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Budget 2019
Budget 2019|Kavita Singh Rathore - RE
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जानिए निर्मला सीतारमण के Budget 2019 से किसे फायदा और किसे नुकसान

हर साल जब बजट लागू होता है, तब किसी को फायदा या नुकसान होता है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के बजट 2019 को विस्तार से जाने। साथ ही बजट 2019 में लोकसभा में किन-किन शब्दों का कितनी बार इस्तेमाल हुआ है।

Kavita Singh Rathore

Kavita Singh Rathore

राज एक्सप्रेस। Budget को बहुत आसान शब्दों में समझा जाये तो, इन्हे हम आय व्यय पत्र का नाम दे सकते है, लेकिन सही मायने में समझने के लिए इसके बारे में जानना जरूरी है तो, जान ले Budget एक फ्रैंच वर्ड "Bougette" से निकला है, जिसका अर्थ होता है एक छोटा चमड़े का थैला। इंग्लैंड के पथम प्रधान मंत्री सर रोबोट बालपोल (1721-1742) अपने सारे वित्तीय प्रस्ताव के डॉक्यूमेंट को एक चमड़े के थैले में रख कर लाये थे। जब उन्होंने संसद में अपने वित्त प्रस्तावों को प्रस्तुत किया था तो, वहां बैठे सभी लोग "ये Budgetee लेकर आया है और Budgetee खोला गया" बोलकर उनका मजाक उड़ाते हुए हंसने लगे। उस दिन से ही वार्षिक आय-व्यय के प्रस्तावों के लिए Budget शब्द का प्रयोग होने लगा और इसे नाम दिया गया "Budget"

भारत में Budget की शरुआत :

अगर हम भारत में Budget प्रणाली की शरुआत को देखे तो, इसका सीधा श्रेय वायसराय केनिन को जाता है। 7 अप्रैल 1860 में पहली बार Budget सर जेम्स विल्सन ने ही पेश किया था। इसलिए भारत में Budget प्रणाली का संस्थापक जेम्स विल्सन को माना जाता है।

क्या होता है Budget :

संविधान के अनुछेद 112 के अंतर्गत प्रत्येक वित्तीय वर्ष (1अप्रैल से 31 मार्च तक माना जाता है) के लिए, लागू किया जाता है। केंद्र सरकार की अनुमानित प्राप्तियों तथा व्ययों का एक विवरण पार्ल्यामेंट के सामने रखना आवश्यक होता है। इस "वार्षिक वित्तीय विवरण" को केंद्र सरकार का Budget कहा जाता है। राज्य सरकारों के Budget संबंध में व्यवस्था अनुछेद 202 में दी गई है।

कैसे पेश होता है Budget:

यह राष्ट्रपति द्वारा तय की गई फरवरी की अंतिम तारीख को लोकसभा में पेश किया जाता है। प्रारम्भ में रेल Budget और आम Budget एक साथ पेश किया जाता था, लेकिन 1921 में ऑकवर्ड कमिटी के सिफारिश करने पर 1924 में यह निर्णय लिया गया रेल बजट और आम बजट दोनों को अलग-अलग पेश किया जाये। इसके बाद 1925 में रेल बजट को अलग पेश किया गया। इसके बाद से यह दोनों ही अलग पेश किये जाने लगे। स्वतंत्र भारत का पहला Budget 26 नवंबर 1947 में पहले वित्त मंत्री आर के शनमुखम चेट्टी द्वारा पेश किया गया था। यह बजट 15 अगस्त 1947 से 31 मार्च 1948 तक सादे 7 माह की अवधि के लिए पेश किया गया था।

भारत का कुल बजट:

भारत में 2019 का कुल बजट 27 लाख 86 हजार 350 करोड़ो रूपये का है। अर्थात यही सरकार के इन सालों के खर्च की योजना है। इसके अलावा सरकार की इनकम 27 लाख 35 हजार 290 करोड़ रूपये है।

मंत्री निर्मला सीतारमण ने तोड़ी 159 साल पुरानी परंपरा :

