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बांड यील्ड बढ़ने व मध्य-पूर्व संकट गहराने की वजह से fPI ने इस माह शेयरों से निकाले 20300 करोड़

अमेरिका में बॉन्ड पर यील्ड बढ़ने और इजराइल-हमास संघर्ष गहराने से पैदा हुई अनिश्चितता की वजह से विदेशी निवेशकों में अपने पैसे निकालने की हड़बड़ी पैदा हो गई है।

हाईलाइट्स

  • इस साल अब तक एफपीआई ने किया एक लाख करोड़ रुपए का निवेश

  • इस समय पिछले 16 साल के हाई पर जा पहुंची है अमेरिकी बांड यील्ड

  • इस वजह से विदेशी निवेशक भारतीय बाजारों से निकालने में जुटे पैसा

राज एक्सप्रेस। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने अक्टूबर में अब तक भारतीय शेयर बाजार से 20,300 करोड़ रुपये से अधिक की निकासी की है। अमेरिका में बॉन्ड पर यील्ड बढ़ने और इजराइल-हमास संघर्ष के गहराने की वजह से पैदा हुई अनिश्चितता की वजह से विदेशी निवेशकों में पैसे निकालने की हड़बड़ी पैदा हो गई है। हालांकि, इस दौरान एफपीआई ने भारतीय बॉन्ड बाजार में 6,080 करोड़ रुपये का निवेश भी किया है। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, इस माह 27 अक्टूबर तक एफपीआई ने 20,356 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। अभी अक्टूबर के दो कारोबारी सत्र बचे हैं। इससे पहले सितंबर में भी एफपीआई नेट सेलर रहे और उन्होंने 14,767 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे।

इससे पहले, मार्च से अगस्त तक एफपीआई यानी फारेन पोर्टफोलियो निवेशक लगातार बायर रहे थे। इस दौरान उन्होंने शेयर बाजारों में 1.74 लाख करोड़ रुपये की निवेश किया था। बाजार के विशेषज्ञों का कहना है कि आगे चलकर एफपीआई के निवेश का प्रवाह अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की बैठक के नतीजों और आर्थिक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगा। लघु अवधि में वैश्विक अनिश्चितता और अमेरिका में ब्याज दरों में बढ़ोतरी के चलते विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक या एफपीआई सतर्क रुख अपना सकते हैं। हालांकि आर्थिक मोर्चे पर भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत वृद्धि, शेयरों और बॉन्ड में विदेशी निवेशकों का आकर्षण बनाए रखेगी।

अमेरिका में 16 साल में पहली बार 10 साल के बॉन्ड पर यील्ड 5 प्रतिशत के स्तर को पार कर गई है। इस वजह से एफपीआई भारत जैसे उभरते हुए बाजारों से अपना ध्यान हटाकर अधिक सुरक्षित विकल्प अमेरिकी सिक्योरिटीज में निवेश करने को ज्यादा तरजीह दे रहे हैं। इसके साथ ही मध्यपूर्व में इजराइल-हमास संघर्ष के अगले दौर में प्रवेश कर जाने से बाजार में नकारात्मक धारणा को बल मिला है। शेयरों में इस साल अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का कुल निवेश एक लाख करोड़ रुपये रहा है। जबकि, बॉन्ड बाजार में उनका निवेश 35,200 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि एफपीआई मुख्य रूप से वित्तीय और आईटी शेयरों में बिकवाली कर रहे हैं।

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