एंटीलिया मामला: सुपरकॉप बनने की मंशा से वाझे ने पार्क की थी स्कार्पियो
एंटीलिया मामला: सुपरकॉप बनने की मंशा से वाझे ने पार्क की थी स्कार्पियोSyed Dabeer Hussain - RE

एंटीलिया मामला: सुपरकॉप बनने की मंशा से वाझे ने पार्क की थी स्कार्पियो

एंटीलिया मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के शक की सुई सचिन वाझे पर जा टिकी थी। अब NIA ने इस मामले में बहुत बड़ा चौंका के रख देने वाला खुलासा किया है।

एंटीलिया मामला। मुकेश अंबानी के घर 'एंटीलिया' के पास धमकी भरा खत और विस्फोटक से लदी स्कॉर्पियों गाड़ी किसने छोड़ी थी। इस बात का खुलासा होने से पहले तक इस मामले में कई अन्य बड़े खुलासे हो चुके थे। इसी मामले में जुड़े एक पुलिस अफसर को निलम्बित किया जा चुका है। जबकि, कमिश्नर का ट्रांसफर किया जा चुका है। इन सब के बाद भी यह गुत्थी तब और उलझती ही नजर आरही थी। जब इस मामले की जांच 'राष्ट्रीय जांच एजेंसी' (NIA) के शक की सुई सचिन वाझे पर जा टिकी थी। अब NIA ने इस मामले में बहुत बड़ा चौंका के रख देने वाला खुलासा किया है।

NIA का चौंका देने वाला खुलासा :

दरअसल, 'राष्ट्रीय जांच एजेंसी' (NIA) पिछले कई दिनों से इस मामले की जांच कर रही है और इस मामले में NIA ने मुंबई के पुलिस अधिकारी सचिन वाझे को भी गिरफ्तार किया है। उनसे लगातार जारी पूछताछ के बाद कई काफी बड़े खुलासे हुए। इन्हीं खुलासों में हैरान कर देने वाली बात NIA ने बताई कि, 'सचिन वाझे ने सुपरकॉप बनने का एक सुपर प्लान बनाया था और इस प्लान के तहत ही सचिन वझे ने स्कार्पियो एंटीलिया के पास पार्क थी।'

क्या था सचिन वाझे का प्लान :

'राष्ट्रीय जांच एजेंसी' (NIA) की मानें तो, सचिन वाझे ने अपने प्लान के तहत सबसे पहले देश के सबसे बड़े बिजनेसमैन और सबसे ज्यादा आमिर व्यक्ति (मुकेश अंबानी) को चुना और मुकेश अंबानी के घर 'एंटीलिया' के पास जिलेटिन रॉड वाली स्कार्पियो पार्क की। इसके बाद उसने खुद इस मामले की जांच शुरू कर दी। उसका आगे का प्लान यह था कि, उसके बाद वह जब इस मामले की गुत्थी सुलझा लेता तो सुपरकॉप बन जाता। वाझे ने अपने प्लान को अंजाम देने के लिए लॉजिस्टिक सपोर्ट के लिए अपने अन्य साथियों का भी इस्तेमाल किया। उसका यह plan सफल होने ही वाला था कि, इस मामले की जांच NIA को दे दी गई। हालांकि, फिलहाल NIA इस दावे की भी जांच कर रही है।

सचिन वाझे का बयान :

एंटीलिया विस्फोटक मामले और मनसुख हीरेन की हत्या के मामले में शक के आधार पर गिरफ्तार किए गए API सचिन वाझे को NIA द्वारा गुरुवार को कोर्ट में पेश किया गया, वहां वाझे ने बयान दिया कि,

'मुझे इस मामले में बलि का बकरा बनाया गया है। मेरा इस केस से कोई लेना देना नहीं है। मैं इस मामले की जांच कर रहा था और इस केस का इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर (IO) था। अचानक कहीं कुछ बदलाव हुआ और 13 तारीख को जब NIA ऑफिस गया तो मुझे अरेस्ट कर लिया गया। इन सब घटनाओं के पीछे कुछ बैकग्राउंड है, मुझे सब कुछ बताना है। सब कह रहे हैं कि मैंने अपना गुनाह कबूल कर लिया है, तो यह बिल्कुल गलत बात है। मैंने कोई भी जुर्म कबूल नहीं किया है। मैं सिर्फ डेढ़ दिन के लिए इस केस का जांच अधिकारी था। क्राइम ब्रांच, एटीएस सब जांच कर रहे थे। मैंने इसके पहले कोई क्राइम नहीं किया, मेरा कोई रिकॉर्ड भी नहीं है। मुझे कुछ बातें कोर्ट के रिकॉर्ड पर लानी है।

सचिन वाझे

जज का कहना :

सचिन वाझे का पूरा बयान सुनने के बाद जज ने कहा, 'आप वकील से पूछ लीजिए।' इसके बाद वकील से हुई बात में यह तय हुआ कि, 'सचिन वाझे लिखित में अपनी बातें कोर्ट को सौंपेंगे।' इन सब के दौरान कुछ बातें है जो भूली नहीं जा सकती है। जैसे -

  • NIA को सचिन वाझे के घर से जांच के दौरान 62 जिंदा कारतूस मिले थे। यह कारतूस वाझे ने घर में क्यों रखे थे। इसका वाझे के पास कोई जवाब नहीं था।

  • सचिन वझे को बतौर पुलिस अधिकारी सरकारी कोटे से 30 जिंदा कारतूस दिए गए थे। इनमें से सिर्फ पांच गोलियां ही सचिन वाझे के पास मिली हैं। बाकी की 25 गोलियां गायब हैं। ये कारतूस कहां गए? और इनका क्या इस्तेमाल हुआ? इसका भी संतोषजनक जवाब वाझे के पास नहीं था।

यह सारी जानकारी NIA ने कोर्ट को दी है। हालांकि, आज हुई सुनवाई के बाद वाझे को 3 अप्रैल तक NIA की ही हिरासत में रहने के आदेश दिए गए हैं।

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