Budget 2021 : सात साल से कई टैक्स छूट की सीमा नहीं बढ़ी
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Budget 2021 : सात साल से कई टैक्स छूट की सीमा नहीं बढ़ी

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज केंद्रीय बजट पेश करेंगी। वित्त मंत्री के पास इस साल बजट में बहुत कुछ देने को नहीं होगा, इसलिए हमें बजट 2021 से ज्यादा आशाएं नहीं रखना चाहिए।

हाईलाइट्स :

  • टैक्स छूट की सीमा

  • 80 सी के तहत निवेश कर के इनकम टैक्स आय पर टैक्स छूट में नहीं हुआ बदलाव

  • कोरोना की वजह से सरकार का बजट भी बिगड़ा हुआ

  • बजट से सबसे अधिक उम्मीदें मिडिल क्लास और खासकर नौकरीपेशा लोगों को

राज एक्सप्रेस। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज केंद्रीय बजट पेश करेंगी। वित्त मंत्री के पास इस साल बजट में बहुत कुछ देने को नहीं होगा, इसलिए हमें बजट 2021 से ज्यादा आशाएं नहीं रखना चाहिए। इस बजट से सबसे अधिक उम्मीदें तो मिडिल क्लास और खासकर नौकरीपेशा लोगों को है। कोरोना काल में बहुत सारे लोगों की नौकरी चली गई और बहुत से लोगों की सैलरी भी कटी थी। ऐसे में लोग इस बजट में सरकार से कुछ ज्यादा ही उम्मीदें कर रहे हैं। बजट 2021-22 से सबसे बड़ी उम्मीद तो यही है कि इस बार सरकार टैक्स छूट की सीमा को बढ़ा सकती है। अभी टैक्स छूट की सीमा 2.5 लाख रुपए है, जिसे बढ़ाकर 3 लाख रुपए किया जा सकता है। ऐसी उम्मीद इसलिए भी की जा रही है, क्योंकि पिछले करीब 7 सालों से इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। जुलाई 2014 में आए बजट में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने यह सीमा 2 लाख रुपए से बढ़ाकर 2.5 लाख रुपए की थी। मौजूदा समय में आयकर अधिनियम की धारा 80 सी के तहत निवेश कर के इनकम टैक्स में 1.5 लाख रुपए तक की आय पर टैक्स छूट पाई जा सकती है। इस बार इसे बढ़ाकर दो लाख रुपए तक किए जाने की उम्मीद है। एक्सपर्ट की मानें तो इसे बढ़ाकर तीन लाख रुपए किया जाना चाहिए इसमें भी पिछले सात सालों से कोई बदलाव नहीं हुआ है। जुलाई 2014 में ही तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इसे 1 लाख रुपए से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपए किया था।

कोरोना काल में समझा आई टर्म इंश्योरेंस की महत्ता :

उम्मीद तो यह भी है कि मौजूदा सरकार इस बार के बजट में टर्म इंश्योरेंस को बढ़ावा देने के कदम उठा सकती है। कोरोना काल में बहुत सारे लोगों को टर्म इंश्यारेंस की महत्ता समझ आ गई है, लेकिन अभी भी बहुत सारे लोग इसमें पैसे खर्च करने से कतराते हैं। टर्म इंश्योरेंस किसी भी व्यक्ति की मौत के बाद उसके परिवार की देखभाल के लिए बहुत जरुरी है। 2020-21 का पूरा साल ही कोरोना की चपेट में रहा है। इस दौरान बहुत सारे लोग कोरोना की चपेट में आए और उन्हें दवा पर काफी खर्च करना पड़ा। बहुत से लोगों ने भविष्य के खतरे को देखते हुए अपना मेडिकल इंश्योरेंस कवरेज बढ़वा लिया है। कोरोना काल को देखते हुए ये उम्मीद की जा रही है कि मेडिकल इंश्योरेंस को देखते हुए इस बार 80 डी के तहत मिलने वलो 25 हजार तक के डिडक्शन को बढ़ाकर 50 हजार रुपए कर सकती है। सीनियर सिटिजन के लिए ये सीमा बढ़ाकर 75 हजार रुपए तक किए जाने की उम्मीद है।

कोरोना की वजह से सरकार का बजट भी बिगड़ा हुआ है :

कोरोन की वजह से सरकार का बजट भी बिगड़ा हुआ है। यह बजट बहुत चुनौतियों भरा होगा। ये बजट आजादी से लेकर अब तक का सबसे ज्यादा चुनौतियों भरा होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि भारत में कोरोना वायरस महामारी को आए हुए करीब एक साल हो गया है जिसकी वजह से अर्थव्यवस्था को बहुत नुकसान हुआ है।

