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चीन की GDP में गिरावट!
चीन की GDP में गिरावट!|Social Media
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ट्रेड वॉर का असर, चीन की GDP में गिरावट!

“अमेरिका के साथ चल रहे व्यापार युद्ध के बीच साल 2019 में चीन की आर्थिक वृद्धि लगभग 30 सालों में सबसे कमजोर आंकी गई है।”

Neelesh Singh Thakur

हाइलाइट्स :

  • अमेरिका-चाइना ट्रेड वॉर से बदला इतिहास

  • बीते 30 सालों में पहली बार गिरावट दर्ज

  • चीन में सरकार ने सुधार के उठाए कई कदम

राज एक्सप्रेस। यूनाईटेड स्टेट से ट्रेड वॉर के चलते चाइना ने बीते 30 सालों के इतिहास में साल 2019 में सबसे कमजोर आर्थिक वृद्धि दर्ज की है हालांकि इसमें कुछ सुधार भी दिखने की बात कही जा रही है।

बताया कमजोर-

चौथी तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में एक साल पहले 6% की वृद्धि हुई थी। राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक चाइना की आर्थिक वृद्धि तीसरी तिमाही के समान ही गतिमान है, हालांकि अभी भी लगभग इसे तीन दशकों में सबसे कमजोर बताया जा रहा है।

संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ चल रहे व्यापार युद्ध के बीच साल 2019 में चीन की आर्थिक वृद्धि लगभग 30 वर्षों में सबसे कमजोर आंकी गई है। हालांकि उम्मीद जताई जा रही है कि बीजिंग में इस साल अधिक प्रोत्साहन के भरोसे निवेश और मांग को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

शुक्रवार को जारी आंकड़ों से यह भी पता चला कि, दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का प्रगति के लिहाज़ से यह बुरा अंत रहा। हालांकि अंत में अर्थव्यवस्था को सरकारी सुधारों के कारण कुछ गति भी मिलती दिखी है।

क्या कहते हैं आंकड़े?-

राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो के आंकड़ों से पता चलता है कि, चाइना की आर्थिक वृद्धि साल 2018 के 6.6% के मुकाबले पिछले साल 6.1% रही। वैश्विक मानकों के लिहाज से जहां इसे अभी भी मजबूत माना जा रहा है, वहीं सरकार की लक्ष्य सीमा की बात करें, तो यह साल 1990 के बाद से यह सबसे कमजोर विस्तार रहा।

ये साल महत्वपूर्ण-

सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के लिहाज से यह साल 2020 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) और आय को दोगुना करने के अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिहाज से चाइना के लिए बहुत महत्वपूर्ण रहने वाला है। साथ ही अमेरिका की टेढ़ी निगाह के चलते इस साल चीन को "समृद्ध राष्ट्र" के तौर पर खुद को स्थापित करने के मामले में भी अग्नि-परीक्षा का सामना करना होगा।

इनकी राय-

विश्लेषकों का मानना ​​है कि, लंबी अवधि के लक्ष्य में इस साल चीन की आर्थिक वृद्धि 6% के आसपास रहने की उम्मीद है। हालांकि शीर्ष अधिकारियों ने चेताया भी है कि, चीन की अर्थव्यवस्था 2019 की तुलना में अधिक दबाव का सामना कर सकती है। हाल ही में हस्ताक्षरित यू.एस.-चीन व्यापार सौदे के फेस वन के बाद आशंका जताई जा रही है कि, चाइना की अर्थव्यवस्था फिलहाल मंथर ही रहेगी।

जीडीपी कमजोर-

चौथी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में एक साल पहले 6% की वृद्धि हुई थी, जो तीसरी तिमाही से बढ़कर रही। हालांकि रिपोर्ट्स में अभी भी इसे लगभग तीन दशकों में सबसे कमजोर बताया गया है। जबकि नवंबर में बेहतर प्रदर्शन के बाद दिसंबर में औद्योगिक उत्पादन, निवेश और खुदरा बिक्री में वृद्धि की जानकारी दी गई है।

योजना में बदलाव-

नीति विभाग के सूत्रों के मुताबिक बीजिंग ने पिछले साल 6 से 6.5% की तुलना में इस साल दर पर लगाम कसते हुए लगभग 6 फीसद की कम विकास दर के लक्ष्य को निर्धारित करने की योजना बनाई है। ऐसा चीन ने देश में व्याप्त तीव्र मंदी को दूर करने के लिए बुनियादी ढांचे में खर्च पर प्रावधान के मद्देनज़र तय किया है। ऐसे में चीन में मार्च का महीना बुनियादी ढांचे में सुधार के मामले में खासा अहम होने वाला है।

