Oil Consumption Reduced in china due to Coronavirus
Oil Consumption Reduced in china due to Coronavirus|Kavita Singh Rathore -RE
व्यापार

कोरोना वायरस की दहशत से बदला तेल का खेल!

एक अनुमान के मुताबिक कोरोना वायरस के कारण चाइना में जेट फ्यूल की खपत में रोजाना 240,000 बैरल्स की कमी आई है। चाइना के एयरपोर्ट्स से उड़ानों की संख्या में 80 फीसद तक की कमी आने से भी खपत कम हुई है।

Neelesh Singh Thakur

हाइलाइट्स :

  • तेल की मांग पर कोरोना वायरस का असर

  • अभी और भी सस्ता हो सकता है पेट्रोल-डीजल

  • CORONAVIRUS के कारण चाइना की खपत में कमी

  • OPEC और रूस ने कही उत्पादन कम करने की बात

राज एक्सप्रेस। चीन में कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण इंटरनेशनल लेवल पर पेट्रोल-डीजल-कच्चे तेल की मांग के साथ दाम में भारी उठापटक देखने को मिल रही है। पिछले सप्ताह इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल के दाम में तेजी जरूर आई लेकिन कोरोना वायरस के कारण यह तेजी ज्यादा न बढ़ने के भी संकेत मिल रहे हैं। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने इस साल कच्चे तेल की खपत घटने का अनुमान जताया है।

वैश्विक खपत मांग :

अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल के दाम में पिछले सप्ताह जरूर वृद्धि हुई लेकिन दुनिया के सबसे बड़े उत्पादक-सप्लायर चीन की कोराना वायरस की समस्या के कारण इसकी मांग में नरमी से कीमतें स्थिर रहने और इसमें ज्यादा तेजी न आने की उम्मीद मार्केट एक्सपर्ट्स ने जताई है। जबकि इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी(IEA) के अनुमान के अनुसार इस साल की पहली तिमाही में विश्व स्तर पर कच्चे तेल की खपत मांग बीते वर्ष की तुलना में घट सकती है। एजेंसी के मुताबिक यह गिरावट कुल 4.35 लाख हो सकती है।

सस्ता हो सकता है :

चीन समेत दुनिया के तमाम देश कोरोना वायरस की महामारी से परेशान हैं। चाइना में इस वायरस के कारण हजारों नागरिकों, अनिवासियों, विदेशियों की मौत हो चुकी है। चीन की इस परेशानी के कारण तेल की कीमतों पर भी अप्रत्यक्ष असर पड़ रहा है। पिछले सप्ताह तेल उत्पादक देशों के संगठन ऑर्गनाइजेशन ऑफ पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज़ (OPEC) के अलावा रूस से कच्चे तेल के उत्पादन में अतिरिक्त कटौती के संकेत मिलने के बाद इसकी कीमत में तेजी आई थी। हालांकि तेल की मांग, कीमत और धार के जानकारों के मुताबिक तेल की मांग घटने से इसकी कीमत पर दबाव भी बना रह सकता है।

व्यापक कामबंदी :

चीन में नागरिकों से सामूहिक तौर पर इकट्ठा होने से बचने को कहा जा रहा है। ऐसे में देश के कामकाज पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है। कोरोना वायरस के कारण ड्रेगन कंट्री में ट्रांसपोर्ट सर्विस से लेकर बिज़नेस इंडस्ट्री तक के हाल बुरे कहे जा सकते हैं।

कहना गलत नहीं होगा कि चाइना में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर कामबंदी के हालात पैदा हुए हैं वो भी बगैर विरोध या प्रदर्शन के। संक्रमण के प्रक्रोप के कारण व्यापक स्तर पर काम बंद होने से चाइना में कच्चे तेल की मांग काफी तेजी से बड़े पैमाने पर घटी है। एक्सपर्ट्स इसी आधार पर तेल की कीमत पर दबाव बने रहने की राय दे रहे हैं।

कीमत सुधारने जतन :

तेल की घटती कीमतों के कारण होने वाले नुकसान से बचने के लिए ओपेक (OPEC) और रूस ने उत्पादन में कुल 6 लाख बैरल एक्स्ट्रा कटौती के संकेत दिए थे। हालांकि जानकारों का मानना है कि इस कदम से तेल की कीमत वापस 60 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने में फिलहाल संदेह ही नजर आता है।

जबकि ओपेक और रूस की अतिरिक्त 6 लाख बैरल रोजाना तेल के उत्पादन कटौती की खबरों के बाद पिछले हफ्ते तेल के दाम में तेजी जरूर आई लेकिन फिलहाल इसमें और तेजी आने की संभावना नज़र नहीं आने की राय जानकारों ने दी है।

कोरोना-यूएस प्रेसिडेंट एंड ऑयल :

