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ऊर्जा

विश्व-अर्थव्यवस्था की घरघराहट और तेल का खेल

“कहना गलत नहीं होगा घर्षण खत्म कर गतिशीलता लाने वाली एनर्जी अब दुनिया के देशों को युद्ध के लिए उकसा कर अपने ज्वलनशीलता के दूसरे गुण के बारे में परिचित करा रही है।”

Neelesh Singh Thakur

हाइलाइट्स :

  • तेल के भंडारों पर मचा बवाल

  • अचानक कैसे बढ़ गई खुद उड़ जाने वाली चीज

  • एनर्जी सोर्सेस की उपलब्धता, रिपोर्ट्स, विश्लेषणों में भारी अंतर

राज एक्सप्रेस। दुनिया के किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में तेल (कच्चा-पैट्रोल-डीजल) का अहम रोल है। इसकी कमी से इकोनॉमी के सहायक कलपुर्जों में से घरघराने की आवाज आना लाज़िमी है। अब जबकि तेल को लेकर दुनियाभर में बवाल है ऐसे में मंदी झेल रही विश्व अर्थव्यवस्था की घरघराहट की आवाज में सऊदी अरब के नए तेल भंडारों से कितनी कमी आएगी? ये विचारणीय सवाल है।

तेल का रहस्य :

ये तेल का ही कमाल है कि तेल के कारण मुल्कों के बीच तलवारें भी खिंच चुकी हैं। इतिहास तो यही बताता है। 19वीं सदी के मध्य में स्थापना के बाद से ही तेल इंडस्ट्री दुनिया के देशों के लिए अहम हो गई।

फ्लैमिंग किरदार :

मौजूदा दौर में भी ऑयल सप्लाई समेत तेल कुओं पर नियंत्रण हासिल करने ताकतवर देश बावले हुए जा रहे हैं। कहना गलत नहीं होगा घर्षण खत्म कर गतिशीलता लाने वाली एनर्जी (ऑयल-गैस) अब दुनिया को युद्ध के लिए उकसा कर अपने ज्वलनशीलता के दूसरे गुण के बारे में परिचित करा रही है।

ईरान इतना खास :

जगजाहिर है मध्य-पूर्व के सऊदी अरब, ईरान, इराक, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात अपने अकूत तेल भंडारों के कारण दुनिया के लिए ही खास हैं। चौबीस घंटों, सातों दिन पूरे साल के दोहन के बाद भी इन भंडारों में जमा तेल राशि कम नहीं हुई है। आर्थिक प्रतिबंध झेलने वाले मुल्क ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी का अनुमानित 53 अरब बैरल ऑयल बैंक का दावा ईरान के लिए प्राणवायु की तरह है जिसकी उसे बहुत जरूरत भी थी।

EIA की रिपोर्ट :

अमेरिका के एनर्जी इन्फर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) ने ईरान को दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेल भंडार जबकि दूसरा सबसे बड़ा गैस भंडार मालिक माना है। अनुमानित तौर पर अभी ईरान कुल प्रमाणित तेल भंडार 155.6 अरब बैरल का मालिक है। ईरान का दावा है कि ख़ुज़ेस्तान इलाके में मिला नया भंडार 65 अरब बैरल के अहवाज़ ऑयल बैंक के बाद दूसरा बड़ा उत्पादन केंद्र होगा।

ओपेक का रोल :

ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ द पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज यानी पेट्रोल निर्यात करने वाले देशों के संगठन ओपेक (OPEC) और EIA के आंकड़ों के मुताबिक विश्व स्तर पर प्रमाणित कुल तेल भंडारों में से 82 प्रतिशत से ज्यादा ऑयल इन कंट्रीज़ में हैं। जबकि ओपेक से जुड़े देश मिलकर दुनिया भर के कुल कच्चे तेल का 40 प्रतिशत उत्पादन करते हैं।

ओपेक के नायक :

आर्थिक रूप से पिछड़े अंगोला, कांगो, अल्जीरिया, इक्वाडोर, इक्वाटोरियल गेना, गबोन, लीबिया, नाइज़ीरिया, वेनेज़ुएला के अलावा ईरान, इराक़, कुवैत, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात जैसे रसूखदार नाम तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक के मैंबर हैं।

उपलब्धता अनुमान :

