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चार ट्रिलियन डॉलर से ऊपर निकला एनएसई की कंपनियों का मार्केट कैप, यह जीडीपी से भी ज्यादा

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर सूचीबद्ध कंपनियों का मार्केट कैप 1 दिसंबर को 4 ट्रिलियन डॉलर (334.72 खरब रुपये) की सीमा को पार कर लिया है।

हाईलाइट्स

  • वित्त वर्ष 2022-23 में 273.07 लाख करोड़ रहा देश की जीडीपी का आकार।

  • बजट में 2023-24 के लिए 301.75 लाख करोड़ रुपए जीडीपी अनुमानित।

  • एनएसई बेंचमार्क निफ्टी ने 20,291.55 के सर्वकालिक हाई का स्पर्श किया।

  • नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने 1994 में शुरू किया था परिचालन

राज एक्सप्रेस। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर सूचीबद्ध कंपनियों का मार्केट कैप 1 दिसंबर को 4 ट्रिलियन डॉलर (334.72 लाख करोड़ रुपये) की सीमा को पार कर गया है। बता दें कि कुछ दिन पहले ही बॉम्बे स्टाक एक्सचेंज (बीएसई) पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप भी 4 ट्रिलियन डॉलर की सीमा को पार गया था, जो देश की जीडीपी से भी ज्यादा था। अब यही रिकार्ड नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने भी बनाया है। उसी दिन, एनएसई बेंचमार्क निफ्टी-50 इंडेक्स ने 20,291.55 के सर्वकालिक उच्च स्तर का स्पर्श किया। उसी दिन निफ्टी-500 इंडेक्स ने भी 18141.65 के सर्वकालिक उच्च स्तर को स्पर्थ किया। इससे संपष्ट होता है कि इक्विटी बाजार की रैली केवल बड़े पूंजी वाले शेयरों तक ही सीमित नहीं है। यह माइलस्टोन उपलब्धि, अमृत काल के लिए उल्लिखित दृष्टिकोण का एक स्पष्ट प्रमाण है, जिसमें मजबूत सार्वजनिक वित्त के साथ प्रौद्योगिकी संचालित और ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था शामिल है।

कुल कंपनियों में 0.35% ही एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध

भारतीय सूचीबद्ध कंपनियों के बाजार पूंजीकरण को 2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर (जुलाई 2017) से 3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर (मई 2021) तक पहुंचने में लगभग 46 महीने लगे। इसके बाद एक ट्रिलियन डॉलर यानी 3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से 4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने में केवल 30 माह का समय लगा। महीने. जबकि 4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का बाजार पूंजीकरण एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। आंकड़ों से पता चलता है कि भारत सरकार के कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के साथ पंजीकृत कुल निजी कंपनियों में से केवल 0.35% ही एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध हैं, जो बड़ी संख्या में अपनी वित्तीय जरूरतें इक्विटी बाजार से पूरी कर सकती हैं। इक्विटी और कॉरपोरेट बॉन्ड में प्राथमिक बाजारों के माध्यम से 5,00,000 करोड़ रुपये जुटाए गए हैं।

कंपनियों का मार्केट कैप 17.5 % गति से बढ़ा

सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण पिछले 10 सालों में 17.5% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ा है। निफ्टी 50 इंडेक्स ने पिछले 10 सालों में 14% सीएजीआर और पिछले 20 वर्षों में 14.9% सीएजीआर गति से बढ़ा है। बाजार पूंजीकरण में शीर्ष 3 कंपनियां रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल), टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) और एचडीएफसी बैंक का अहम योगदान रहा। इन्हीं कंपनियों ने मार्केट कैप के 2 ट्रिलियन डॉलर, 3 ट्रिलियन डॉलर और 4 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने में अहम योगदान दिया। हालांकि, मार्केट कैप के लिहाज से भारत दुनिया के शीर्ष 5 देशों में से एक है। एनएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण भारत की जीडीपी के मुकाबले 118% है, जो संयुक्त राज्य अमेरिका या जापान जैसे विकसित देशों की तुलना में कम है।

कई वैश्विक बाजारों से नीचे है शेयर टर्नओवर वेलोसिटी

आज की तारीख में वर्ष 2023 के लिए एनएसई पर शेयर टर्नओवर वेलोसिटी 47% थी। गौर करने की बात है कि शेयर कारोबार की वेलोसिटी अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया, चीन और ब्राजील जैसे कुछ वैश्विक बाजारों से काफी नीचे है। एक्सचेंज पर सूचीबद्ध कंपनियों का प्रतिशत बहुत कम है। तुलनात्मक रूप से कम शेयर टर्नओवर वेलोसिटी, आने वाले सालों में भारतीय बाजार के विकास की क्षमता का संकेत देता है। पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में इस वित्तीय वर्ष में दैनिक औसत कारोबार में इक्विटी सेगमेंट में 27% और इक्विटी डेरिवेटिव में 5% की साल-दर-साल वृद्धि देखी गई है। पिछले 10 वर्षों में, इक्विटी सेगमेंट का दैनिक औसत टर्नओवर 6 गुना से अधिक बढ़ गया है और इक्विटी डेरिवेटिव का दैनिक औसत टर्नओवर 5 गुना से अधिक बढ़ गया है।

अर्थव्यवस्था के लिहाज से यह अहम पड़ावः श्रीराम कृष्णन

एनएसई के मुख्य व्यवसाय विकास अधिकारी श्रीराम कृष्णन ने कहा एनएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 4 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार करना देश की 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य के लिहाज से एक अहम पड़ाव है। उन्होंने कहा कि बाजार अवसंरचना संस्थान के रूप में एनएसई अगले दिनों में इसी तरह फलता-फूलता रहेगा और सरकार और कॉरपोरेट्स के लिए संसाधन जुटाने के लिहाज से श्रेणी में सर्वोत्तम बाजार अवसंरचना प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि एनएसई निवेशकों को विभिन्न वित्तीय उत्पादों में निवेश करने के लिए मजबूत मंच प्रदान करना जारी रखेगा, जिससे देश में पूंजी निर्माण की प्रक्रिया को समर्थन मिलेगा।

एनएसई दुनिया का सबसे बड़ा डेरीवेटिव एक्सचेंज

कैलेंडर वर्ष 2022 के लिए फ्यूचर्स इंडस्ट्री एसोसिएशन (एफआईए) के आंकड़ों के अनुसार, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ट्रेडिंग वॉल्यूम (कॉन्ट्रैक्ट) के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा डेरिवेटिव एक्सचेंज है। नकदी इक्विटी में एनएसई दुनिया में तीसरे स्थान पर है। कैलेंडर वर्ष 2022 के लिए वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ एक्सचेंज (डब्ल्यूएफई) के आंकड़ों के अनुसार एनएसई ट्रेड्स की संख्या के लिहाज से नकद इक्विटी में दुनिया में तीसरे स्थान पर है। एनएसई भारत में इलेक्ट्रॉनिक या स्क्रीन-आधारित ट्रेडिंग लागू करने वाला पहला एक्सचेंज है। उल्लेखनीय है कि एनएसई ने 1994 में परिचालन शुरू किया था। सेबी के आंकड़े बताते हैं कि 1995 से हर साल इक्विटी शेयरों में कुल और औसत दैनिक कारोबार के लिहाज से इसे भारत के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज के रूप में स्थान दिया गया है।

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