तिमाही आधार पर देखा जाए, तो अर्थव्यवस्था में माह अक्टूबर-दिसंबर के दौरान 1.5% की वृद्धि हुई जो कि पिछले तीन महीनों की ही तरह है।

एजेंसी की रिपोर्ट्स के मुताबिक सोनी फाइनेंशियल होल्डिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मासाकी कन्नो ने भी माना है- "हमें उम्मीद है कि आने वाले वर्ष में चीन की विकास दर 6% से नीचे आ जाएगी।"

कन्नो के अनुसार " सरकार की नीतियों के कारण चीन की अर्थव्यवस्था अचानक गिरने की संभावना नहीं है, लेकिन एक ही समय में अर्थव्यवस्था की मंदी की प्रवृत्ति भी हालांकि अपरिवर्तित रहेगी।"

सुधार के संकेत?-

चीन की जीडीपी के साथ जारी दिसंबर के आंकड़ों ने औद्योगिक उत्पादन में आश्चर्यजनक तेजी और निवेश वृद्धि में मामूली वृद्धि दिखाई, जबकि खुदरा बिक्री ठोस नजर आई।

पहले ये थी स्थिति-

एक साल पहले औद्योगिक उत्पादन नौ महीनों में सबसे मजबूत गति के साथ 6.9% तक बढ़ा था जबकि खुदरा बिक्री में 8% की वृद्धि देखी गई थी। पूरे साल के लिए स्थाई संपत्ति विनियोग 5.4% की दर से बढ़ा था लेकिन इसके बाद इसमें रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई।

ट्रेड वॉर-

व्यापार तनाव को कम करने जारी प्रयासों के कारण निर्माताओं का व्यापार के प्रति दृष्टिकोण आशावादी भी बनकर उभरा है। विश्लेषकों का मानना है, अमेरिका-चीन के बीच ट्रेड वॉर के दौरान दोनों पक्षों की तरफ से तय टैरिफ के कारण भी व्यापार पर आंशिक असर पड़ता दिख रहा है।

कैपिटल इकोनॉमिक्स के जूलियन इवांस-प्रिचर्ड और मार्टिन रासमुसेन का मानना है कि, "हाल ही में दोनों देशों के बीच गतिविधि में तेजी-कमी के बावजूद, हमें लगता है कि मौजूदा आर्थिक चक्र की स्थिति में कुछ कहना असामयिक होगा।"

"बाहरी शक्तियों को आगामी तिमाहियों में वैश्विक वृद्धि में सुधार के लिए फेस वन डील के लिए धन्यवाद देना चाहिए। लेकिन हमें लगता है कि इससे घरेलू मांग में नए सिरे से कमी होगी।"

इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश घटा-

रिपोर्ट्स के मुताबिक स्थानीय सरकारी बांड जारी करने और अन्य नीतिगत उपायों के बावजूद चीन में साल 2019 में जनवरी-नवंबर के दौरान इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश कल्पित 4% की तुलना में घटकर केवल 3.8% ही बढ़ सका।

हाउसिंग मार्केट की चिंता-

कुछ विश्लेषकों को चीन के हाउसिंग मार्केट में भी मंदी की चिंता सता रही है। यहां प्रॉपर्टी इन्वेस्टमेंट ग्रोथ दिसंबर में दो साल के निचले स्तर पर पहुंचने की जानकारी आंकड़ों में दी गई है। जबकि साल 2019 की बात की जाए, तो यह 9.9% की गति से रफ्तार पर थी। प्रॉपर्टी सेल में भी गिरावट का दौर देखा जा रहा है। पांच वर्षों में पहली वार्षिक गिरावट के साथ संपत्ति की बिक्री यहां 0.1% गिरने की जानकारी मिली है।

सुधार के कदम-

बीजिंग मौजूदा मंदी से निपटने राजकोषीय और मौद्रिक कदमों के जरिए आर्थिक सुधार के कदम उठा रहा है। यहां न केवल करों में कटौती की जा रही है, बल्कि स्थानीय सरकारों को बुनियादी ढांचा सुधारने परियोजनाओं के लिए भारी मात्रा में बांड बेचने की भी इजाजत दी गई है। केंद्रीय बैंक ने बैंकों के रिज़र्व रिक्वायरन्मेंट रेशो (RRR) में भी नीतिगत सुधारों के चलते कटौती की है।

प्रतिबद्धता ये भी-

हालांकि चीन ने प्रतिबद्धता जाहिर की है कि वो किसी भी तरह के संकट से निपटने के लिए सक्षम है और विकास दर वापस जल्द ट्रैक पर लौट आएगी, लेकिन आंकड़ों से साफ है कि, इस साल चीन के लिए वित्तीय प्रणाली के जोखिमों को नियंत्रित करना उच्च प्राथमिकता रहेगी।

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