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क्या वित्त मंत्री 100 अरब के फंड से पाट पाएंगी सेक्टर की खाई?
क्या वित्त मंत्री 100 अरब के फंड से पाट पाएंगी सेक्टर की खाई?|Neha Shrivastava - RE
अर्थव्यवस्था

क्या वित्तमंत्री 100 अरब के फंड से पाट पाएंगी रियल एस्टेट सेक्टर की खाई?

इंडस्ट्री सरकार से लाखों लोगों को रोजगार देने वाले सेक्टर को बूस्ट करने इससे ज्यादा की उम्मीद कर रही थी।- क्रेडाई चेयरमैन

Neelesh Singh Thakur

राज एक्सप्रेस। किसी देश के रियल एस्टेट कारोबार की दिशा-दशा एक तरह से उसकी अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य को परखने की सर्वोत्तम कुंजी है। भारतीय अर्थव्यवस्था के गिरते स्वास्थ्य के मेन फैक्टर रियल एस्टेट मार्केट की तंगहाली चिंता का विषय है। इस सेक्टर में बड़े-छोटे निर्माण कार्य से जुड़े बड़े शिक्षित-अशिक्षित वर्ग की आमदनी का जरिया है। प्रतिकूल सरकारी नीतियों के कारण एक बड़ा वर्ग रोजगार से निरंतर वंचित हो रहा है।

आकस्मिक नोट बंदी और उसके बाद टैक्स पेयर्स को असमंजस के बीच रखकर लागू जीएसटी के बाद से प्रॉपर्टी मार्केट की हालत खस्ता है। बीते सालों में इस मार्केट के बारे में लोगों की धारणा को तगड़ी चोट पहुंची है। ग्राहकों की आर्थिक स्थिति डांवाडोल होने से रियल एस्टेट कारोबार में मांग प्रभावित हुई है। साथ ही खरीदार और डेवलपर्स से जुड़े टैक्सों में राहत न मिलने से भी निर्माण जगत जूझ रहा है। प्रॉपर्टी कारोबार प्रोजेक्ट्स में मंदी का असर इससे जुड़े कई आय वर्ग के लोगों पर पड़ रहा है।