कोरोना का कहर, अदरक-लहसुन, वाघ-बकरी सब इम्यूनिटी बूस्टर
इम्यूनिटी बूस्टर की बहती गंगा में हाथ धोने कंपनियां उतावली।Syed Dabeer Hussain - RE

कोरोना का कहर, अदरक-लहसुन, वाघ-बकरी सब इम्यूनिटी बूस्टर

डाबर च्यवनप्राश की मांग में 400 जबकि डाबर हनी की मांग में 80 फीसद इजाफा हुआ। अब डाबर की योजना और अधिक इम्यून बूस्टर उत्पाद पेश करने की है।

हाइलाइट्स –

  • पांच को पचास करने की तरकीब

  • फलफूल रहा इम्यून बूस्टर का धंधा

  • दूध-दही और इम्यून बूस्टर का संदेश

राज एक्सप्रेस। कोरोना वायरस डिजीज नाइन्टीन (कोविड-19/COVID-19) जनित खतरों से व्याप्त भय के कारण लोगों में फिट और स्वस्थ रहने के प्रति जागरूकता बढ़ी है। ऐसे में संक्रमण से बचने के लिए प्रतिरक्षा मजबूत करने की विचारधारा न केवल ट्रेंड कर रही है बल्कि नामी से लेकर तमाम छोटी-बड़ी कई कंपनियां भी लोगों की इस भय की मनोवृत्ति को भुनाने में लगी हैं।

इनकी मांग में इजाफा –

कोविड-19 के कारण जीवन रक्षा के प्रति निर्मित डर के माहौल के बीच पिछले कुछ महीनों में च्यवनप्राश, शहद और आयुर्वेदिक चूर्ण, पेय एवं तेल जैसे प्रतिरक्षा बढ़ाने का दावा करने वाले उत्पादों की मांग बढ़ी है।

आपको ज्ञात हो; पारंपरिक ज्ञान के आधार पर, जड़ी बूटियों को प्रतिरक्षा-विनियामक गुणों के अधिकारी के रूप में जाना जाता है। इसका अर्थ है कि वे विशिष्ट और गैर-विशिष्ट दोनों प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाएं पैदा करते हैं। दालचीनी, अदरक, काली मिर्च, अश्वगंधा, गिलोय, मुलेठी, तुलसी, ग्रीन टी या इन सभी के मिश्रण वाले उत्पादों की मांग में इन दिनों इजाफा देखने को मिला है।

वेलनेस उत्पादों को बढ़ावा -

डाबर, पतंजलि, हमदर्द, मदर डेयरी, आईटीसी, और अमूल जैसी कंपनियां अपने विज्ञापनों के माध्यम से वेलनेस (उत्तम स्वास्थ्यवर्धक) उत्पादों को बढ़ावा दे रही हैं।

टेलीविज़न और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर तुलसी की बूंदों, पाश्चराइज्ड हल्दी दूध, च्यवनप्राश, और विभिन्न प्रतिरक्षा-बूस्टिंग एनर्जी ड्रिंक के विज्ञापनों का वर्चस्व है, जो आयुष मंत्रालय द्वारा जारी किए गए दिशा निर्देशों और कंपनियों की स्वयं की सिफारिशों के अनुसार हैं।

यूनानी अभियान -

कंपनियों ने एक मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली और जोशीना, जोशांदा, इम्योटन, इन्फ्युन्जा और च्यवनप्राश जैसी यूनानी दवाओं के उत्पादों के बारे में लोगों तक पहुंच बनाने के लिए कई मार्केटिंग अभियान शुरू किए हैं।

आंगन की तुलसी का बाजार -

जी हां यह काम किया डाबर इंडिया लिमिटेड ने। कंपनी ने अप्रैल 2020 में 100 प्रतिशत आयुर्वेदिक प्राकृतिक प्रतिरक्षा बूस्टर 'डाबर तुलसी ड्रॉप्स' लॉन्च करके काउंटर (ओटीसी) पोर्टफोलियो पर अपनी स्वास्थ्य सेवा का विस्तार किया।

