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आईटीआर 2024: क्या आप जानते हैं रिटायरमेंट बेनीफिट पर कैसे होती है टैक्स की कैलकुलेशन

देश के सभी नागरिकों के लिए वार्षिक आयकर रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य है। आइए जानें किस तरह की जाती है रिटायरमेंट बेनीफिट्स पर कैसे होती है टैक्स की गणना।

हाईलाइट्स

  • देश के सभी नागरिकों के लिए वार्षिक आयकर रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य है।

  • सरकारी व गैर-सरकारी कर्मचारियों के लिए अलग-अलग होती है कर निर्धारण प्रक्रिया ।

  • सरकारी कर्मचारियों को रिटायरमेंट पर मिलने वाली ग्रेच्युटी राशि पर कर से छूट है।

राज एक्सप्रेस । देश के सभी नागरिकों के लिए वार्षिक आयकर रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य है। रिटायरमेंट के मामला में पेंशन ग्रेच्युटी और कर्मचारी भविष्य निधि पर भी टैक्स देना करना पड़ता है। सरकारी और गैर-सरकारी कर्मचारियों के लिए कर निर्धारण की प्रक्रिया अलग-अलग होती है। भारत में नियोक्ताओं द्वारा दिए जाने वाले सबसे आम सेवानिवृत्ति लाभों में पेंशन, कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) और राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) शामिल हैं। रिटायरमेंट के केस में पेंशन, ग्रेच्युटी और कर्मचारी भविष्य निधि पर टैक्स देना पड़ता है। क्या आप जानते हैं रिटायरमेंट बेनेफिट पर टैक्स की कैलकुलेशन किस तरह से की जाती है। इन लाभों पर धारा 17 में निर्दिष्ट 'वेतन' के तहत 'वेतन के बदले लाभ' के रूप में कर लगाया जाता है। 

देश में सरकारी और गैर-सरकारी कर्मचारियों के लिए कर निर्धारण की प्रक्रिया अलग-अलग होती है। रिटायरमेंट के समय एकमुश्त राशि मिलती है तो यह सरकारी कर्मचारियों के लिए करों से पूरी तरह मुक्त है। दूसरी ओर, गैर-सरकारी कर्मचारी, जिन्हें ग्रेच्युटी राशि घटाकर 100 प्रतिशत पेंशन मिलती है, उन्हें कुल राशि के 50 प्रतिशत पर कर देना होता है। बचे हुए 50 प्रतिशत को आयकर से छूट दी गई है। निजी क्षेत्र के कर्मचारी को ग्रेच्युटी सहित 100 प्रतिशत पेंशन मिलती है तो एक तिहाई राशि कर से मुक्त होती है।

इसके विपरीत, सरकारी कर्मचारियों को रिटायरमेंट के समय मिलने वाली ग्रेच्युटी राशि पर कर से पूरी तरह छूट है। गैर-सरकारी कर्मचारियों के लिए कर निर्धारण प्रक्रिया दो तरह से पूरी की जाती है। 1972 के ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम के तहत छूट ग्रेच्युटी के रूप में प्राप्त वास्तविक राशि, फर्म के लिए काम करने वाले प्रत्येक वर्ष के लिए 15 दिन का वेतन या 20 लाख रुपये में से सबसे कम राशि पर लागू होती है।

जो लोग 1972 के ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम के दायरे में नहीं हैं, उनके लिए छूट सबसे कम राशि पर लागू होती है। इसकी गणना ग्रेच्युटी के रूप में प्राप्त वास्तविक राशि, फर्म के लिए काम करने वाले प्रत्येक वर्ष के लिए आधे महीने का वेतन या 10 लाख रुपये पर होती है। कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) राशि को अवकाश के बाद निकालने पर कर से छूट मिलती है। आयकर अधिनियम के अनुसार, रोजगार खत्म होने की तारीख पर कर्मचारी के खाते में जमा शेष राशि को कर से छूट दी गई है। रिटारयमेंट बेनेफिट्स लेने के लिए आईटीआर फाइल करना जरूरी है। इसके लिए पेंशन स्टेटमेंट और फॉर्म 16 जैसे डॉक्यूमेंट की जरूरत पड़ती है। रिटारयमेंट बेनेफिट्स में कई कटौतियाँ और छूटें भी हैं। इनके साथ टैक्स के बोझ को कुछ कम किया जा सकता है। पुरानी कर व्यवस्था के साथ इनकम टैक्स के सेक्शन 80सी एक्ट में टैक्सपेयर 1.5 लाख रुपये तक का कटौती का लाभ पा सकता है।

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