एक तरह से तेल की मांग और दामों में विचलन को चाइना के कोरोना वायरस के अलावा अमेरिका की राष्ट्रपति इलेक्शन प्रोसेस से जोड़कर भी देखा जा रहा है। एक्सपर्ट्स की राय है कि जब तक चीन कोरोना के दंश से उबर नहीं जाता और अमेरिका में अगले राष्ट्रपति की तस्वीर साफ नहीं हो जाती तब तक तेल के दामों पर दबाव बना रहेगा। इस बारे में दलील दी जा रही है कि चुनाव के कारण मौजूदा राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प तेल की कीमतों को नियंत्रण में रखना चाहेंगे, क्योंकि अमेरिका का राष्ट्रपति भी बहुत कुछ तेल के खेल पर तय होता आया है।

दशक में पहली बार :

IEA की रिपोर्ट के अनुसार साल 2020 की पहली तिमाही में तेल की वैश्विक मांग के अनुमान में बीते साल की तुलना में लगभग 4.35 लाख बैरल कटौती की गई है। आंकड़ों को देखने पर पता चलता है कि पिछले एक दशक के दौरान पहली दफा तेल की सालाना मांग में कमी दर्ज की जा रही है। एजेंसी के मुताबिक मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान तेल की मांग में महज 8.25 लाख बैरल रोजाना वृद्धि का अनुमान है। पिछले अनुमान से यह वृद्धि 3.65 लाख बैरल कम है।

भाव घटने का अनुमान :

कोरोना वायरस के कहर के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की मांग घटने से भारत में पेट्रोल-डीजल के दामों में कमी देखी जा रही है। रिकॉर्ड्स के मुताबिक बीते एक माह में पेट्रोल के दाम दो रुपये कम हुए हैं जिसके अगले दो हफ्तों में चार रुपये तक और सस्ता होने की उम्मीद जताई जा रही है।

ताजा भाव- oilprice.com पर बुधवार 19 फरवरी को क्रूड ऑयल की कीमतें कुछ इस तरह रहीं-

  • All PricesOPEC Blends Canadian Blends U.S. Blends

  • WTI CRUDE • 52.77 +0.48 +0.92%

  • BRENT CRUDE • 58.10 +0.59 +1.03%

  • MARS US • 52.45 +0.00 +0.00%

  • OPEC BASKET • 57.24 +0.51 +0.90%

  • URALS •1 day 53.80 +0.75 +1.41%

इसी तरह प्राकृतिक गैस की खपत पर भी प्रभाव पड़ने से दामों पर असर पड़ा है। भारत के प्रमुख शहरों में महज कुछ पैसों की कमी के साथ पेट्रोल-डीजल के दाम 19 फरवरी को इस प्रकार रहे:-

FUEL PRICES IN METRO CITIES (Feb 19, 2020) PETROL

  • CHENNAI- 74.68Rs/Ltr

  • DELHI- 71.89 Rs/Ltr

  • KOLKATA- 74.53 Rs/Ltr

  • MUMBAI- 77.56 Rs/Ltr

चाइना की खपत घटी :

एक अनुमान के मुताबिक कोरोना वायरस के कारण चाइना में जेट फ्यूल की खपत में रोजाना 240,000 बैरल्स तक की कमी आई है। चाइना के एयरपोर्ट्स से उड़ानों की संख्या में 80 फीसद तक की कमी आने से भी खपत कम हुई है।

प्रदूषण घटा :

भले ही कोरोना वायरस चिंता का विषय हो लेकिन एक बात खुशी की भी है कि इस वायरस के कारण उत्पादन और ईंधन का उपयोग थमने से चीन के प्रदूषण के आंकड़ों में भारी कमी आई है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर के अनुसार चाइना में बीते साल की तुलना में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में 36% की कमी देखने को मिली है।

चाइना में रिफाइनरी तो चल रही है लेकिन उनको मांग की तुलना में उत्पादन के बावजूद ग्राहक नहीं मिल रहे। शिपिंग फर्म इंटेलिजेंस फर्म वोर्टेक्स के अनुसार, “गैसोलीन और डीजल का निर्यात बढ़ गया है। लेकिन वे तैयार खरीदारों को नहीं खोज पा रहे।”

हुंडई के प्लान को विराम!

चीन ने कुछ हिस्सों में पहले ही हुंडई मोटर कंपनी और किआ मोटर्स को कुछ कारों के उत्पादन को अस्थायी रूप से रोकने कहा है। फिएट क्रिसलर ऑटोमोबाइल्स एनवी अब सर्बिया में नई योजना बना रही है। इस समय चाइना में सप्लाई चेन गड़बड़ा गई है। चीनी बंदरगाहों पर शिपमेंट में देरी होने के कारण दुनिया जहां की अर्थव्यवस्था पर अप्रत्यक्ष असर पड़ रहा है। जिसमें जल्द सुधार आने की उम्मीद करना हाल फिलहाल बेमानी होगी।

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