गौतम अडानी ने बताया सफल जीवन का फलसफा, भारत को लेकर कही ये बात
गौतम अडानी ने बताया सफल जीवन का फलसफा, भारत को लेकर कही ये बातSyed Dabeer Hussain - RE

गौतम अडानी ने बताया अपने सफल जीवन का फलसफा, भारत को लेकर कही ये बात

पालनपुर में एक इवेंट के दौरान गौतम अडानी ने अपनी सफलता की कहानी बताई और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को याद किया। यह इवेंट विद्या मंदिर ट्रस्ट के 75 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित किया गया था।

Gautam Adani : भारत के अरबपतियों में शुमार अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी (Gautam Adani) पिछले कुछ समय से लगातार चर्चा में बने हुए हैं। पहले उन्होंने मुकेश अंबानी को कई बार पीछे छोड़ते हुए दुनियाभर के सबसे अमीर लोगों की लिस्ट में उनसे ऊपर आए। इस प्रकार वह वर्तमान समय में तीसरे नंबर के दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति हैं। उन्होंने अपनी इस सफलता की कहानी पालनपुर में एक इवेंट के दौरान बताई और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को याद किया। यह इवेंट गुजरात के बनासकांठा में पालनपुर के विद्या मंदिर ट्रस्ट के 75 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित किया गया था। यहां गौतम अडानी सहित कई दिग्गज लोग उपस्थति हुए।

गौतम अडानी ने बताया सफल जीवन का फलसफा :

दरअसल, आज भारत और एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति गौतम अडानी का नाम देश का बच्चा-बच्चा जानता है। उनकी कंपनियों ने हर क्षेत्र में अपनी मजबूत पकड़ बना रखी है। उनकी इस सफलता को लेकर उन्होंने गुजरात के बनासकांठा में पालनपुर के विद्या मंदिर ट्रस्ट के 75 साल पूरे होने के मौके पर बताया कि,

"मैं जैसा हूं, वैसा हूं, क्योंकि मैं कभी भी अपने सामने मौजूद विकल्पों का जरूरत से ज्यादा असेसमेंट नहीं करता। मैं व्यक्तिगत रूप से इस पहलू को सबसे मुक्तिदायक मानता हूं और यही मुक्ति मुझे कारोबारी बनाती है। मेरा मजबूत विश्वास है कि भारत में 100 अडानी समूह बनाने की क्षमता है और आज कारोबारी बनने के लिए भारत से बेहतर कोई जगह नहीं हो सकती है। पहली पीढ़ी के कारोबारी ज्यादातर एक अनूठे फायदे के साथ शुरुआत करते हैं - खोने के लिए कुछ नहीं होने का फायदा,यह विश्वास उनकी ताकत है। मेरे अपने दिमाग में, यह मुक्तिदायक था। मेरे पास फॉलो करने के लिए कोई विरासत नहीं थी,लेकिन मेरे पास एक विरासत बनाने का अवसर था।"

गौतम अडानी, अडानी ग्रुप के मालिक

गौतम अडानी के पास नही था जोखिम के अलावा कुछ नही :

गौतम अडानी ने आगे कहा, "मेरे पास किसी को साबित करने के लिए कुछ भी नहीं था, लेकिन मेरे पास खुद को साबित करने का मौका था कि मैं ऊपर उठ सकता हूं। अनजाने में पानी में कूदकर मेरे पास जोखिम लेने के लिए कुछ भी नहीं था। मुझे अपनी खुद की अपेक्षा पूरी करने की कोई उम्मीद नहीं थी। ये विश्वास मेरा एक हिस्सा बन गए। मेरा पहला वास्तविक ब्रेक साल 1985 में आया। यह राजीव गांधी के देश के प्रधान मंत्री बनने और आयात नीतियों को उदार बनाने के साथ आम चुनावों के बाद हुआ। जबकि मेरे पास कोई कारोबारी अनुभव नहीं था, मैंने मौकों का फायदा उठाया और कारोबारी संगठन स्थापित करने के लिए तेजी से आगे बढ़ा। हमने कच्चे माल से वंचित लघु उद्योगों को आपूर्ति करने के लिए पॉलिमर का आयात करना शुरू कर दिया। इस कदम ने वैश्विक व्यापार व्यवसाय की प्रारंभिक नींव रखी।"

मनमोहन सिंह को किया याद :

गौतम अडानी ने मनमोहन सिंह को याद करते हुए कहा कि, "1991 में, भारत अपने सबसे खराब विदेशी मुद्रा भंडार संकट से गुजर रहा था। उस समय पीवी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री थे और उनके वित्तमंत्री, मनमोहन सिंह ने निर्यात को बढ़ावा देने के लिए रुपये के मूल्यह्रास सहित कई साहसिक फैसलों की घोषणा की। यहां फिर से, मैंने तुरंत फैसला लिया और पॉलिमर, धातु, कपड़ा और कृषि उत्पादों में काम करने वाला पूर्ण वैश्विक व्यापारिक घराना स्थापित करने के लिए तेजी से आगे बढ़ा। हम 2 साल के भीतर देश का सबसे बड़ा वैश्विक व्यापारिक घराना बन गए। मैं 29 साल का हो गया था और दो आयामों के मूल्य की पूरी सराहना करता था जो हमारी ओर से की जाने वाली हर चीज को परिभाषित करेगा- पैमाना और रफ्तार. इन वर्षों में मैंने महसूस किया है कि आप हमेशा 'चीजों को सही समय' देने में सक्षम नहीं हो सकते हैं, लेकिन आपकी दृढ़ता 'चीजों को सही समय' दे सकती है और हमारा तीसरा बड़ा ब्रेक सही समय पर मिले मौकों की श्रृंखला का नतीजा था।"

और फिर आया वो अवसर :

उन्होंने आगे कहा, "और फिर वो अवसर 1995 में आया, जब गुजरात सरकार ने अपने समुद्र तट को विकसित करने का फैसला किय। यह लगभग उसी समय था जब ग्लोबल कमोडिटी ट्रेडर कारगिल ने कच्छ तटरेखा में उत्पादित नमक के स्रोत के प्रस्ताव के साथ हमसे संपर्क किया था। हालांकि साझेदारी आगे नहीं बढ़ी, लेकिन हमारे पास नमक की खेती करने के लिए लगभग 40,000 एकड़ दलदली भूमि और नमक के निर्यात के लिए मुंद्रा में कैप्टिव जेटी बनाने की मंजूरी थी। बंदरगाह नीति की औपचारिकता के बाद गुजरात सरकार ने मुंद्रा में पूर्ण वाणिज्यिक बंदरगाह बनाने के लिए हमें अपने भागीदार के रूप में चुना।"

भारत को लेकर कही ये बात :

गौतम अडानी ने कहा, "मेरा दृढ़ विश्वास है कि भारत में 100 अडानी समूह बनाने की क्षमता है, और आज एक उद्यमी बनने के लिए भारत से बेहतर कोई जगह नहीं हो सकती है। एक लोकतंत्र जिसका समय आ गया है, उसे रोका नहीं जा सकता है और भारत का समय आ गया है। हमारा देश अविश्वसनीय अवसरों से भरा देश है और आगे भी रहेगा।"

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