इज़राइल के टॉवर सेमीकंडक्टर ने भारत में 8 अरब डॉलर से चिप प्लांट स्थापित करने का रखा प्रस्ताव

इज़राइल के टॉवर सेमीकंडक्टर ने भारत में 8 बिलियन डॉलर की लागत से चिप उत्पादन सुविधा विकसित करने के लिए 8 अरब डालर का प्रस्ताव प्रस्तुत किया है।
Tower Semicunductor
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हाईलाइट्स

  • देश में 65 और 40 नैनोमीटर चिप्स उत्पादन के लिए फैक्ट्री लगाना चाहती है टॉवर

  • सेमीकंडक्टर निर्माण में देश को आत्मनिर्भर बनाना पीएम मोदी के एजेंडे में शामिल

  • केंद्र ने 2021 में शुरू की थी सेमीकंडक्टर विनिर्माण के लिए 10 अरब डॉलर की योजना

राज एक्सप्रेस। इज़राइल के टॉवर सेमीकंडक्टर ने भारत में 8 बिलियन डॉलर की लागत के चिप उत्पादन सुविधा विकसित करने के लिए 8 अरब डालर का प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। टॉवर ने अपने प्रोजेक्ट के लिए सरकारी प्रोत्साहन की मांग करते हुए, देश में 65 नैनोमीटर और 40 नैनोमीटर चिप्स के उत्पादन के लिए फैक्ट्री स्थापित करना चाहता है। यह जानकारी एक मीडिया रिपोर्ट में दी गई है। सेमीकंडक्टर विनिर्माण के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाना प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के एजेंड़े में शामिल है। पीएम मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने दिसंबर 2021 में इसके लिए 10 अरब डॉलर की योजना की शुरूआत की है।

2022 में भी किया था इकाई लगाने का आवेदन

आईटी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने पिछले साल अक्टूबर में टावर सेमीकंडक्टर के सीईओ रसेल सी एलवांगर से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के दौरान भारत में इजराइल के राजदूत नाओर गिलोन भी मौजूद रहे थे। इस बैठक में राजीव चंद्रशेखर और टावर सेमीकंडक्टर के सीईओ रसेल सी एलवांगर के बीच भारत में साझेदारी में इकाई लगाने पर चर्चा हुई थी। 2022 में, इंटरनेशनल सेमीकंडक्टर कंसोर्टियम (आईएसएमसी) ने भारत की सेमीकंडक्टर योजना का हिस्सा बनने के लिए आवेदन किया था। टावर सेमीकंडक्टर आईएसएमसी का हिस्सा है।

इंटेल की वजह से खटाई में पड़ गई थी योजना

लेकिन इस प्रक्रिया में बाधा तब पड़ गई जब लगभग उसी समय इंटेल ने टॉवर सेमीकंडक्टर का अधिग्रहण करने का प्रस्ताव रखा। इस वजह से कंसोर्टियम के आवेदन पर निर्णय रोक दिया गया था, क्योंकि सरकार अधिग्रहण पूरा होने के बाद टॉवर के कंसोर्टियम के साथ बने रहने को लेकर इंटेल की योजना के बारे में निश्चिंत नहीं थी। जब इंटेल के सीईओ पैट जेल्सिंगर ने 2022 में प्रधानमंत्री मोदी और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात की थी। इसके बाद कंपनी ने बताया था कि निकट भविष्य में उसकी भारत में फाउंड्री स्थापित करने की कोई योजना नहीं है।

टॉवर इज़राइल की अग्रणी सेमीकंडक्टर निर्माता

लेकिन बाद में इंटेल-टावर सेमीकंडक्टर सौदे के साथ, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय पिछले कुछ समय से एक बार फिर टॉवर सेमीकंडक्टर के संपर्क में था। लेकिन टावर सेमीकंडक्टर ही क्यों? बता दं कि टॉवर सेमीकंडक्टर हाईवैल्यू एनालॉग सेमीकंडक्टर समाधानों की इज़राइल स्थित अग्रणी फाउंड्री है। यह ऑटोमोटिव, मेडिकल, औद्योगिक, उपभोक्ता, एयरोस्पेस और रक्षा जैसे बढ़ते बाजारों में दुनिया भर में 300 से अधिक ग्राहकों के लिए एनालॉग इंटीग्रेटेड सर्किट बनाती है। टावर सेमीकंडक्टर को अपने सेगमेंट में माहिर कंपनी माना जाता है।

सेमीकंडक्टर निर्माताओं में 7वें स्थान पर टॉवर

ट्रेंडफोर्स की पहली और तीसरी तिमाही के नतीजों के अनुसार टावर सेमीकंडक्टर 356 मिलियन रेवेन्यू के साथ वैश्विक फाउंड्री राजस्व में सातवें स्थान पर रहा है। कंपनी का वार्षिक राजस्व 1 अरब डालर से अधिक होने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि टावर उन फाउंड्रीज़ में से एक है, जिसने भारत को सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने में मदद देने की समय-समय पर पेशकश की है। 2013-14 में भी, टॉवर सेमीकंडक्टर जेपी ग्रुप के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम का हिस्सा था, जिसमें वह आईबीएम के साथ एक प्रौद्योगिकी भागीदार के रूप में मौजूद था। टावर सेमीकंडक्टर ने एक बार फिर प्रौद्योगिकी भागीदार बनने की पेशकश की।

माइक्रोन ने भी पिछले साल की थी निवेश की घोषणा

टावर सेमीकंडक्टर ने इंटरनेशनल सेमीकंडक्टर कंसोर्टियम (आईएसएमसी) के साथ मिलकर एक बार फिर प्रौद्योगिकी भागीदार बनने की पेशकश की, जिसने फरवरी 2022 में 65nm प्रौद्योगिकी नोड एनालॉग फैब के लिए भारत की 76,000 करोड़ रुपये की सेमीकंडक्टर प्रोत्साहन योजना के तहत आवेदन प्रस्तुत किया था। अमेरिकी चिप निर्माता माइक्रोन टेक्नोलॉजी ने पिछले साल जून में गुजरात में एक नई असेंबली और परीक्षण सुविधा स्थापित करने के लिए 825 मिलियन डॉलर के निवेश की घोषणा की थी। इस अवसर पर बताया गया था कि नई असेंबली और परीक्षण सुविधा के पहले चरण का निर्माण 2024 के अंत में चालू हो जाएगा।

ताइवान है सेमीकंडक्टर का एकमात्र प्लेयर

दुनियाभर में सेमीकंडक्टर की मांग लगातार बढ़ रही है। दुनिया भर की कुल मांग का 60 प्रतिशत उत्पादन अकेले ताइवान करता है। ताइवान की टीएसएमसी कंपनी दुनिया की कुल जरूरत का अकेले 50 प्रतिशत चिप उत्पादन करती है। हाल के दिनों में चीन और अमेरिका के बीच सेमीकंडक्टर चिप को लेकर संघर्ष शुरू हो गया है। अमेरिका ने पिछले 6 माह में अपनी चिप इंडस्ट्री के विस्तार के लिए जबर्दस्त आक्रामकता दिखाई है। जिसने चीन को परेशान कर दिया है। पिछले दिनों अमेरिका ने चोरी के आरोप में कई चीनी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट कर दिया है। आजकल चीन की चिप इंडस्ट्री औंधे मुंह गिरी हुई है।

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