आम आदमी की बैलेंस शीट बिगड़ी :

कोरोना काल ने आम आदमी की भी बैलेंस शीट बिगाड़ी है। कई लोगों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। कुछ जगह कर्मचारियों के वेतन में कटौती हुई है। काम-धंधों में कमाई में कमी आई है। वहीं कोरोना काल में काम करने का तरीका काफी बदल गया है। बहुत सारे लोग वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं। ऐसे में बजट 2021 में आम आदमी को उम्मीद है कि घर से काम करने के लिए भी सरकार टैक्स में कुछ छूट दे सकती हैं, क्योंकि घर से काम करने में कर्मचारी को इंटरनेट, कुर्सी-मेज और कई बार तो छोटा ऑफिस तक सेट-अप करना पड़ा है। उम्मीद की जा रही है कि इसके लिए सरकार कोई स्टैंडर्ड डिडक्शन की ही घोषणा कर दें।

एक्सपर्ट व्यू :

लोगों के हाथों में खर्च लायक नगदी हो :

अर्थव्यवस्था का पहिया तभी घूमता है जब मांग सतत निकलती रहे। लोगों के हाथों में खर्च लायक नगदी हो। आयकर स्लेब में परिवर्तन करके मध्यम वर्ग की उपभोग क्षमता में वृद्धि की जा सकती है। प्रारंभिक आयकर छूट की सीमा को 2.50 लाख से बढ़ाकर पांच लाख किया जाना चाहिए, जिससे आयकर दाता को 12 हजार 500 रुपए की अतिरिक्त क्रय शक्ति प्राप्त होगी। दूसरी स्लेब जो पांच से 10 लाख तक की आय पर लागू है उसमें 20 प्रतिशत कर को घटाते हुए 10 प्रतिशत किया जाना चाहिए जिससे 50 हजार रुपए की राशि आयकर दाता को उपलब्ध होगी।

डॉ. विमला जैन, अर्थशास्त्री, सरकारी कॉलेज

जीडीपी की वृद्धि दर हो सकती है 10 से 12 फीसदी :

बजट में पूंजीगत व्यय को बढ़ाने, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में पूंजी डालने, सरकारी एकाधिकार को तोड़ने के लिए सरकारी परिसंपत्तियों की बिक्री को तेज करने, रियल एस्टेट को राहत दिए जाने, निम्न आय वर्ग के लिए कर राहत देने पर जोर हो सकता है। देश की जीडीपी की वृद्धि दर 10 से 12 फीसदी हो सकती है और यदि इतनी वृद्धि होती है तो अगला साल देश के लिए उन्नत हो सकता है। कारोबार ग्रोथ को बढ़ाने और एमएसएमई के प्रोत्साहन के लिए व्यावसायिक सेवाओं पर जीएसटी दर पांच फीसदी तक घटाया जाना चाहिए जो इस समय 18 फीसदी है। वहीं इस समय जिन सेवाओं पर 18 फीसदी जीएसटी लगता है उनमें कानूनी पेशेवरों, कोरियर सर्विसेज और मैनेजमेंट कंसल्टिंग के अलावा सीए, आर्किटेक्ट्स, एचआर, मार्केटिंग, सप्लाई चेन मैनेजमेंट व होस्टिंग शामिल हैं।

सीए गौरव माहेश्वरी, सचिव इंदौर सीए ब्रांच

प्रतिदिन हो पेनल्टी की गणना :

इनकम टैक्स रिटर्न देरी से फाइल करने वालों को भी इस बार बजट में कुछ राहत मिलना चाहिए। वर्तमान में इनकम टैक्स रिटर्न देरी से फाइल करने वालों पर अलग-अलग पेनल्टी का प्रावधान है। पांच लाख से अंदर वालों को एक हजार और पांच लाख से उपर वालों को 10 हजार रुपए की पेनल्टी का प्रावधान है। अभी तक ऐसा होता रहा है कि यदि कोई व्यक्ति समय में फाइल नहीं कर पाया तो उसे उसके स्लैब के हिसाब से पेनल्टी देना रहती है। लंबे समय से सीए सदस्यों द्वारा मांग उठाई जा रही है इसलिए इस बजट में उम्मीद है कि प्रतिदिन के हिसाब से पेनल्टी की गणन हो। इसके लिए भी एक तय समय सीमा होना चाहिए कि यदि उसके अंदर फाइल किया है तो प्रतिदिन के हिसाब से पेनल्टी लगाई जाए और तय समय के बाद फाइल करने पर पूरी पेनल्टी लगाने का प्रावधान हो।

सीए आनंद जैन, पूर्व सचिव इंदौर सीए ब्रांच

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