क्वाथ के साइड इफेक्ट संभव, आयुर्वेदिक कंपनियों के दावों की पड़ताल
क्या कोविड-19 इलाज में इम्यूनिटी बूस्टर सदैव कारगर है?Syed Dabeer Hussain - RE

आयुष क्वाथ के साइड इफेक्ट संभव, आयुर्वेदिक कंपनियों के दावों की पड़ताल

एलोपैथिक खोज के बीच आयुष मंत्रालय ने भी आयुष क्वाथ पेश किया है। अध्ययन के मुताबिक कोविड-19 इलाज में इम्यूनिटी बूस्टर सदैव कारगर नहीं रहता।

हाइलाइट्स –

  • आयुष क्वाथ की आड़, दावों की बाढ़

  • उपयोग तो करें लेकिन जरा संभलकर

  • इम्यूनिटी बूस्टर कब कारगर/खतरनाक

राज एक्सप्रेस। कोरोना वायरस महामारी के इलाज, बचाव के नाम पर ढेरों देसी नुस्खों से लेकर तमाम आयुर्वेदिक औषधियों से उपचार की लंबी फेहरिस्त है। आयुष क्वाथ से उपचार-बचाव के दावों पर मीडिया रिपोर्ट्स में सवाल उठे हैं।

ऐसे में आयुष मंत्रालय के भरोसे की आड़ में बैद्यनाथ जैसी दिग्गज आयुर्वेदिक कंपनियां मौके पर मोटा लाभ काटने से नहीं चूक रहीं और COVID-19 उपचार का धंधा फल-फूल रहा है।

उम्मीद की आमद दर्ज -

कोरोना से लड़ने जारी दवाओं की खोज के बीच हाल ही में भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने भी उम्मीद की आमद दर्ज कराई। लोगों के प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए आयुष मंत्रालय ने भारत में आयुष क्वाथ के वितरण और उसके उपयोग के लिए लोगों को जागरूक करने के लिए प्रयास शुरू किए हैं।

एलोपैथिक दवाओं की खोज के बीच आयुष मंत्रालय ने भी इम्यूनिटी बूस्टर आयुष क्वाथ के बूते मोर्चा संभाला है। अध्ययन के मुताबिक कोविड-19 इलाज में इम्यूनिटी बूस्टर सदैव कारगर नहीं रहता।

सरकारी प्रमोशन –

आयुष मंत्रालय ने 24 अप्रैल, 2020 को कोविड-19 महामारी से बचाव में कारगर बताते हुए औषधीय मिश्रण आयुष क्वाथ का प्रमोशन किया था। इस समय बताया गया था कि यह कोरोना से लड़ेगा और रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करेगा।

आयुष मंत्रालय ने राज्य व केंद्र शासित सरकारों से आयुष लाइसेंसिंग नियामकों को निर्देशित करने आग्रह किया था कि आयुष क्वाथ औषधि बनाने के इच्छुक लाइसेंस धारकों (आयुर्वेद/सिद्ध/यूनानी आदि) को इसके उत्पादन की फौरन अनुमति प्रदान की जाए।

चिकित्सीय उपयोग -

लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने आयुष मंत्रालय ने इस खास मिश्रण (आयुष क्वाथ) के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए विभागों और निजी कंपनियों को कहा। बताया जा रहा है कि यह मिश्रणश्वसन स्वास्थ्य के लिए बहुत कारगर है। शरीर से जुड़े अन्य कई रोगों में भी इसका उपयोग कारगर साबित हो सकता है।

आयुष क्वाथ के चार वारियर -

आयुष क्वाथ बनाने में आयुर्वेद की चार खास योद्धा जड़ी-बूटियों या पौधा-पत्तियों का इस्तेमाल किया जाता है। आयुष क्वाथ के इन चार खास वारियर्स के बारे में भारतीय जनमानस भली तरह परिचित है। आयुष क्वाथ में इन खास जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया गया है।

1. तुलसी पत्र (Ocimum sanctum) – 4 भाग

2. दालचीनी (Cinnamomum zeylanicum) – 2 भाग

3. अदरक (Zingiber officinale) – 2 भाग

4. काली मिर्च (Piper nigrum) -1 भाग (इंटरनेट पर उपलब्ध मात्रा)

ऐसे मारी एंट्री -

कोरोना कालखंड के बीच इस साल 4 जुलाई, 2020 को केंद्रीय आयुष मंत्री श्रीपद नाइक ने नोवल कोरोना वायरस संक्रमण महामारी से बचाव के लिए आयुष क्वाथ और गिलोय चाय जैसे दो इम्यूनिटी बूस्टर्स पेश किए। रिपोर्ट्स के मुताबिक मुंबई की विभा नेचुरल प्रोडक्ट्स कंपनी ने इसे बनाया है।