कंपनी के मुताबिक डाबर तुलसी ड्रॉप्स श्वसन स्वास्थ्य में मददगार है। साथ ही इससे खांसी और सर्दी में भी प्रभावी सुरक्षा मिलती है। तुलसी ड्रॉप्स में तनाव नियंत्रण के लिए एंटीऑक्सिडेंट, रोगाणुरोधी जैसे तमाम गुण होते हैं।

च्यवनप्राश की मांग में वृद्धि -

मार्केट रिपोर्ट्स के मुताबिक डाबर च्यवनप्राश की मांग में 400 जबकि डाबर हनी की मांग में 80 फीसद इजाफा हुआ। अब डाबर की योजना और अधिक इम्यून बूस्टर उत्पाद पेश करने की है।

इम्यूनिटी बूस्टर पेय -

FMCG की दिग्गज कंपनी ITC ने डायरेक्ट सेलिंग कंपनी एमवे इंडिया के साथ साझेदारी कर इम्यूनिटी बूस्टर पेय उत्पादों की एक श्रृंखला शुरू करने की तैयारी की है। इसी तरह नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (NIPER) ने विभिन्न वायरल संक्रमणों के लिए शारीरिक प्रतिरोध को मजबूत करने एक प्रतिरक्षा बूस्टर हर्बल चाय लॉन्च की है।

बटरस्कॉच फ्लेवर्ड हल्दी दूध -

इम्यूनिटी बूस्ट करने दिल्ली-एनसीआर में दूध की प्रमुख आपूर्तिकर्ता मदर डेयरी ने हल्दी मिल्क लॉन्च किया है। हल्दी में पाया जाने वाला कर्क्यूमिन स्वास्थ्य प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया में सहायक माना जाता है।

मदर डेयरी ने बटरस्कॉच के स्वाद वाले हल्दी दूध को वयस्कों के साथ-साथ बच्चों को लक्ष्य साधकर पेश किया है। हैश टैग रिश्तों की इम्यूनिटी (#Rishtonkiimmunity) का उपयोग कर मदर डेयरी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नए संस्करण को बढ़ावा दे रही है।

एक अन्य डेयरी ब्रांड अमूल भी इम्यूनिटी बूस्टिंग उत्पादों जैसे; हल्दी, तुलसी, और अदरक के दूध का बाजार तलाश रहा है। कंपनी इन उत्पादों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ावा दे रही है। एक प्रीमियम चाय कंपनी वाघ बकरी चाय अपनी ग्रीन टी को बढ़ावा दे रही है और दावा कर रही है कि यह प्रतिरक्षा को बढ़ाने में मददगार है।

लोकल का वोकल –

इम्यूनिटी बूस्टर के नाम पर काली मिर्च, अदरक, तुलसी के पारंपरिक काढ़े को उत्पाद का रूप देकर मोटा मुनाफा कमाने वाली नामी कंपनियों के अलावा स्थानीय कंपनियां भी पीछे नहीं। पंजाब राज्य आधारित FMCG खिलाड़ी, बॉन ग्रुप ने प्रतिरक्षा-बढ़ाने वाले अवयवों के साथ जड़ी बूटी और बीज की ब्रेड पेश की है। इस खास ब्रेड में हल्दी, काली मिर्च, अजवायन, सूरजमुखी और कद्दू के बीज मिश्रित हैं जो प्रतिरक्षा तंत्र की मजबूती के कारक हैं ऐसा कंपनी का दावा है।

