क्रिप्‍टोकरेंसी पर लगाए गए बैन वाला बिल अब होगा विधेयक शीतकालीन सत्र में पेश
क्रिप्‍टोकरेंसी पर लगाए गए बैन वाला बिल अब होगा विधेयक शीतकालीन सत्र में पेशKavita Singh Rathore -RE

क्रिप्‍टोकरेंसी पर लगाए गए बैन वाला बिल अब होगा विधेयक शीतकालीन सत्र में पेश

पिछले दिनों क्रिप्टोकरेंसी को लेकर संसदीय पैनल की पहली बैठक हुई। इसके बाद क्रिप्‍टोकरेंसी पर पाबंदी लगाने के लिए एक बिल पेश किया गया। जो अब विधेयक शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा।

राज एक्सप्रेस। क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) एक ऐसी वर्चुअल करेंसी या ऑनलाइन मुद्रा है, जिसे हम देख या छू नहीं सकते हैं। यह ज्यादातर सुर्ख़ियों में बनी रहती है। इसको लेकर कई नियम निर्धारित किए गए हैं। जिनमें समय-समय पर बदलाव किए जाते हैं। ज्यादातर निवेशक और ट्रेडर्स इसमें रूचि रखते हैं। वहीं, अब सरकार पिछले कुछ समय से क्रिप्टोकरेंसी के नियमों में कुछ बदलाव करने को लेकर विचार कर रही है। वहीं, पिछले दिनों क्रिप्टोकरेंसी को लेकर संसदीय पैनल की पहली बैठक हुई। इसके बाद क्रिप्‍टोकरेंसी पर पाबंदी लगाने के लिए एक बिल पेश किया गया। जो अब विधेयक शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा।

विधेयक शीतकालीन सत्र में पेश होगा बिल :

दरअसल, भारत में अधिकृत डिजिटल करेंसी क्रिप्टोकरेंसी के विनियमन कथा प्राइवेट आभासी मुद्रा पर पाबंदी के उद्देश्य से प्रस्तावित एक विधेयक संसद के शीतकालीन सत्र में पेश करने की बात सामने आई है और यह शीतकालीन सत्र 29 नवंबर से शुरू होने जा रहा है। बता दें, शीतकालीन सत्र के लिए सरकार द्वारा कामकाज के अनुसार संसद के आगामी सत्र में कुल 26 विधेयक प्रस्तुत किए जाने हैं। क्रिप्टो करेंसी एवं अधिकृत डिजिटल मुद्रा विनियमन विधेयक 2021 भी प्रस्तुत किया जाना है।

प्रावधान प्रस्तावित :

इस विधेयक में भारत में डिजिटल मुद्रा की औपचारिक निर्गमन एवं प्रचलन की व्यवस्था एवं विनियमन का प्रावधान प्रस्तावित है। इसके अलावा इसमें निजी स्तर पर क्रिप्टो करेंसी यानी आभासी मुद्रा के कारोबार पर पाबंदी के प्रावधान हैं। लोकसभा के बुलेटिन के अनुसार यह विधेयक भारत में सभी प्रकार की निजी क्रिप्टो करेंसी के कारोबार पर प्रतिबंध के लिए इसमें आभासी मुद्रा से जुड़ी प्रौद्योगिकी के संवर्धन एवं उपयोग की कुछ सूट भी देने का प्रस्ताव है।

PM मोदी की बैठक :

क्रिप्टोकरेंसी को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 नवंबर को एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई थी और इसके विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई थी। कई बाजारों में क्रिप्टो करेंसी निवेश का आकर्षक विकल्प बनती जा रही है लेकिन क्रिप्टो करेंसी के बाजार में कोई पारदर्शिता ना होने के कारण इसमें भारी उतार-चढ़ाव दिखता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों सिडनी डायलॉग को संबोधित करते हुए कहा था कि सभी लोकतांत्रिक देशों के लिए क्रिप्टो करेंसी के बारे में मिलकर काम करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए ऐसे मुद्रा गलत लोगों के हाथ में ना पड़े और इस के चक्कर में युवा पीढ़ी बर्बाद न हो।

क्रिप्टोकरेंसी पर संसदीय पैनल की पहली बैठक :

क्रिप्टोकरेंसी को लेकर संसदीय पैनल की पहली बैठक के दौरान हुई चर्चा में आम सहमति यह बनी है कि, 'क्रिप्टो और ब्लॉकचैन टेक्नोलॉजी को पूरी तरह से बैन नहीं किया जा सकता। इसे सही तरीके से रेगुलेट करने की जरूरत है। हालांकि, उद्योग संघ और हितधारक ने इस बारे में कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है कि, इसकी डोर किसके हाथों में होना चाहिए। इसके अलावा इस बैठक के दौरान संसदीय स्थाई समिति ने क्रिप्टो एक्सचेंजों, उद्योग निकायों और अन्य हितधारकों के प्रतिनिधियों से भी क्रिप्टोकरेंसी को लेकर काफी बातचीत की।

RBI गवर्नर का कहना :

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) गवर्नर शक्तिकांत दास ने इस मामले में बयान साझा करते हुए SBI कॉन्क्लेव में कहा, 'जब RBI ये कहता है कि, क्रिप्टोकरेंसी से मेक्रोइकोनॉमिक और फाइनेंशियल स्टेबिलिटी की चिंताएं हैं, तो इस मुद्दे पर गहन चर्चा की जरूरत है। कोरोना महामारी के वजह से लगाए गए लॉकडाउन के हटने के बाद भारत में लगभग सभी इकोनॉमिक इंडिकेटर रिकवरी की ओर इशारा कर रहे हैं। भारत के पास महामारी के बाद तेजी से बढ़ने का पोटेंशियल है। निधि निजी आवासी मुद्राएं वित्तीय प्रणाली के लिए खतरा है क्योंकि उन पर केंद्रीय बैंक कोई नियम नहीं चलता है।'

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