इसके बाद कई लोग इस काढ़े के नाम पर अपने ब्रांड की दुकानदारी चमका रहे हैं। कोरोना संकट काल में आज लगभग सभी आयुर्वेदिक कंपनियों का अपना ईजाद किया गया अपना नया वर्जन है।

औषधि बाजार ने आयुष क्वाथ के कई जेनेरिक (साधारण) उत्पाद बनाकर बेचे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एक दवा उत्पादक न्यूट्रिली ने आयुष क्वाथ की पैकिंग पर ‘कोविड-19’ का लेबल लगाकर भी प्रचार किया।

प्रक्रिया का पालन नहीं! -

औषधि विज्ञानियों के मुताबिक आयुष क्वाथ का अन्य एलोपैथिक दवाओं की तरह क्लीनिकल ट्रायल नहीं हुआ है। ऐसे में आयुष क्वाथ से कोरोना वायरस-19 का इलाज या बचाव का दावा करना जरा जल्दबाजी होगी।

क्लीनिक ट्रायल के अभाव में आयुष क्वाथ में मिश्रित औषधियों का प्रयोग के दौरान ऑब्जेक्ट (चूहा-बिल्ली-बंदर-मानव) पर पड़ने वाले प्रभाव का अंदाजा और अध्ययन करना दुष्कर होगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक आयुष क्वाथ का असर सकारात्मक हो या न हो लेकिन इन जड़ी बूटियों से होने वाले कुछ ज्ञात साइड इफ़ेक्ट्स जरूर हैं।

ये आयुष क्वाथ क्या है? –

दरअसल आयुष क्वाथ में जिन चार औषधियों के अंश का इस्तेमाल किया गया है उसके असर के बारे में भी जानना जरूरी है।

दालचीनी -

भारतीय खान-पान में दालचीनी का उपयोग नया नहीं है। खास व्यंजनों में इसका उपयोग स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है। लेकिन साथ ही जानकार लोग इसे ज्यादा खाने से बचने की भी सलाह देते हैं।

दवा विज्ञान के मुताबिक दालचीनी या उसके अन्य अनुपूरक तत्व के असंतुलित सेवन से एक्यूट हेपेटाइटिस तक हो सकता है। इसके तेल और फ्लेवर्ड च्युइंग गम को चबाने से डर्मेटाइटिस और अन्य एलर्जी जैसी समस्या भी हो सकती है।

सूखा अदरक -

कुछ मरीजों में सूखा अदरक यानी सोंठ खाने से लिवर पर बुरा असर पड़ने की समस्या भी सामने आई है। गर्भावस्था में मिचली और उल्टी के वक्त इस्तेमाल करने से गर्भकाल काल छोटा होने का भी संकट मंडरा सकता है। रसायन विज्ञानियों के अनुसार गर्भवती महिला यदि सूखे अदरक का अधिक सेवन करती है तो शिशु की खोपड़ी के आकार में असामान्य वृद्धि देखने को मिल सकती है।

काली मिर्च -

काली मिर्च के मुख्य भाग पिपेरिन से रक्त में अन्य तत्वों की मात्रा में घट-बढ़ हो सकती है। इससे गैस्ट्रिक एसिड स्त्राव, पोटेशियम उत्सर्जन और गैस्ट्रिक कोशिका के हटने या मुक्त होने की प्रक्रिया में भी तेजी आ सकती है।

तुलसी -

पशुओं पर किए गए शोध से यह बात प्रमाणित हुई है कि तुलसी के सेवन से रक्त संचार में प्रभाव पड़ता है। इसके सेवन से रक्त बहाव का समय बढ़ सकता है। तुलसी के असंतुलित सेवन से रक्त में शर्करा यानी कि शुगर की कमी भी पैदा हो सकती है।

मतलब आयुष क्वाथ में चार प्रमुख जड़ी-बूटियों का असंतुलित मिश्रण मरीज के लिए राहत के बजाए परेशानी का सबब भी बन सकता है। मतलब औषधि के साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं। बिना डॉक्टर की सलाह के इसका उपयोग घातक भी हो सकता है।

’इम्यूनिटी बूस्टर’ को समझें -

हम अपनी प्राकृतिक या सामान्य इम्यूनिटी यानी रोग प्रतिरोधक शक्ति को संयमित-संतुलित खान-पान और आदतों से नियंत्रित कर सकते हैं। मतलब इंसान जब खुद चाहे तब अपनी इम्यूनिटी को ताकतवर या फिर कमजोर कर सकता है। इस तंत्र को बूस्ट करने के लिए कोई जादुई गोली या काढ़ा नहीं है।

बाजार में खान-पान की चीजों से लेकर कपड़ों-बिस्तर तक की सामग्री को कोविड-19 इम्यूनिटी बूस्टर बताकर धड़ल्ले से जनता को ठगा जा रहा है। इन झूठे दावों के कारण सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क पहनने और हाथ धोने जैसे जरूरी और प्रमाणित बचाव से लोगों का ध्यान भटकना भी लाजिमी है।

