एजेंसियों ने घटाई भारत की GDP ग्रोथ रेट, वजह COVID 19 लॉकडाउन
कोविड लॉकडाउन के कारण रेटिंग एजेंसियों ने अपने पूर्वानुमान में कटौती की है।Social Media

एजेंसियों ने घटाई भारत की GDP ग्रोथ रेट, वजह COVID 19 लॉकडाउन

सवाल : दुनिया के बड़े सबसे लॉकडाउन से दुनिया की सबसे बड़ी भारतीय अर्थव्यवस्था पर कितना असर पड़ा था, पड़ा है और पड़ेगा? सभी सवालों के जवाब जानें हमारे साथ...

हाइलाइट्स

  • 7 से 8 लाख करोड़ रुपया नुकसान का जताया अंदेशा

  • आर्थिक सुधारों के बाद सबसे सुस्त ग्रोथ रेट- वर्ल्ड बैंक

  • लॉकडाउन बाद ट्रांसपोर्ट को गति पकड़ने लगेगा 3 माह

  • वर्ल्ड्स बिगेस्ट लॉकडाउन : इंडियन इकोनॉमी पर संकट

  • NAREDCO को 1 लाख करोड़ रुपया नुकसान की आशंका

राज एक्सप्रेस। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) से अनुमोदित और भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (SEBI) में पंजीकृत पूर्ण सेवा क्रेडिट रेटिंग एजेंसी एक्यूटी रेटिंग्स एंड रिसर्च लिमिटेड (Acuité Ratings & Research Limited) के मुताबिक वित्तकाल अप्रैल-जून 2020-21 के दौरान सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 5-6 प्रतिशत सीमा तक संकुचन का खतरा है।

मामूली वृद्धि की संभावना :

दुनिया के सबसे बड़े इंडियन लॉकडाउन ने अधिकांश कारखानों और व्यवसायों को बंद कर दिया, उड़ानें निलंबित हैं, ट्रेनों को रोक दिया गया। फिलहाल वाहनों के साथ लोगों की आवाजाही अभी भी प्रतिबंधित है। आर्थिक नीति विश्लेषकों और स्थानीय एवं राष्ट्रीय उद्योग निकायों ने इस बारे में अपने विचार रखे हैं।

उनकी राय के मुताबिक इस वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था को 21 दिनों के लिए एहतियातन लागू तालाबंदी के कारण 7 से 8 लाख करोड़ रुपयों के नुकसान का बोझ पड़ेगा। समाचार एजेंसी की रिपोर्ट्स के अनुसार रेटिंग एजेंसी ने जुलाई-सितंबर की दूसरी तिमाही के दौरान एक सर्वोत्तम स्थिति में मामूली वृद्धि की संभावना भी जताई है।

लॉकडाउन का सेकंड फेज :

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने COVID-19 संक्रमण प्रसार को रोकने देश में 25 मार्च से 21 दिनों के लिए पूर्ण तालाबंदी की घोषणा की थी। 14 अप्रैल को 3 सप्ताह की प्रथम तालाबंदी का दौर समाप्त होने के बाद एहतियातन इस लॉकडाउन को फिर से और 19 दिनों के लिए आगे बढ़ा दिया गया है।

इसे लॉकडाउन का दूसरा दौर कहा जा सकता है। दूसरा फेज 3 मई तक रहेगा। प्रथम लॉकडाउन के दौर में आर्थिक गतिविधि, निवेश, निर्यात और विवेकाधीन खपत जैसे सभी मोर्चों को मिलाकर कुल 70 प्रतिशत से अधिक ठहराव का सामना करना पड़ा। गौरतलब है कि; लॉकडाउन के दौरान केवल कृषि, खनन, यूटिलिटी सर्विसेस, कुछ वित्तीय और आईटी सेवाओं और सार्वजनिक सेवाओं जैसी आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं को संचालित करने की अनुमति प्रदान की गई है।

अहम प्रश्न :