हालांकि हमारे भारत में बजट को 159 साल पुरानी परंपरा रही है बजट के दस्ताबेज को एक चमड़े की अटैची में लाने की, लेकिन इस साल वित् मंत्री निर्मला सीतारमण इस परंपरा को तोड़ते हुए बजट के सारे दस्ताबेज अशोक स्तंभ चिन्ह बने हुए एक लाल कलर के कपड़े में लेकर आई थी। इतने सालो में ऐसा पहली बार ही हुआ है, इसकी वजह मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यम द्वारा पश्चिमी विचारों की गुलामी से निकलने का प्रतिक बताया गया है। इस बार बजट 2019, गांव के लोगों, गरीबों और किसानों को ध्यान में रख कर पेश किया गया है।

इस साल बजट पेश करने के दौरान निर्मला सीतारमण ने 4 महापुरुषों चङकय, स्वामी विवेकानंद, महात्मा गाँधी, दक्षिण के संत बसवेश्वर के बारे में बात की। इसके अलावा वित्तमंत्री निर्मला सीता रमन को देश की पूर्ण कालिक (फुल टाइम) वित् मंत्री बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। वित् मंत्री निर्मला सीतारमण नारी टू नारायणी और संस्कृत के एक श्लोक से बजट पेश करने की शुरुआत की।

बजट 2019 में इन शब्दों का हुआ कितनी बार इस्तेमाल:

  • बजट में 120 बार भारत शब्द का इस्तेमाल हुआ

  • 21 बार - विकास शब्द का

  • 19 बार - इंफ्रास्ट्रक्चर शब्द का

  • 15 बार - ग्रामिड़ इलाके शब्द का

  • 9 बार - किसान शब्द का

  • 19 बार - डिजिटल शब्द का

  • 19 बार - महिलाओं शब्द का

  • 16 बार - शिक्षा शब्द का

  • 9 बार - स्पेस (अंतरिक्ष) शब्द का

इन शब्दों से आप इतना तो समझ ही गए होंगे कि, विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार बजट में वित् मंत्री ने भारत को 5 लाख करोड़ डॉलर यानि 340 लाख करोड़ रूपये की अर्थ व्यवस्था बनाने का ब्लू प्रिंट भारत के सामने पेश किया है। सरकार ने इस बजट के लक्ष्यों को ब्लू स्काय थिंकिंग (दूर तक की सोचना) के अनुसार पेश किया है।

ये हुए बदलाब :

  • इलेक्ट्रिक कार पर 1.5 लाख तक की छूट मिलेगी।

  • रक्षा उत्पादों के आयात पर शुल्क घटा दिया है जिससे सरकार को सेना का आधुनिकीकरण आसान हो जाएगा।

  • किसानो के लिए 10 हजार उत्पादक संघ बनाये जाएंगे।

  • रेलवे को आधुनिक बनाने के लिए साल 2030 तक 50 लाख करोड़ रूपये खर्च किये जाएंगे।

  • देश में हर दिन 135 K.M. सड़के बनाई जाएंगी।

  • वार्षिक रिटर्न भरने वाले लो अब आधार कार्ड के जरिये भी वार्षिक रिटर्न भर सकेंगे।

  • जिन लोग की वार्षिक आय 2 से 5 करोड़ तक है उन्हें 3% ज्यादा सरचार्ज देना होगा, वहीं 5 करोड़ से अधिक कमाने वाले व्यक्ति को 7% सरचार्ज देना होगा।

  • सरकार अब 3 करोड़ छोटे व्यपारियों को पेंसन देगी।

  • महिलाओं को मुद्रा योजना के तहत 1 लाख रूपये तक का लोन दिया जाएगा।

  • सरकार ने शिक्षा का स्तर ऊचा करने के मकसद से उच्य शिक्षा के लिए 400 करोड़ रूपये रखे है।

  • घर खरीदने वालो को 45 लाख तक के होम लोन पर छूट मिलेगी।

  • अब से बैंक से साल भर में 1 करोड़ रूपये से ज्यादा निकलने पर 2% का TDS लगाया जाएगा।

सरकार का लक्ष्य:

सरकार ने 2024-25 तक भारत की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर यानि 340 करोड़ रूपये की अर्थ व्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा है। जिसके लिए भारत हर साल औसतन 20 लाख करोड़ रूपये का निवेश करना होगा। भारत में इस साल के अंत तक लगभग 3 ट्रिलियन डॉलर यानि 200 लाख करोड़ रूपये की अर्थ व्यवस्था बन जाएगी। लगभग 5 साल पहले दुनिया की ग्यारवीं सबसे बड़ी अर्थ व्यवस्था थी। फिलहाल भारत दुनिया की छठवीं सबसे बड़ी अर्थ व्यवस्था है।

बजट 2019 के लक्ष्य :

  • इस बार के बजट में भारत को प्रदूषण मुक्त रखने का भी लक्ष्य रखा गया है। भट का विजन "हरी-भरी धरती और नीले आकाश के साथ प्रदूषण मुक्त भारत" है।

  • मेक इन इंडिया के तहत लघु उद्योग, स्टार्टअप, रक्षा से जुड़े निर्माण, ऑटो, इलेक्ट्रॉनिक, कपड़ा उद्योग और इलाज में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों को भारत में ही बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

  • हर घर तक साफ़ पानी पहुंचने के लिए नदियों को साफ़ करने का लक्ष्य भी रखा गया है।

  • अंतरिक्ष कार्यक्रमों पर ध्यान देते हुए उनकी गति बढ़ाने के लिए गगनयान, चंद्रयान और उपग्रह प्रक्षेपण योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। इन सब के लिए एक कंपनी का निर्माण किया जाएगा।

  • सरकार ने खाने-पिने के सामान आनाज दालों और सब्जियों में एटीएम निर्भरता का लक्ष्य रखा है। साथ ही अनाज के निर्यात को बढ़ाने की योजना भी बनाई जाएगी।

  • रेलवे के विकास के लिए 2018 से 2030 तक के लिए 50 लाख करोड़ रूपये के निवेश की जरूरत पड़ेगी। रेलवे में सुविधाओं को बढ़ाने के लिए अब प्राइवेट सेक्टर्स का भी योगदान लिया जाएगा।

  • सरकार ने GDP का 3.3% राजकोष घाटा रखने का लक्ष्य रखा है। जो लास्ट बजट में 3.4% था।

  • बजट में स्कूलों की शिक्षा और उच्य शिक्षा में सुधार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही रिसर्च पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। विश्वविद्यालयो को अंतर्राष्ट्रीय स्टार पर ले जाने के लिए 400 करोड़ रूपये का आवंटन किया जाएगा।

  • स्टार्टअप को बढ़ावा देने के मकसद से दूरदर्शन एक नया चैनल शुरू करेगा। इसके साथ ही स्टार्टअप पर लगने वाले टेक्स को सरल करने का लक्ष्य रखा गया है।

  • भारत के लोंगो को विदेशो में रोजगार दिलवाने के मकसद से विदेशी भाषाओ का प्रशिक्षण किया जाएगा।

  • रोजगार पैदा करने के मकसद से छोटी और माध्यम स्तर की कम्पनियो में भरी निवेश करने का लक्ष्य रखा गया है।

  • खेल कूद में युवाओ को आगे बढ़ने के लिए खेलो इंडिया योजना का विस्तार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए राष्ट्रीय खेल शिक्षा बोर्ड का गठन भी किया जाएगा।

  • छोटे उधोग वलिकपनियो को 250 से 400 करोड़ तक के टर्नओवर पर 25% टेक्स देना होगा। जो पहले 30% था।

  • व्यापारियों को कर्ज देने के लिए सरकार बैंको को 70 करोड़ रूपये देगी।

  • 50 करोड़ तक के टर्नओवर वाली कंपनियों को डेविट और क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करने पर कोई चार्ज नहीं लगेगा।

  • भारत को पूर्ण रूप से डिजिटलीकरण करने का लक्ष्य रखा है।

  • छोटे -छोटे निजी समूह बनाकर काम करने वाली महिला वर्ग को मुद्रा योजना के जरिये मदद मिलेगी। ये महिलाये 1 लाख रूपये तक का लोन ले सकती है।

  • सरकारी और प्रिवेट सेक्टर में काम करने वाली महिलाओं के साथ भेदभाव न हो उसके लिए एक समिति घठित की जाएगी। साथ को महिलाओं को रोजगार के अवसर देने का लक्ष्य रखा है।

