हुरुन ग्लोबल-500 सूची में रिलायंस सबसे मूल्यवान कंपनी, भारत की कोई कंपनी शीर्ष-40 रैंकिंग में नहीं

दुनिया की 500 सबसे मूल्यवान कंपनियों की बुधवार को जारी सूची 2023 हुरुन ग्लोबल 500 के अनुसार रिलायंस इंडस्ट्रीज भारत की सबसे मूल्यवान कंपनी बनी हुई है।
Mukesh Ambani with company
Mukesh Ambani with company Raj Express

हाईलाइट्स

  • रिलायंस 198 अरब डॉलर के साथ सूची में 44वें स्थान पर

  • इस सूची में पिछले साल भी पहले स्थान पर रही थी रिलायंस

  • रिलायंस की स्थिति में इस साल दिखी 10 स्थान की गिरावट

राज एक्सप्रेस । दुनिया की 500 सबसे मूल्यवान गैर-राज्य-नियंत्रित कंपनियों की बुधवार को जारी की गई सूची 2023 हुरुन ग्लोबल 500 के अनुसार रिलायंस इंडस्ट्रीज भारत की सबसे मूल्यवान कंपनी बनी हुई है। हालाँकि, भारतीयों के लिए यह एक निराशाजनक स्थिति हो सकती है कि विश्व स्तर पर, कोई भी भारतीय कंपनी शीर्ष-40 रैंकिंग में जगह नहीं बना पाई है। देश की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज 198 अरब डॉलर के कुल मूल्यांकन के साथ इस सूची में 44वें स्थान पर कायम है। इस रिपोर्ट का अध्ययन करने से पता चलता है कि रिलायंस इस साल पिछले साल के मुकाबले दस अंक नीचे गिर गई है।

सूची में 60वें स्थान पर है टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज

रिलायंस पिछले साल भी सबसे मूल्यवान भारतीय कंपनी रही थी। रिलायंस की शुद्ध संपत्ति में दो फीसदी की गिरावट आने के कारण इस सूची में उसकी रैंकिंग में दस स्थान की गिरावट देखने को मिली है। हुरुन ग्लोबल 500 सूची में रिलायंस इंडस्ट्रीज के बाद टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) 60वें स्थान पर है, जबकि एचडीएफसी बैंक 68वें स्थान पर है। इस अवधि के दौरान देश की सबसे बड़ी आईटी सेवा प्रदाता कंपनी टीसीएस की शुद्ध संपत्ति 14 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ 158 अरब डॉलर हो गई है। 2023 में इसकी रैंक में पांच स्थान का सुधार देखने को मिला है।

स्थिति में सुधार के साथ 68वें स्थान पर एचडीएफसी बैंक

सहयोगी कंपनी एचडीएफसी के साथ विलय के बाद एचडीएफसी बैंक की स्थिति में 43 स्थान का सुधार देखने को मिला है। एचडीएफसी बैंक इस सूची में बढ़कर 68वें स्थान पर पहुंच गया है। दो कंपनियाँ टाटा समूह की टाइटन और सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज ने भी शीर्ष 500 कंपनियों की रैंकिंग में जगह बनाने में सफल रही है। टाइटन 90 नए स्टोरों के साथ विस्तार कर रहा है, जबकि सन फार्मा ने इज़राइल में कई अहम अधिग्रहण किए हैं। इसके साथ ही बिनेंस और एक्टिविज़न ब्लिज़ार्ड समेत 48 कंपनियां अपने मूल्यांकन में गिरावट की वजह से इस सूची से बाहर हो गईं हैं।

हुरुन -500 सूची से बाहर हुईं अडाणी की तीन कंपनियां

इस प्रतिष्ठापूर्ण सूची से बाहर होने वाली तीन अडाणी समूह की कंपनियां अडाणी ट्रांसमिशन, अडाणी ग्रीन एनर्जी और अडाणी टोटल गैस कंपनियां शामिल हैं। संख्या के लिहाज से देखें तो भारत 18 कंपनियों के इस सूची से बाहर निकलने के साथ ही भारत एक पायदान फिसलकर इस सूची में छठे स्थान पर जा पहुंचा है। सूची में बताया गया है कि यह पहली बार है जब वैश्विक स्तर पर 5 कंपनियों एप्पल, माइक्रोसाफ्ट, अल्फाबेट, अमेजॉन और एनविडिया ने एक ट्रिलियन डॉलर का मूल्यांकन पार किया है। शीर्ष चार स्थानों पर सभी कंपनियां समान थीं। कंपनियों के प्रदर्शन में चैटजीपीटी का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखने को मिला है।

माइक्रोसाफ्ट और एनविडिया ने दर्ज की सबसे तेज बढ़ोतरी

यह एक दिलचस्प तथ्य है कि माइक्रोसाफ्ट और एनविडिया के मूल्यांकन में सबसे तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। 708 बिलियन डालर के साथ माइक्रोसॉफ्ट और 697 बिलियन डालर नेटवर्थ के साथ एनवीडिया की तेज बढ़ोतरी ने ध्यान अपनी ओर खींचा है। ये दोनों कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस सॉफ्टवेयर चैटजीपीटी से जुड़ी हुई हैं। माइक्रोसाफ्ट ने हाल के दिनों में चैटजीपीटी की मूल कंपनी ओपेनएआई में बड़ा निवेश किया है। दूसरी ओर, एनवीडिया सेमीकंडक्टर बनाने वाली बड़ी कंपनी है। पिछले साल कंपनी की संपत्ति तीन गुना बढ़ने की वजह से कंपनी ने सूची में 14 पायदान की छलांग लगाई है।

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