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जानिए, किसने किया 'हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन' का निर्माण

कोरोना संकट से निपटने के लिए आज हर देश में जिसकी मांग हो रही है, क्या आपको पता है, उस 'हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन' का प्रमुख निर्माता 'भारत' है। जानिए, हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का निर्माण किसने किया ?

Kavita Singh Rathore

Kavita Singh Rathore

राज एक्सप्रेस। पूरी दुनिया 'कोरोनावायरस' (कोविड-19) जैसी जानलेवा महामारी के संकट से गुजर रही है। हर देश कोरोना संकट से अपने देश की जनता को बचाने के लिए कोई ना कोई उपाय करने में जुटा हुआ है। इन सब के बीच अभी तक बहुत से ऐसे मामले भी सामने आये हैं, जिनमें कई लोग ठीक होकर अपने घर वापस चले गए हो। कोविड-19 जैसी जानलेवा महामारी के उपचार के लिए अभी तक इकलौती दवा 'हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन' (Hydroxychloroquine) ही कारगर साबित हो रही है। इतना ही नहीं आज हर देश में जिसकी मांग हो रही है, क्या आपको पता है, उस 'हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन' का प्रमुख निर्माता 'भारत' है। जानिए, हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का निर्माण किसने किया...

किसने किया 'हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन' का निर्माण :

आपको जान कर गर्व और खुशी होगी कि, कोरोना जैसी जानलेवा महामारी से कुछ हद तक निपटने में जो 'हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन' दवाई कारगर साबित हो रही है, उसे भारत के 'आचार्य प्रफुल्ला चंद्र रॉय' (Acharya Prafulla Chandra Rai) ने अपनी संस्था बंगाल केमिकल्स एन्ड फर्टिलाइजर के रसायनगार में निर्मित किया था। इन्हे "रसायन विज्ञान के पिता" के रूप में जाना जाता है, जो एक प्रसिद्ध भारतीय वैज्ञानिक, शिक्षक के साथ ही भारतीय रासायनिक शोधकर्ताओं के पहले आधुनिक में से एक थे। सरल शब्दों में कहे तो, वो ही थे जिन्होंने भारत में रसायन उद्योग (Chemical Industry) की नींव रखी थी।

स्थिर यौगिक पारा नाइट्रेट की खोज :

उन्होंने 1896 में स्थिर यौगिक पारा नाइट्रेट (Stable Compound Mercurous Nitrate) की खोज भी की थी। इसके बाद 'आचार्य प्रफुल्ला चन्द्र राय' द्वारा साल 1901 में बंगाल केमिकल्स की स्थापना की गई थी। जो, भारत में पहली दवा कंपनी है। इतना ही नहीं यह फार्मा कंपनी 'हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन' का निर्माण करने वाली अग्रणी कंपनी भी है।

क्या कर सकती है 'हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन' दवाई :

जानकारी के लिए बता दें, एक रिसर्च में बताया गया था कि, 'हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन' दवाई कोरोनावायरस से लड़ने के लिए काफी फायदेमंद है और यह दवाई दुनिया में सबसे ज्यादा मात्रा में भारत में ही बनती है इतना ही नहीं इस दवाई का सबसे बड़े स्तर पर भारतीय कंपनियां ही उत्पादन करती हैं। वैसे इस दवाई का इस्तेमाल ज्यादातर मलेरिया जैसी खतरनाक बीमारी से लड़ने के लिए किया जाता है।

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