बगैर सोचे उपयोग के परिणाम -

ऑल्टन्यूज डॉट इन (altnews.in) पर फैक्ट चेक नाम के आर्टिकल में लेखक द्वय डॉ. सतानी और डॉ. सुमैया शेख ने आपत्ति जताई है कि आयुष मंत्रालय ने बिना जांच और लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखे आयुष क्वाथ का बड़े स्तर पर उत्पादन के लिए प्रमोशन किया।

आर्टिकल में चेतावनी दी गई है कि कोविड-19 जैसी जानलेवा बीमारी में बिना किसी आधार के इम्यूनिटी बूस्ट करने के खतरे भी हो सकते हैं। इसमें चेताया गया है कि अत्यधिक सक्रिय रोग इम्यूनिटी शक्ति लोगों के लिए जानलेवा तो है ही साथ ही इसका लंबे समय तक असंतुलित सेवन स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर भी डाल सकता है।

दावे अपने-अपने -

आयुर्वेदिक दवाओं के मामले में अग्रणी कंपनी बैद्यनाथ के विज्ञापन में दावा किया गया है कि आयुष क्वाथ से इम्यूनिटी बढ़ती है। कूडोस आयुर्वेद कंपनी ने विज्ञापन में दावा किया है कि अधिक समय तक उपयोग करने पर भी इसके कोई साइड इफेक्ट नहीं हैं। नेचुरोवेदा ने अपने विज्ञापन में लोगों से खराश या सर्दी जु़काम होने पर आयुष क्वाथ का सेवन करने को कहा है।

बूस्टिंग पर कितना नियंत्रण? –

फिलहाल प्रचारित की जा रही औषधियों के सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता में कितनी वृद्धि-कमी होगी इस बारे में पक्के तौर पर दावा करने वालों की कमी है। साथ ही ऐसे किसी प्रयोग की उपलब्धता नहीं है कि जिससे प्रमाणित हो सके कि ये औषधियां कोविड-19 ग्रसित मरीजों के स्वास्थ्य पर कितनी असरकारक हैं।

चिकित्सा विज्ञानियों की राय यह भी है कि कोविड-19 के मरीज़ों में सैद्धांतिक रूप से इम्यूनिटी बूस्टिंग से खतरा हो सकता है। फिर ऐसे में आयुष क्वाथ या काढ़ा से इम्यूनिटी मजबूत करने का दावा मरीजों को नुकसान पहुंचा सकता है।

समझें कोविड-19 इलाज को -

दरअसल कोविड-19 के कई गंभीर मामलों में इम्यूनिटी को बढ़ाने की बजाय कम किया जाता है। इम्यूनिटी किसी खास दवा के सेवन से मजबूत नहीं होती बल्कि संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, धूप लेने से नियंत्रित होती है। आपको ज्ञात हो अत्यधिक सक्रिय इम्यून के कारण एलर्जी और ऑटोइम्यून से जुड़ी बीमारियों का भी खतरा रहता है।

कोविड-19 या अन्य रोग के उपचार के लिए इम्यून सिस्टम को बूस्ट करने का कंपनियों का दावा इसलिए भी निराधार कहा जा सकता है क्योंकि कई विशेष परिस्थितियों में हमारा इम्यून सिस्टम कई विकारों को भी जन्म दे देता है।

हाइपर सेंसटिविटी के दौरान प्रतिरक्षा तंत्र अत्यधिक सक्रिय होकर शरीर को नुकसान पहुंचाता है। एलर्जिक रिएक्शन इसका सटीक उदाहरण है। इसमें कुछ विशिष्ट पदार्थों जैसे मेवे (नट्स एंड ड्राई फ्रूट्स), धूल, फूलों के पराग आदि के संपर्क में आते ही हाइपर सेंसटिविटी रिएक्शन होने लगता है।

जब जरूरत पड़ती है कम करने की -

इसी तरह कोविड-19 से जुड़े कुछ गंभीर मामलों में इम्यूनिटी बढ़ाने के बजाए कम करने की जरूरत पड़ी है। ऐसे गंभीर मामलों में मरीजों के इम्यून सिस्टम को कम किया जाता है।

हालांकि काढ़ा/आयुष क्वाथ के असर का कोई अधिकृत प्रमाण नहीं है। ऐसे में गंभीर कोविड-19 रोगियों की इम्यूनिटी बढ़ाने का दावा लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। सैद्धांतिक रूप से कोविड-19 के लिए इम्यून सिस्टम को तैयार करने के केवल 2 उपाय ही अभी प्रचलित हैं। वैक्सीन या पूर्व मरीजों के ऐंटीबॉडीज़ वाला प्लाज़्मा।

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