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दस सालों में ज्यादातर गिरावट में ही बंद हुआ है साल का पहला माह, क्या इस बार टूटेगी धारणा?

शेयर बाजार नई ऊंचाइयों को छूने के लिए सभी रिकॉर्ड तोड़ता दिखाई दे रहा है। देखना है 2024 में जनवरी सेंसेक्स व निफ्टी दोनों के लिहाज से कैसा साबित होने वाला है।

हाईलाइट्स

  • पिछले सात सालों में जनवरी में निफ्टी और छह बार सेंसेक्स लाल निशान में बंद हुआ है।

  • 10 सालों में सन 2015, सन 2017 और 2018 में बढ़त में निफ्टी की जनवरी में क्लोजिंग।

  • 10 सालों में सेंसेक्स में जनवरी के महीने में केवल 4 पॉजिटिव क्लोजिंग देखने को मिली।

राज एक्सप्रेस । हाल के दिनों में शेयर बाजार नई ऊंचाइयों को छूने के लिए सभी रिकॉर्ड तोड़ता दिखाई दे रहा है। अगले कारोबारी सत्र में नए साल की शुरुआत हो चुकी होगी। उम्मीद है कि अगले साल यानी 2024 में जनवरी सेंसेक्स और निफ्टी दोनों के लिहाज से एक और अच्छा महीना साबित होने वाला है। हालांकि, पिछले आंकड़ों का विश्लेषण करें तो जनवरी के महीने में निवेशकों को जनवरी में प्रायः निराशा ही हाथ लगी है। जहां तक शेयर बाजार का सवाल है, यह पिछले 10 सालों में अधिकांश बार जनवरी में सुस्त कारोबार करता दिखाई दिया है।

दस सालों मं सात बार निफ्टी और छह बार सेंसेक्स लाल निशान में बंद हुआ है पिछले आंकड़ों से पता चलता है कि निफ्टी ने पिछले 10 सालों में जनवरी में केवल 3 ही पॉजिटिव क्लोजिंग देखी है। निफ्टी 2015, 2017 और 2018 में 4-7 फीसदी की बढ़त लेकर शेयर बाजार बंद हुआ था। दूसरे सालों की बात करें तो 2014 में इसमें सबसे ज्यादा गिरावट आई थी। इस साल के जनवरी माह में निफ्टी 3 फीसदी से ज्यादा की गिरावट के साथ बंद हुआ था।

इसके विपरीत सेंसेक्स में 4 पॉजिटिव जनवरी क्लोजिंग देखने को मिली है। 2015, 2017, 2018 और 2019 में सेंसेक्स पाजिटिव नोट में बंद हुआ था। साल 2023 के आखिरी कारोबारी सत्र में, बाजार मामूली गिरावट के साथ राहत की सांस लेता नजर आया जिससे लगातार पांच दिनों की तेजी थम गई। हालांकि, निफ्टी और सेंसेक्स दोनों 19 फीसदी और 18 फीसदी रिटर्न देने के बाद अब भी अपने ऑलटाइम हाई के बहुत करीब कारोबार कर रहे हैं।

निफ्टी साल के अंत में 21,731 पर बंद हुआ जबकि सेंसेक्स 72,240 पर बंद हुआ। निफ्टी का ऑल टाइम हाई 21,801.45 और सेंसेक्स का 72484.34 हो गया है। शॉर्ट टर्म में बाजार कुछ कंसोलीडेशन की संभावना बनती दिख रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया तेजी के बाद कंसोलीडेशन बाजार के लिए अच्छा ही साबित होगा। उम्मीद है कंसोलीडेशन के दौरान निफ्टी 21,300 से 21,500 जोन में बना रहेगा। इस दौरान इसमें 22,150 रुपए का पोजीशनल टारगेट देखने को मिल सकता है।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद और लोकसभा चुनाव के स्थिरता को प्रोत्साहन देने वाले आंकड़ों की बदौलत भारतीय शेयर बाजार में एक बार फिर तेजी लौटने की उम्मीद की जा सकती है। एनएसई के कैश मार्केट डेटा से पता चलता है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने दिसंबर में भारतीय इक्विटी मार्केट में 31,959.78 करोड़ रुपये की खरीदारी की है। जबकि पूरे 2023 की बात करें तो विदेशी संस्थागत निवेशक यानी एफआईआई 13,194.40 करोड़ रुपये की इक्विटी के नेट सेलर रहे हैं।

इस बीच, घरेलू संस्थागत निवेशक 12 में से 10 माह में भारतीय इक्विटी के शुद्ध खरीदार के रूप में सामने आए हैं। घरेलू संस्थागत निवेशकों ने इस साल यानी 2023 में 1.68 लाख करोड़ रुपये का शेयर बाजार में निवेश किया है। शेयर बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि इक्विटी मार्केट के इस समय अपने लॉन्ग टर्म एवरोज से ऊपर रहने के बावजूद ऊपर बताई गई अनुकूल परिस्थितियां मौजूदा तेजी अगले माह तक जारी रह सकती है।

डिस्क्लेमर: राजएक्सप्रेस.कॉम पर पब्लिश रिपोर्ट विशेषज्ञों के निजी विचारों पर आधारित होती है। इसके लिए राजएक्सप्रेस. काम किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को हमारी सलाह है कि वे शेयर बाजार से जुड़ा कोई भी निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।

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