'मार्क्स एंड स्पेंसर' ने किए सितंबर की छः माही के आंकड़े जारी

अंडर गारमेंट्स की रिटेल स्टोर वाली कंपनी मार्क्स एंड स्पेंसर द्वारा बुधवार को कंपनी के सितंबर की छः माही के आंकड़े जारी किये गए हैं। इन आंकड़ों के अनुसार, कंपनी को इस दौरान घाटा उठाना पड़ा है।
'मार्क्स एंड स्पेंसर' ने किए सितंबर की छः माही के आंकड़े जारी
Marks and Spencer released half of September figures Social Media

राज एक्सप्रेस। जहां, कोरोना के चलते हुए लॉकडाउन में कई कंपनियां घाटे में आगे थीं। वहीं, अब लगभग कई सारी कंपनियां पटरी पर आती नजर आ रही हैं, लेकिन फिर भी कई कंपनियां अभी भी ऐसी हैं जिन पर लॉकडाउन का असर अभी भी नजर आ रहा है। इन्हीं कंपनियों में अंडर गारमेंट्स की रिटेल स्टोर वाली कंपनी 'मार्क्स एंड स्पेंसर' भी शामिल हैं। इस बात का अंदाजा कंपनी के सितंबर की छमाही के आंकड़ों से लगाया जा सकता है।

मार्क्स एंड स्पेंसर को हुआ घटा :

दरअसल, अंडर गारमेंट्स की रिटेल स्टोर वाली कंपनी मार्क्स एंड स्पेंसर द्वारा बुधवार को कंपनी के सितंबर की छः माही के आंकड़े जारी किये गए हैं। इन आंकड़ों के अनुसार, कंपनी को इस दौरान 851 करोड़ रुपए का घाटा उठाना पड़ा है। जबकि, बीते साल की समान अवधि के दौरान कंपनी को 1,543 करोड़ रुपए का फायदा हुआ था। बता दें, कंपनी के 94 सालों के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब कंपनी को घाटा हुआ हो।

कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी का कहना :

कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) स्टीव रोवे ने कहा कि, 'पहले जो संभावना दिख रही थी, उसकी तुलना में फर्म का प्रदर्शन बहुत बेहतर है। इसी साल अगस्त में कंपनी ने 7 हजार लोगों को अगले तीन महीनों में निकालने की घोषणा की थी। पहली छः माही में ग्रुप की बिक्री 15.8% गिर कर 4.09 अरब पौंड (39,746 करोड़ रुपए) रही है। कम कपड़ों और घरों की बिक्री के कारण रेवेन्यू में गिरावट आई है। कपड़ों की बिक्री लॉकडाउन की वजह से प्रभावित हुई।'

कपड़ों की बिक्री में गिरावट :

बताते चलें, लॉकडाउन के चलते सिटी सेंटर स्टोर में जुलाई और सितंबर के दौरान कपड़ों की बिक्री में 53% की गिरावट दर्ज की गई है। इस बारे में कंपनी ने एक बयान जारी कर कहा कि, कंपनी को उम्मीद है कि, फॉर्मल कपड़ों और चुनिंदा अवसरों पर पहने जाने वाले कपड़ों की मांग की वापसी होगी।

विश्लेषकों का मानना :

विश्लेषकों का मानना है कि, 'मार्क्स एंड स्पेंसर हाई स्ट्रीट जैसे बिजनेस पर काम करती है जिसके लिए एक ऊंची कीमत चुकानी होती है। इसके 600 स्टोर लॉकडाउन में बंद थे। इन स्टोर्स से अब ऑन लाइन मांग बढ़ रही है और इसमें पहले की तुलना में तेजी आ रही है। हालांकि इससे जो बिक्री में नुकसान हुआ है, उसको कवर कर पाना मुश्किल है।'

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