अब वाहन के लिए भी चुन सकेंगे नॉमिनी, बदले गए 1989 के नियम
अब वाहन के लिए भी चुन सकेंगे नॉमिनीSyed Dabeer Hussain - RE

अब वाहन के लिए भी चुन सकेंगे नॉमिनी, बदले गए 1989 के नियम

अब तक आप या तो खुद वाहन के मालिक हुआ करते थे या आप जिसके नाम पर वाहन खरीदते थे वो उस वाहन का मालिक हुआ करता था, लेकिन नए नियमों के बाद कोई भी वाहन का मालिक बना सकता है। जानिए, क्या है नए नियम ?

ऑटोमोबाइल। अब तक आप या तो खुद वाहन के मालिक हुआ करते थे या आप जिसके नाम पर वाहन खरीदते थे वो उस वाहन का मालिक हुआ करता था, लेकिन अब सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स 1989 के नियमों में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा कुछ बदलाव किए गए हैं। इन नए नियमों के अनुसार, आप किसी और को भी अपने वाहन का मालिक बना सकते हैं। जानिए, क्या हैं नए नियम...

नियमों में किया गया बदलाव :

दरअसल, अब तक आप अपनी गाड़ी के मालिक खुद होते थे, लेकिन सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के नए नियमों के मुताबिक, कोई भी वाहन मालिक वाहन खरीदते समय अपना नॉमिनी (उत्तराधिकारी) नियुक्त कर सकता है। जैसे अभी तक लोग अपने बैंक अकाउंट और प्रॉपर्टी के लिए चुना करते थे। बता दें, वाहन मालिक जिसे भी अपना नॉमिनी चुनेगा मालिक की मौत के बाद वाहन को उस के नाम पर ट्रांसफर कर दिया जाएगा। इन नए नियमों की जानकारी देने के लिए मंत्रालय ने नोटिफिकेशन जारी किया है।

क्या है नया नॉमिनी नियुक्त करने का नियम ?

बदले गए नए नियमों के अनुसार, वाहन मालिक रजिस्ट्रेशन के बाद ऑनलाइन आवेदन करके अपना नॉमिनी नियुक्त कर सकता है। हालांकि, अन्य देशों में ऐसा अभी भी होता है लेकिन पूरे देश में उसकी अलग-अलग प्रक्रिया है। इसके अलावा नए नियमों में यह भी बताया गया है कि, वाहन मालिक को नॉमिनी नियुक्त करते समय नॉमिनी का पहचान पत्र देना जरूरी होगा। इससे वाहन ट्रांसफर करते समय नॉमिनी की पहचान में आसानी से हो सकेगी।

वाहन नाम पर होने में लगेगा कितना समय ?

बता दें, वाहन मालिक की मृत्यु होने के 30 दिनों के अंदर रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी को उनकी मौत की सूचना देनी पड़ेगी। इसके बाद नॉमिनी को वाहन मालिक की मौत के 3 महीने के अंदर वाहन ट्रांसफर के लिए फॉर्म-31 भरकर जमा करना होगा। हालांकि, इस अवधि के दौरान चुना गया नॉमिनी वाहन का इस्तेमाल खुद भी कर सकता है। इसके अलावा बताते चलें, वाहन मालिक अपने जीवित रहने के दौरान नॉमिनी को किसी भी समय बदल सकता है। तलाक या बंटवारे की स्थिति में वाहन मालिक ऐसा कर सकता है। इसके लिए एक सहमत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के तहत आवेदन करना होगा।

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