भारत में बढ़ती महंगाई अर्थव्यवस्था के लिए बन सकती है दर्द का सबब
Covid-19 की थर्ड वेव से जूझ रहे भारत में मुद्रास्फीति तीन सालों से बनी है चिंता का सबब।- सांकेतिक चित्रNeelesh Singh Thakur – RE

भारत में बढ़ती महंगाई अर्थव्यवस्था के लिए बन सकती है दर्द का सबब

सभी कोविड-19 लहर में, हमने महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखला के प्रभाव को देखा है और मुद्रास्फीति पर इसका प्रभाव महत्वपूर्ण रहा है। - अर्थशास्त्री

हाइलाइट्स

  • Covid-19 की थर्ड वेव से जूझ रहा भारत

  • मुद्रास्फीति तीन सालों से बनी चिंता का सबब

  • पहली तिमाही में मुद्रास्फीति RBI की सीमा से ऊपर

राज एक्सप्रेस। एक अर्थशास्त्री के अनुसार, बढ़ती मुद्रास्फीति भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण "दर्द-बिंदु" बनी रहेगी क्योंकि देश कोविड -19 संक्रमण की तीसरी लहर से जूझ रहा है।

एक स्वतंत्र शोध फर्म, कॉन्टिनम इकोनॉमिक्स (Continuum Economics) में एशिया की प्रमुख अर्थशास्त्री चारु चानना ने कहा, बढ़ती कीमतें पिछले तीन वर्षों से भारत के लिए चिंता का विषय रही हैं।

पहली तिमाही में, "हम वास्तव में मुद्रास्फीति (Inflation) को 6% के स्तर से ऊपर उठते हुए देखते हैं - जो कि केंद्रीय बैंक आरबीआई (RBI) की ऊपरी सीमा पर है।"

सीएनबीसी के "स्क्वॉक बॉक्स एशिया" से चर्चा के दौरान चानना ने भारतीय रिजर्व बैंक का जिक्र करते हुए मंगलवार को इस बारे में विचार जाहिर किये।

"ओमिक्रॉन लहर आगे की चुनौतियों का सुझाव देती है। पिछली सभी कोविड-19 लहर में, हमने महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखला के प्रभाव को देखा है और मुद्रास्फीति पर इसका प्रभाव महत्वपूर्ण रहा है।"
चारु चानना, एशिया की प्रमुख अर्थशास्त्री, कॉन्टिनम इकोनॉमिक्स

उन्होंने कहा, "यह अभी अर्थव्यवस्था के लिए सबसे महत्वपूर्ण पेन पॉइंट्स में से एक होने जा रहा है।"

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RBI की रिपोर्ट -

पिछले हफ्ते जारी केंद्रीय बैंक की नवीनतम वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में, आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने रेखांकित किया कि भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक विकास और हाल ही में अत्यधिक पारगम्य ओमिक्रॉन वैरिएंट के उद्भव से विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि; "कॉस्ट-पुश प्रेशर्स की वजह से मुद्रास्फीति चिंता का विषय बनी हुई है।"

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि ओमिक्रॉन से पहले ही, वैश्विक विकास और व्यापार में शिथिलता देखी जा रही थी। आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और बाधाओं जैसे कारकों से इन कारकों पर असर पड़ा।

"इन ताकतों ने, कमोडिटी की कीमतों में वृद्धि के साथ, वैश्विक आर्थिक संभावनाओं के लिए एक गंभीर जोखिम पैदा करते हुए, पूरे भौगोलिक क्षेत्रों में मुद्रास्फीति के दबाव को लगातार बनाए रखा है।"
केंद्रीय बैंक

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भारत में बढ़ रहा कोविड

भारत में कोविड-19 (Covid-19) के मामले फिर से बढ़ रहे हैं क्योंकि दिल्ली और मुंबई जैसे कई राज्य ओमिक्रॉन वैरिएंट के संक्रमण से प्रभावित लोगों की बढ़ती संख्या से जूझ रहे हैं।

अर्थशास्त्री चारु ने कहा कि; डेल्टा लहर के विपरीत, भारत इस बार टीकाकरण की बढ़ती दरों के कारण ओमिक्रॉन वैरिएंट (omicron variant) को संभालने के लिए बेहतर तरीके से तैयार है।

उन्होंने कहा कि; “भारत में टीकाकरण डेल्टा लहर के समय की तुलना में बहुत बेहतर है। हम 15 साल के बच्चों का टीकाकरण करने पर विचार कर रहे हैं, साथ ही हम बूस्टर शॉट्स पर भी विचाररत् हैं।"

नवीनतम सरकारी आंकड़ों ने मंगलवार को 24 घंटे की अवधि में 168,000 नए मामले दर्शाए। मंगलवार तक टीकाकरण का संचयी स्तर 1.53 बिलियन से अधिक वैक्सीन खुराक पर था।

उन्होंने कहा कि; अवर वर्ल्ड इन डेटा के अनुसार, अब तक, देश की लगभग 45% आबादी को 9 जनवरी तक पूरी तरह से टीका लगाया जा चुका है। फिर भी, अन्य विकसित बाजारों की तुलना में भारत में टीकाकरण की दर कम है।

अर्थशास्त्री ने कहा कि; "मुझे लगता है कि यहां चिंता का एक अन्य बिंदु यह है कि यूएस और यूके में हमने ओमिक्रॉन की जो लहर देखी है - वे ज्यादातर अपनी आबादी को प्रतिरक्षित करने के लिए एमआरएनए (mRNA) टीकों पर निर्भर थे।"

"भारत ने अब तक केवल स्थानीय टीकों पर भरोसा किया है, और यह देखा जाना बाकी है कि वे नए संस्करण के मुकाबले कितना प्रभावी हैं।"

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