Saudi Aramco
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सऊदी अरब ने भी अपनाई भारत की राह, चीन से की हुई डील तोड़ी

सऊदी अरब ने भी चीन के खिलाफ फैसला लेते हुए चीन को एक बड़ा झटका दिया है। दरअसल, सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको ने चीन के साथ बीते साल में एक डील की थी जिसे अब खत्म करने का ऐलान कर दिया है।

Kavita Singh Rathore

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राज एक्सप्रेस। पिछले कुछ समय से भारत द्वारा लगातार चीन को एक एक करके झटके दिए जा रहे है। वहीं, अब सऊदी अरब भी भारत की राह अपनाता नजर आ रहा है। यानि कि, सऊदी अरब ने भी चीन के खिलाफ फैसला लेते हुए चीन को एक बड़ा झटका दिया है। दरअसल, सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको ने चीन के साथ बीते साल में एक डील की थी जिसे अब खत्म करने का ऐलान कर दिया है।

अरामको ने तोड़ी डील :

बताते चलें, चीन और अरामको के बीच होने वाली यह डील 10 अरब डॉलर (भारतीय करेंसी में लगभग 75000 करोड़ रुपये) की डील हुई थी परंतु अब यह डील ख़त्म कर दी गई है। इस डील के तहत सऊदी अरब की कंपनी अरामको चीन के साथ मिलकर एक रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल्स कॉम्प्लेक्स निर्मित करने पर कार्य करने वाली थी परंतु अचानक अरामको ने इस डील को तोड़ने दिया जिससे चीन को एक बार फिर बहुत बड़ा झटका लगा है।

क्यों तोड़ी डील :

दरअसल, कोरोना वायरस के चलते पूरी दुनिया में तेल की मांग काफी घटती नजर आई है। जिससे तेल की कीमतें भी काफी घट गई हैं। कीमतें घटने से तेल की सबसे बड़ी रिफानरी मानी जाने वाली सऊदी अरामको भी वर्तमान में काफी बुरे हालातों से गुजर रही है। इस दौरान तेल की कंपनियों को काफी नुकसान हो रहा है। नुकसान से बने हालातों को मद्देनजर रखते हुए कंपनी ने यह डील केंसिल की है। हालांकि, भविष्य में ये डील फिर से होगी या नहीं इस बारे में कंपनी ने कोई भी बयान देने से मना कर दिया है। कंपनी के चाइनीज पार्टनर चाइना नॉर्थ इंडसट्रीज ग्रुप कॉर्पोरेशन (Norinco) और पंजिन सिनसेन (Panjin Sincen) की तरफ से भी इस बारे में कोई बयान नहीं दिया गया है।

कब हुई थी डील :

बताते चलें, चीन और सऊदी अरामको के बीच यह डील साल 2019 के फरवरी माह में हुई थी। इस डील को क्राउन प्रिंस सलमान ने स्वयं साइन कर यह डील फाइनल की थी। यदि यह डील ब्रेक नहीं होती तो इन दो बातों की आशंका जताई जा रही थी।

  • अरामको एशियाई बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।

  • यह डील होने के बाद चीन भविष्य में बड़े पैमाने पर सऊदी अरब में निवेश कर सकता था।

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