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Laskhmi Vilas Bank-Indiabulls Merge
Laskhmi Vilas Bank-Indiabulls Merge|Kavita Singh Rathore -RE
व्यापार

RBI ने याचिका ख़ारिज कर 2 संस्थाओं को दिया झटका

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने प्राइवेट सेक्टर की लक्ष्मी विलास बैंक और इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस कंपनी द्वारा लगाई गई याचिका को ख़ारिज करते हुए दिया-दोनों संस्थाओं को लगा झटका।

Kavita Singh Rathore

Kavita Singh Rathore

हाइलाइट्स :

  • RBI ने ख़ारिज की लक्ष्मी विलास बैंक और इंडियाबुल्स की याचिका

  • 7 मई 2019 को लगाई गई थी यह याचिका

  • दोनों ही संस्थाओं पर मंडरा रहा है खतरा

  • साल 1926 में हुई थी लक्ष्‍मी विलास बैंक की शुरूआत

राज एक्सप्रेस। कुछ दिन पहले कई बैंकों का विलय होने की खबरें आई थी, इसी तर्क में इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस कंपनी की लक्ष्मी विलास बैंक के साथ विलय होने की खबरें आ रही थीं, परन्तु अब यह विलय नहीं होगा, क्योंकि इस विलय के लिए इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को जो अर्जी लगाई थी, उसे RBI ने ख़ारिज कर दिया है।

कब लगाई थी अर्जी :

लक्ष्मी विलास बैंक (Laskhmi Vilas Bank-Indiabulls Merge) ने इस विलय को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को 7 मई 2019 को मंजूरी के लिए अर्जी लगाई थी, लेकिन तब से अभी तक RBI ने कोई रिएक्शन नहीं दिया था, लेकिन अब RBI ने इस अर्जी को ऐसे समय में ख़ारिज कर दिया जब, जल्द ही लक्ष्मी विलास बैंक को प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (PCA) फ्रेमवर्क में रख दिया गया है, जिससे ये बैंक न तो नया कर्ज दे सकेगा और न ही कोई नई ब्रांच खोल सकेगा, इतना ही नहीं इस समय यह बैंक बहुत बड़े कर्ज में फंसा है, साथ ही बैंक में जब जोखिम प्रबंधन के लिए पूंजी की भी कमी है। वहीं RBI ने पिछले महीने ही लक्ष्मी विलास बैंक पर करीब दो वर्षो से संपत्तियों पर नकारात्मक रिटर्न के चलते कार्रवाई भी की।

इंडियाबुल्स पर भी है संकट का साया :

इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड पर भी संकट के बादल छाये हुए हैं, इससे जुड़े छोटे-मोटे घोटालों की खबरें उड़ रही थी, कुछ समय पहले ही इंडियाबुल्स पर एक सिटीजंस विस्सल ब्लोअर फोरम नाम के NGO द्वारा संदिग्ध कर्ज देने का आरोप लगाया था। जिसके तहत NGO ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की है। जानकारी के लिए बता दें कि, इंडियाबुल्‍स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड पर 80 हजार करोड़ से अधिक का कर्ज है, परन्तु फिर भी ये एस्टेट, शेयर बाजार, बैंकिंग और हाउसिंग लोन के बिजनेस में अभी भी सक्रिय है।

क्या था आरोप :

NGO ने इंडियाबुल्‍स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड के खिलाफ याचिका दायर कर आरोप लगाया कि, इंडियाबुल्‍स ने अपने प्रमोटर्स और अपने ग्रुप से जुड़ी कई कंपनियों द्वारा बहुत सी कंपनियों को संदिग्ध कर्ज दिया, यह कंपनियां किसी बड़े कॉरपोरेट ग्रुप के स्वामित्व वाली थी।

लक्ष्मी विलास बैंक ने बताया कि,

‘‘RBI ने 9 अक्टूबर 2019 को एक पत्र द्वारा सूचित किया कि, इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड और इंडियाबुल्स कमर्शियल क्रेडिट लिमिटेड के लक्ष्मी विकास बैंक के साथ विलय के आवेदन को मंजूरी नहीं दी जा सकती।’’

लक्ष्मी विलास बैंक

लक्ष्‍मी विलास बैंक की शुरूआत :

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, लक्ष्‍मी विलास बैंक की शुरूआत साल 1926 में हुई थी, लेकिन इसे RBI द्वारा लाइसेंस साल 1958 में मिला था। कुछ समय बाद साल 1974 में इस बैंक को बढ़ावा मिलना शुरू हुआ था। जिससे इस बैंक ने अपनी कई ब्रांच और फाइनेंशियल सेंटर की शुरूआत की जो आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, दिल्‍ली, मुंबई और कोलकाता में स्थित हैं।