Foreign exchange reserves at record levels
Foreign exchange reserves at record levels |Syed Dabeer Hussain - RE
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RBI के तजा आंकड़े : 545.638 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर विदेशी मुद्रा भंडार

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को देश के इस साल के विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़े जारी कर दिए हैं। आंकड़ों के अनुसार विदेशी मुद्रा भंडार 545.638 अरब डॉलर के सर्वकालिक रिकॉर्ड स्तर पर जा पंहुचा।

Kavita Singh Rathore

Kavita Singh Rathore

राज एक्सप्रेस। देश में जितना भी विदेशी मुद्रा भंडार जमा होता है। उसका आंकड़ा हर साल भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी किए जाते हैं। वहीं, अब RBI ने शुक्रवार को इस साल के आंकड़े जारी कर दिए हैं। इन आंकड़ों के अनुसार भारत का विदेशी मुद्रा भंडार दो अक्टूबर, 2020 के समाप्त सप्ताह में बढ़कर 545.638 अरब डॉलर के सर्वकालिक रिकॉर्ड स्तर पर जा पंहुचा हैं, जो कि पहले 3.618 अरब डॉलर था।

इससे पहले विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़े :

बताते चलें, RBI द्वारा इससे पहले विदेशी मुद्रा भंडार का आंकड़ा 25 सितंबर के समाप्त सप्ताह में जारी किया था और तब इस विदेशी मुद्रा भंडार में 3.017 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई थी और यह 542.021 अरब डॉलर रह गया था। बता दें, रिव्यू पीरियड में विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी होने का मुख्य कारण विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (FCA) का बढ़ना है। इसे पूरी विदेशी मुद्रा भंडार का एक मुख्य अंग कहना गलत नहीं होगा। इस दौरान एफसीए 3.104 अरब डॉलर बढ़कर 503.046 अरब डॉलर हो गया।

RBI के आंकड़ों के अनुसार :

RBI के आंकड़ों के अनुसार, समीक्षाधीन सप्ताह में देश में कुल सोने का भंडार 48.6 करोड़ डॉलर बढ़कर 36.486 अरब डॉलर हो गया। जबकि, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से मिले विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) से यह 40 लाख डॉलर बढ़कर 1.476 अरब डॉलर हो गया। आंकड़ों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास जमा देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी 2.3 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.631 अरब डॉलर हो गया।

रुपये में आई तेजी :

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा हाल ही में ब्याज दरों को न बदलने के फैसले के बाद विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में शुक्रवार को रुपये की दर डॉलर के मुकाबले आठ पैसे बढ़कर 73.16 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गई। यानि आज 1 डॉलर बराबर 73.16 रूपये पर पहुंच गए हैं।

RBI का कहना :

RBI का कहना हैं कि, 'कोविड-19 के कारण प्रभावित हुई अर्थव्यवस्था को समर्थन देने की आवश्यकता हुई तो भविष्य में ब्याज दरों में और कटौती की जा सकती है।

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