सवाल उठ रहे हैं कि "दुनिया के सबसे बड़े लॉकडाउन से दुनिया की सबसे बड़ी भारतीय अर्थव्यवस्था पर कितना असर पड़ा था, पड़ा है और पड़ेगा? इस बारे में विश्लेषकों ने अनुमान लगाया है कि 21 दिन की तालाबंदी मियाद की भारतीय अर्थव्यवस्था को 7 से 8 लाख करोड़ रुपया कीमत चुकाना होगी।

बेवक्त एंट्री :

सेंट्रम इंस्टीट्यूशनल रिसर्च का मानना है कि; भारत में पैंडेमिक कोरोना वायरस डिजीज की एंट्री बेमौका हुई है। भारत में कोरोना ने तब रंग दिखाया जब साहसिक वित्तीय/मौद्रिक उपायों के बाद देश की अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत दिख रहे थे। रिसर्च ग्रुप ने इकोनॉमी में फिर से FY2021(अप्रैल 2020 से मार्च 2021) के लिए एकल अंकों में कम वृद्धि की संभावना जताई है। संगठन के मुताबिक "राष्ट्रव्यापी पूर्ण लॉकडाउन से कम से कम 7-8 खरब रुपयों का नुकसान होगा।"

कीमत 21 दिनों की! :

इस महीने की शुरुआत में Acuite रेटिंग्स एंड रिसर्च लिमिटेड ने लॉकडाउन में भारतीय अर्थव्यवस्था को रोजाना लगभग 4.64 अरब अमेरिकी डॉलर (35 हजार करोड़ रुपये से अधिक) की कीमत चुकाने का अनुमान जताया था। एजेंसी के मुताबिक पूरे 21 दिन के लॉकडाउन से जीडीपी को 98 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 7.5 लाख करोड़ रुपया) का नुकसान हो सकता है।

COVID-19 के तेज प्रसार ने न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था को बाधित किया है बल्कि भारत के कई हिस्सों को आंशिक रूप से अपनी चपेट में लिया है। देश में सन्नाटा पसरने की शुरुआत मार्च महीने की शुरुआत से हो गई थी लेकिन लगभग पूरी तरह से लॉकडाउन की स्थिति सरकारी घोषणा के बाद 25 मार्च से उपजी।

लंबे देशव्यापी बंद के दौरान परिवहन, होटल, रेस्तरां और रियल एस्टेट गतिविधियां बड़े पैमाने पर प्रभावित हुई हैं। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी के मुताबिक 15 अप्रैल को लॉकडाउन के प्रथम दौर की समाप्ति तक "आर्थिक गतिविधियों में लंबे समय तक व्यवधान के जोखिम; प्रकोप की तीव्रता के आधार पर मौजूद रहे।"

"रोजाना प्रति ट्रक औसतन 2,200 रुपये के मान से तालाबंदी के शुरुआती 15 दिनों के दौरान ट्रक चालकों को होने वाली सामूहिक हानि लगभग 35,200 करोड़ रुपया मानी जा सकती है।"

नवीन गुप्ता, महासचिव, अखिल भारतीय मोटर परिवहन कांग्रेस (AIMTC)

उबरने में लगेंगे 3 माह :

लगभग 93 लाख ट्रांसपोर्टर्स और ट्रक चालकों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन AIMTC के मुताबिक- “देश के लगभग एक करोड़ ट्रकों में से 90 फीसदी से अधिक ट्रक के पहिये लॉकडाउन के दौरान थमे रहे। जबकि आवश्यक वस्तुओँ के लिए केवल नाममात्र के ट्रकों की आवाजाही जारी रही। उनका मानना है कि तालाबंदी हटने के बाद लोगों की क्रय शक्ति प्रभावित होने से गैर जरूरी वस्तुओं की खपत प्रभावित होगी जिससे ट्रक परिवहन सेवा को संभलने में कम से कम 2 से 3 महीने का अतिरिक्त समय लगेगा।”

खुदरा व्यापारियों की निकाय नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल ने इस सेक्टर में 1 लाख करोड़ रुपये के घाटे का अंदेशा जताया है।

