RBI ने लगातार 9वीं बार नहीं बदली रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट की दर
RBI ने लगातार 9वीं बार नहीं बदली रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट की दरSyed Dabeer Hussain - RE

RBI ने लगातार 9वीं बार नहीं बदली रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट की दर

लगातार 9वीं बार RBI ने रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट दोनों में ही कोई बदलाव नहीं किया है। इस बारे में जानकारी मौद्रिक नीति समिति की समीक्षा बैठक के बाद RBI के गवर्नर शक्तिकांत दास ने दी है।

राज एक्सप्रेस। देश में पिछले साल काफी आर्थिक मंदी का माहौल रहने के बाद इस साल अब अर्थव्यवस्था में हल्का फुल्का सुधार देखने को मिला है। वैसे तो भारत का केंद्रीय बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) समय-समय पर जरूरत को देखते हुए रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में बदलाव करता रहता है, लेकिन इस बार भी लगातार 9वीं बार RBI ने रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट दोनों में ही कोई बदलाव नहीं किया है। इस बारे में जानकारी मौद्रिक नीति समिति की समीक्षा बैठक के बाद RBI के गवर्नर शक्तिकांत दास ने दी है।

रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट :

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने आज मौद्रिक नीति समिति (MPC) की 3 दिवसीय समीक्षा बैठक के बाद बताया कि, 'रेपो रेट 4% और रिवर्स रेपो रेट 3.35% पर ही स्थिर रहेगी। इसके अलावा MSF रेट 4.25% पर और बैंक रेट में बिना बदलाव के 4.25% पर स्थिर है।' दरों में कोई बदलाव ना करने का फैसला लेते हुए महंगाई की मार झेल रहे भारतीयों के लिए यह RBI के तोहफे से कम नहीं है। बता दें, RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक 6 दिसंबर को शुरू हुई थी जो इस कैलेंडर वर्ष में समिति की आखिरी बैठक थी।

GDP ग्रोथ का अनुमान :

वित्त-वर्ष के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 9.5% पर कायम रखा गया है। जबकि, तीसरी तिमाही के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.8% से घटाकर 6.6% कर दिया गया है। वहीं, चौथी तिमाही के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.1% से घटाकर 6% कर दिया गया। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2022 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) इंफ्लेशन के 5.3% पर रहने का अनुमान लगाया है।

RBI के गवर्नर का कहना :

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने इनकी जानकारी देते हुए बताया है कि, 'रेपो और रिवर्स रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यानी, अब लोन की दरों में कोई राहत नहीं मिलेगी और आपके निवेश पर भी ज्यादा ब्याज मिलने की संभवना कम हो गई है। RBI ने लगातार 9वीं बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। रेपो रेट अप्रैल 2001 के बाद से सबसे निचले स्तर पर हैं। महंगाई हमारे पहले के अनुमान के मुताबिक ही है। रबी की अच्छी फसल होने की वजह से आगे कीमतें कम होंगी। सब्जियों की कीमतों में भी कमी आ सकती है। हालांकि, इस वित्त वर्ष की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में महंगाई पीक पर जाएगी, लेकिन उसके बाद इसमें कमी आएगी।'

दूसरी लहर को लेकर RBI गवर्नर का कहना :

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) गवर्नर ने कहा कि, 'दूसरी लहर के झटकों से इकोनॉमी उबर रही है और इसमें तेजी आ रही है, लेकिन यह लंबे समय तक कायम होती नहीं दिख रही है। शक्तिकांत दास के मुताबिक इकोनॉमिक रिकवरी लंबे समय तक बनी रहे, इसके लिए पॉलिसी सपोर्ट जरूरी है। आंकड़ों से मांग के सुधरने के संकेत मिल रहे हैं। एग्रीकल्चर सेक्टर की मदद से ग्रामीण मांग में भी सुधार हो रहा है। शक्तिकांत दास ने कहा कि तेल की एक्साइज ड्यूटी और वैट में कटौती से मांग में बढ़ोतरी की संभावना है।'

क्या होता है रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट ?

रेपो रेट :

भारत का रिजर्व बैंक (RBI) जिस दर पर कमर्शियल बैंकों सहित दूसरे बैंकों को लोन देता है उस दर को रेपो रेट या रेपो दर कहा जाता है। यदि रेपो रेट कम होती है तो, इसका सीधा मतलब यह होता है कि, बैंक से मिलने वाले सभी तरह के लोन सस्ते हो जाते हैं। साथ ही इससे ग्राहकों के जमा धन राशि पर ब्याज दर में भी बढ़ोतरी हो जाती है।

रिवर्स रेपो रेट :

बता दें, बैंकों को उनकी ओर से रिजर्व बैंक (RBI) में जमा धन पर जिस रेट पर ब्याज मिलता है, उसे रिवर्स रेपो रेट कहते हैं। बैंकों के पास जो अतिरिक्त कैश होता है उसे रिजर्व बैंक के पास जमा करा दिया जाता है। इस पर बैंकों को ब्याज भी मिलता है।

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