इम्यूनिटी संदेश –

इतना ही नहीं बल्कि पश्चिम बंगाल में तो बीएंडआर मुल्लिक फ्रेंचाइजी के स्टोर्स पर जड़ी-बूटियों और मसालों के मिश्रण से 'इम्यूनिटी संदेश तक पेश कर दिया गया। इस इम्यूनिटी बूस्टर स्पेशल मिठाई संदेश के बारे में दावा है कि उसमें लगभग 14 आयुर्वेदिक तत्व समाहित हैं। साथ ही इसमें चीनी या रंग नहीं मिलाया गया है। हालांकि कंपनी वायरस से संक्रमित के इलाज या बचाव का दावा नहीं कर रही।

इम्यूनिटी बूस्टर आइसक्रीम -

कर्नाटक आधारित डेयरी ब्रांड डेरी डे प्लस ने इम्यूनिटी बूस्ट करने के लिए आइसक्रीम के दो नए फ्लेवर लॉन्च किए हैं। एक है हल्दी आइसक्रीम, जो हल्दी के साथ-साथ काली मिर्च और शहद के साथ भरी जाती है और दूसरी है च्यवनप्राश आइसक्रीम जिसमें आंवला, खजूर और शहद होता है।

सतत संयमित जीवन -

कंपनियों के इन सभी उत्पादों को पॉकेट फ्रेंडली कहा जाता है, जो ग्रामीण और शहरी बाजारों में आसानी से उपलब्ध हैं और कंपनियों के दावों के मुताबिक वे प्रतिरक्षा को बढ़ावा देते हैं। हालांकि यह सर्व स्वीकार्य है कि शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र को एक दिन में काबू नहीं किया जा सकता।

जड़ी-बूटियों और मसालों से युक्त संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और योग से प्रतिरक्षा तंत्र को काबू में रखा जा सकता है। यह भी उल्लेखनीय है कि जब से COVID-19 महामारी ने रौद्र रूप दिखाया है तब से भारत समेत दुनिया भर में आयुर्वेद और योग के महत्व पर भरोसा और बढ़ गया है।

बुजुर्गों की सीख -

भारत में बचपन से ही बच्चों को सीख दी जाती रही है कि पौष्टिक आहार से रोग से लड़ने की शक्ति बढ़ती है। दालचीनी, काली मिर्च, तुलसी, गिलोय जैसी घर पर उपलब्ध रहने वाली तमाम घरेलू चीजों से घरेलू उपचार के भी कई प्रचलित तरीके हैं।

जैसे दालचीनी पाचन में सहायक है और खांसी और सर्दी को ठीक करती है। अदरक एलर्जी, अस्थमा और सर्दी को ठीक करने में मददगार है। तुलसी अपने एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल, एंटी-पायरेटिक और एंटी-कैंसर गुणों से भरपूर है। इन गुणकारी मूल्यों के कारण ही यह भारत में पूजनीय भी है।

इम्यून बूस्टर के तत्व –

आम तौर पर कंपनियों ने जो इम्यूनिटी बूस्टर्स पेश किए हैं उनमें हल्दी, तुलसी, गिलोय, काली मिर्च जैसी घर में मौजूद सामग्रियों का जिक्र है। अब घर में उपलब्ध यह कम महंगी चीजें कंपनियां महंगे दामों पर क्यों बेच रही हैं यह एक यक्ष प्रश्न है।

भारतवर्ष तो इन घरेलू चीजों की निर्धारित और नियंत्रित मात्रा का उपयोग करने की ताकीद पहले से देता रहा है। अब यह अलग बात है कि देसी अमरस जब तक मैंगो जूस बताकर चमकीली पैकिंग में महंगे दाम पर पेश नहीं किया जाता तब तक उसकी उपयोगिता नहीं समझी जाती। वो कहते भी हैं न कि; घर का जोगी जोगड़ा आन गाँव का सिद्ध...

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डिस्क्लेमर आर्टिकल प्रचलित रिपोर्ट्स पर आधारित है। इसमें शीर्षक-उप शीर्षक और संबंधित अतिरिक्त प्रचलित जानकारी जोड़ी गई हैं। इस आर्टिकल में प्रकाशित तथ्यों की जिम्मेदारी राज एक्सप्रेस की नहीं होगी।

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