“मुझे अनुमान लगाने में डर लग रहा है कि नुकसान क्या होगा? भारत के रूढ़िवादी आंकलन आधार पर मुझे लगता है, शायद संभावित नुकसान 1 लाख करोड़ रुपये हो सकता है। यह एक रूढ़िवादी आंकड़ा है। थंब रूल के आधार पर कम से कम 1 लाख करोड़ रुपये।"

निरंजन हीरानंदानी, अध्यक्ष, नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल

खुदरा व्यापार की चिंता :

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स का अनुमान है कि; मार्च की दूसरी छमाही में COVID-19 महामारी के कारण देश के खुदरा व्यापार में होने वाला नुकसान 30 बिलियन अमेरिकी डालर रहा। गौरतलब है 70 मिलियन छोटे मध्यम और बड़े व्यापारियों और तकरीबन 45 करोड़ लोगों के इस रोजगार सृजन क्षेत्र में हर महीने लगभग 70 बिलियन अमेरिकी डॉलर का कारोबार होता है।

COVID-19 के प्रकोप के बारे में चिंताओं के आधार पर अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के एक मेजबान ने वित्तीय वर्ष 2021 के लिए भारत के आर्थिक विकास अनुमान में कटौती की है। विश्व बैंक ने रविवार को कहा कि; "भारतीय अर्थव्यवस्था में वृद्धि की उम्मीद है। इसमें 1 अप्रैल से शुरू होने वाले 2020-21 के राजकोष में 1.5 प्रतिशत से 2.8 प्रतिशत तक की वृद्धि के संकेत मिले हैं। वर्ल्ड बैंक का मानना है कि; "1991 के आर्थिक सुधारों के बाद से यह भारत की सबसे सुस्त ग्रोथ रेट है।"

एजेंसियों ने घटाया अनुमान :

एशियाई विकास बैंक (ADB) को वित्त वर्ष 21 में भारत की आर्थिक वृद्धि में 4 फीसदी की फिसलन नजर आई है। जबकि एस एंड पी ग्लोबल रेटिंग्स ने देश की जीडीपी ग्रोथ के अपने पिछले घोषित 5.2 फीसदी के अनुमान में कटौती करते हुए इसे अब 3.5 फीसदी निर्धारित किया है।

फिच रेटिंग्स ने अपने अनुमान में भारत की वृद्धि 2 फीसदी मानी है जबकि इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने अपने वित्त वर्ष 2021 के पूर्वानुमान 5.5 फीसदी को संशोधित कर 3.6 प्रतिशत किया है।

मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने 2020 कैलेंडर वर्ष के दौरान भारत की जीडीपी वृद्धि के अपने पूर्वानुमान 5.3 प्रतिशत को घटाकर 2.5 प्रतिशत कर दिया है। मूडीज ने यह कहते हुए चेताया है कि "कोरोनो वायरस महामारी वैश्विक अर्थव्यवस्था को अभूतपूर्व झटका देगी।"

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी एक्यूटी रेटिंग्स एंड रिसर्च लिमिटेड (Acuité Ratings & Research Limited) के मुताबिक वित्तकाल अप्रैल-जून 2020-21 के दौरान सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 5-6 प्रतिशत सीमा तक संकुचन का खतरा है। साथ ही जुलाई-सितंबर की दूसरी तिमाही के दौरान सर्वोत्तम स्थिति में मामूली वृद्धि की भी संभावना है।

विगत दिनों 14 अप्रैल को 21 दिनों के बाद बढ़ाए गए 19 दिन के लॉकडाउन के कारण भारत की सुस्त अर्थव्यवस्था के और मंथर पड़ने के पूरे चांस हैं। हालांकि केंद्र सरकार ने उम्मीद जगाई है कि सतर्कता का पालने करने पर सुरक्षित माहौल में कुछ सेवाओं को फिर से परिचालन की अनुमति प्रदान की जा सकती है।

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