ओपेक में शामिल देशों में से वेनेज़ुएला के पास 301, सऊदी अरब 266, कनाडा 170, ईरान 158, इराक 143, कुवैत 102, संयुक्त अरब अमीरात 98, रूस 80, लीबिया 48 जबकि नाइजीरिया के पास 37 अरब बैरल ऑयल होने की रिपोर्ट दी गई है। (सभी आंकड़े-अरब बैरल)

सऊदी तेल भंडार पर संशय! :

सऊदी के तेल भंडारों में तेल की उपलब्धता पर भी सवाल उठ रहे हैं। ओपेक के वर्ष 2015 में जारी वार्षिक बुलेटिन के अनुसार सऊदी की सरकार ने 266 अरब बैरल्स के अनुमानित तेल भंडार की जानकारी दी है। एक अनुमान के मुताबिक रोजाना औसतन 1.2 करोड़ बैरल प्रॉडक्शन करने पर सऊदी ऑयल बैंक अगले 70 साल में ख़त्म हो जाएगा।

प्रमुख वजह :

सऊदी के आंकड़ों पर संदेह की वजह साल 1987 के वो आंकड़े हैं जिसमें सऊदी गवर्नमेंट ने अपना तेल भंडार 170 अरब बैरल्स फिर 1989 में बढ़ाकर 260 अरब बैरल्स बताया। विश्व ऊर्जा की उपलब्धता से जुड़े आंकड़ों की साल 2016 की समीक्षा रिपोर्ट कहती है कि सऊदी से 94 अरब बैरल्स तेल खर्च हो चुका है।

ऐसे में सऊदी के 260 से 265 अरब बैरल्स तेल भंडार के दावे पर सवाल उठना लाज़िमी है। अब या तो यहां तेल के नए भंडार मिल गए हैं या फिर अनुमानित भंडार में ही इजाफा कर दुनिया को चौंका दिया गया है ये तो फिलहाल यक्ष प्रश्न है जिसका जवाब ढूंढ़ा जा रहा है। एक तर्क ये भी दिया जा सकता है कि बंद स्थानों से तेल आपूर्ति फिर शुरू कर दी गई हो।

कारण ये भी :

सऊदी में साल 1936 से 1970 के बीच तेल मिलने के ठिकानों की खोज चरम पर थी। इसके बाद से सऊदी में कोई बड़ी खोज सामने नहीं आई। दरअसल एकाधिकार के कारण सऊदी ऑयल प्रॉडक्शन के आंकड़े काफी गोपनीय रखता है।

इस कारण सऊदी के घोषित आंकड़े हाथी के दांत वाली कहावत भी सिद्ध हो सकते हैं। ऐसे में तेल विश्लेषकों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करना जरा जल्दबाजी होगी। क्योंकि सभी विश्लेषणों का रिज़ल्ट आंकड़ों की शुद्धता पर आधारित होता है।

अरामको का खेल :

लगभग चार दशकों से सऊदी अरब ही अरामको का स्वामित्व संभाल रहा है। 1982 से कंपनी के उपलब्ध तेल भंडार की जानकारी को गोपनीय कर दिया गया। हालांकि आगे दवाब बढ़ने पर सऊदी अरब को ओपेक को प्रमाणिक भंडार के बारे में जानकारी देने की परंपरा शुरू करना पड़ी।

जिसमें सऊदी ने शुरूआत में प्रमाणिक तेल भंडार की उपलब्धता 168-170 अरब बैरल्स बताई। जबकि अरामको ने इसके पहले यही तेल भंडार 110 अरब बैरल्स बताया था। तेल के खेल में जो कहानी अब तक निकलकर सामने आई है वो ये है कि तेल के भंडार के बारे में स्थिर अनुमान नहीं लगाया जा सकता। यहां आशा-प्रत्याशा की बंदरबांट का खेल चलता रहता है।

सनद रहे :

अगर आप भी पैट्रोल-डीजल-गैस जैसे एनर्जी सेक्टर्स में निवेश करने की सोच रहे हैं तो पहले इन तत्वों की प्रकृति में सहज ही विलीन हो जाने की तासीर पर भी विचार करें। क्योंकि एनर्जी सेक्टर में निवेश प्रभात में नजर आने वाले उस तारे की तरह ही है जो बड़ा सितारा सूरज के निकलते ही पल भर में विलीन हो जाता है। संत कबीर तो अपने दोहे में ये ताकीद कब की दे चुके हैं।

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