  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास के लिए ग्राम उद्योग के क्षेत्र में 75 हजार उधमियों को प्रशिक्षित किया जाएगा

  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास के लिए ग्राम उद्योग के क्षेत्र में 75 हजार 75 हजार उधमियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए 10 हजार नए किसानों के समूह बनाये जाएंगे। सरकार किसानो की आय को दुगना करने की कोशिश करेगी।

  • सरकार जीरो बजट फार्मिंग को बढ़ावा देगी। जीरो बजट फार्मिंग का मतलब होता है कृषि में बिना जरूरत होने वाले खर्च को काम करना।

यह हुआ सस्ता :

  • GST दर 12% से घटा कर 5% तक कम होने से इलेक्ट्रॉनिक वाहन पर 1.5 लाख तक की छूट मिलेगी।

  • चमड़े का सामान, मोबाईल, सेट टॉप बॉक्स।

ये हुआ महंगा :

  • लम्बाकू उत्पाद, स्टील, CCTV, आभूषण।

  • एक्सरसाइज ड्यूटी बढ़ने से पेट्रोल के दाम 2.5 रूपये और डीजल 2.3 रूपये महंगा हो गया है।

  • सिमा शुल्क 10% से बड़ा कर 12.5% हो जाने से सोना-चांदी भी महंगा हो गया है।

  • घरेलु उधोगों का ध्यान रखते हुए आयत किये जाने वाले सामान पर कस्टम डियूटी बड़ा देने के कारण ऑटो पार्ट्स, किताबें, डिजिटल कैमरे जैसे कुछ सामान महंगा हो गया है।

Budget से जुड़ी खास जानकारी :

  • अब तक का सबसे लंबा बजट भाषण 2003 में तत्कालीन वित्तमंत्री जसवंत सिंह ने दिया था इनका भाषण 2 घंटे 13 मिनट का था।

  • बजट 2019 वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने का 2 घंटे 8 मिनट का था।

  • यदि शब्दों के आधार पर देखे तो सबसे लंबा भाषण 1991 में मनमोहन सिंह ने दिया था। क्योंकि उनके भाषण में शब्दों की संख्या 18650 थी। साथ ही शब्दों के आधार पर सबसे छोटा भाषण 1977 मे हीरूभाई पटेल ने दिया था उनके भाषण में शब्दों की संख्या मात्रा 800 थी।

  • अभी तक का सबसे बड़ा बजट घाटा 1973 के आम बजट में देखने को मिला था। जो, 550 करोड़ का था। इतना ही नहीं इस घाटे के कारण इसे ब्लेक बजट का नाम दिया गया था।

  • जॉन मथाई को वर्ष 1950 में गणतंत्र भारत का पहला Budget पेश करने का गौरव प्राप्त हुआ।

  • पंडित जवाहर लाल नेहरू ने वर्ष 1958-59 का Budget पेश किया और साथ ही यह घोषणा की, हर साल Budget 28 फरवरी के दिन ही पेश किया जाएगा।

  • भारत में सबसे ज्यादा Budget पेश करने वाले वित्त मंत्री मोरारजी देसाई (2013) थे। उन्होंने कुल 10 बार बजट पेश किये थे।

  • वित्त मंत्री के रूप में 1991 में डॉ. मनमोहन सिंह ने देश में आर्थिक उदारीकरण की निति लागु करने की घोषणा की।

  • अंग्रेजों ने Budget पेश करने का समय शाम के 5 बजे का रखा था लेकिन 1999 में वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने इस समय को बदल कर दिन के 11 बजे कर दिया।

  • 29 फरवरी 1992 को पहली बार टेलीविजन पर Budget की प्रस्तुति का प्रसारण हुआ था।

  • वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा 2017 में रेल बजट और आम बजट को फिर से एक साथ लागु करने की घोषणा की गई।

  • काले धन को देखते हुए आम बजट में पहली बार 1965 में डिस्क्लोज़र स्कीम पेश की थी।

  • 1955 में पहली बार बजट कागज पर हिंदी में पेश किया गया था।