नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिन (NLEM) तैयार
नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिन (NLEM) तैयारसांकेतिक चित्र

आवश्यक दवाओं की लिस्ट में कैंसर की 4 और कुल 34 नई दवाएं शामिल,जबकि 26 दवाएं हुईं बाहर

एक बार फिर केंद्र सरकार द्वारा आवश्यक दवाओं की लिस्ट या कहें नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिन (NLEM) तैयार की गई है। इस बारे में जानकारी स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा दी जाती है।

राज एक्सप्रेस। केंद्र सरकार जरूरी दवाओं की लिस्ट समय-समय पर जारी करती है। इस बारे में जानकारी स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा दी जाती है। वहीं, अब एक बार फिर आवश्यक दवाओं की लिस्ट या कहें नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिन (NLEM) तैयार की गई है। जब यह लिस्ट तैयार की जाती है तो इस लिस्ट में कुछ नई दवाओं को जोड़ा जाता है तो कुछ को हटा दिया जाता है। वहीं, इस बार तैयार हुई लिस्ट में भी कुछ ऐसा ही किया गया है। चलिए एक नजर में देखें कि, इस लिस्ट में किस दवाई को जोड़ा गया है और किस दवाई को हटा दिया गया है।

NLEM में शामिल हुई यह दवाएं :

दरअसल, इस साल स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिन (NLEM) तैयार कर ली गई है। इस लिस्ट में इस बार कैंसर की 4 दवाओं को शामिल किया गया है। इसके अलावा ये लिस्ट 34 नई दवाओं को शामिल करके तैयार की गई है। जबकि, पहले से शामिल इस लिस्ट में से 26 दवाओं को बाहर कर दिया गया है। कुछ इस प्रकार तैयार की गई इस लिस्ट में शामिल दवाईयों को बेचने और खरीदने की मंजूरी सरकार द्वारा भी दे दी गई है। इस बारे में जानकारी देते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि, 'इससे कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं और टीके किफायती हो जाएंगे। 4 प्रमुख कैंसर रोधी दवाओं में बेंडामुस्टाइन हाइड्रोक्लोराइड, इरिनोटेकन एचसीआई ट्राइहाइड्रेट, लेनालेडोमाइड और ल्यूप्रोलाइड एसीटेट शामिल हैं।'

ज्यादा से ज्यादा काम आने वाली दवाइयां :

बताते चलें, स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा तैयार की जाने वाली नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिन (NLEM) में ऐसी दवाओं को शामिल किया जाता है। जिनका लोगों द्वारा ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल किया जाता हो। इन दवाओं की अधिकतम कीमत सरकार कंट्रोल में रखती है। इसके अलावा यह ऐसी दवाइयां होती है। जिनकी कीमत में दवा कंपनियां एक साल में 10% से ज्यादा नहीं बढ़त दर्ज नहीं कर सकती है। बता दें, पहली बार यह लिस्ट यानी नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिन 1996 में तैयार की गई थी। तब से अब तक यह लिस्ट 5 बार अपडेट की जा चुकी है। जो कि, साल 2003, 2011 और 2015 में की गई। उसके बाद अब पांचवीं बार साल 2022 में की गई है।

लिस्ट में शामिल दवाएं :

  • निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी

  • ब्यूप्रेनोर्फिन

  • एंटी ट्यूबरकुलोसिस दवा बेडक्विलाइ

  • रोटावायरस वैक्सीन

इस लिस्ट में मनोचिकित्सा संबंधी दवाइयों को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा इस लिस्ट में दवाओं की संख्या लगभग 384 हो गई है। इस लिस्ट में शामिल दवाओं को पब्लिक हेल्थ के लिए इस्तेमाल किया जाता है।इनको 350 एक्सपर्ट्स के द्वारा 140 बैठकों के बाद डिसाइड किया जाता है।

लिस्ट से हटाई गई यह दवाएं :

सरकार द्वारा इन 26 दवाओं को एसेंशियल मेडिसिन की नई लिस्ट से हटाया गया है -

  1. अल्टेप्लेस दवा

  2. एटेनोलोल, ब्लीचिंग पाउडर

  3. कैप्रियोमाइसिन

  4. सेट्रीमाइड

  5. क्लोरफेनिरामाइन

  6. डिलोक्सानाइड फ्यूरोएट

  7. डिमरकैप्रोल

  8. एरिथ्रोमाइसिन

  9. एथिनाइलेस्ट्राडियोल

  10. एथिनाइलेस्ट्राडियोल (ए) नोरेथिस्टेरोन (बी

  11. गैन्सिक्लोविर

  12. कनामाइसिन

  13. लैमिवुडीन (ए) + नेविरापाइन (बी) + स्टावुडीन (सी)

  14. लेफ्लुनोमाइड

  15. मिथाइलडोपा

  16. निकोटिनामाइड

  17. पेगीलेटेड इंटरफेरॉन अल्फा 2 ए

  18. पेगीलेटेड इंटरफेरॉन अल्फा 2 बी

  19. पेंटामिडीन

  20. प्रिलोकेन (ए) + लिग्नोकेन (बी)

  21. प्रोकारबाजिन

  22. रेनिटिडीन

  23. रिफाबुटिन

  24. स्टावुडीन (ए) + लैमिवुडिन (बी)

  25. सुक्रालफेट

  26. व्हाइट पेट्रोलैटम

रेनिटिडीन से कैंसर होने का खतरा :

इस लिस्ट से रेनिटिडीन को भी हटा दिया गया है। जिसका इस्तेमाल ज्यादातर एसिडिटी और पेट से जुड़ी बीमारियों के लिए किया जाता रहा है। इसे मार्केट में रैंनटेक और जिनटेक जैसे ब्रांड के नाम से बेचा जाता है। हालांकि, यह दवाएं नुकसान दायक हैं और कैंसर का खतरा बढाती है। इसलिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसे लिस्ट से हटा दिया है।

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