SEBI का नया प्रस्ताव : बदल सकती है KYC और अकाउंट खोलने की प्रक्रिया
SEBI का नया प्रस्ताव : बदल सकती है KYC और अकाउंट खोलने की प्रक्रियाSyed Dabeer Hussain - RE

SEBI का नया प्रस्ताव : बदल सकती है KYC और अकाउंट खोलने की प्रक्रिया

जल्द ही KYC और अकाउंट खोलने की प्रकिया में बदलाव हो सकता है क्योंकि, इस मामले में कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया (SEBI) ने बुधवार को एक नया प्रस्ताव पेश किया है।

राज एक्सप्रेस। जल्द ही KYC और अकाउंट खोलने की प्रकिया में बदलाव हो सकता है क्योंकि, इस मामले में कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया (SEBI) द्वारा बुधवार को एक नया प्रस्ताव पेश किया गया है।

SEBI का प्रस्ताव :

दरअसल सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया (SEBI) ने KYC और अकाउंट खोलने की प्रक्रिया में पहले से अलग करने को लेकर एक प्रस्ताव पेश किया गया है। SEBI का मानना है कि, इन बदलावों से प्रक्रिया का मानकीकरण किया जा सकेगा। साथ ही डुप्लीकेशन से बचा जा सकेगा। इसके अलावा SEBI का सुझाव है कि KYC को स्टॉक एक्सचेंज, डिपॉजटरीज और KYC रजिस्ट्रेशन एजेंसी (KRAs) के जरिए किया जाना चाहिए। वहीं, ट्रांजैक्शन और अकाउंट खोलने के लिए डॉक्यूमेंटेशन संबंधित रजिस्टर्ड इंटरमीडियरीज की जिम्मेदारी रहेगी।

वर्तमान के नियम :

बताते चलें, वर्तमान समय में सिक्योरिटीज मार्केट में क्लाइंट्स की KYC रजिस्टर्ड इंटरमीडियरीज द्वारा की जाती है। इसमें स्टॉक ब्रोकर्स, डिपॉजिटरीज पार्टिसिपेंट्स, RTA शामिल होते हैं। इसके बाद रजिस्टर्ड इंटरमीडियरीज (RIs) KRA सिस्टम में केवाईसी रिकॉर्ड्स को अपलोड करते हैं। इस मामले में SEBI ने एक कंसल्टेशन पेपर भी जारी किया है।

SEBI का कंसल्टेशन पेपर :

SEBI ने कंसल्टेशन पेपर में कहा कि 'KRA की भूमिका केवाईसी रिकॉर्ड्स का केंद्रीकरण, केवाईसी दस्तावेजों के अपलोड को पता लगाना और जरूरत होने पर KYC रिकॉर्ड्स को सेबी रजिस्टर्ड इंटरमीडियरीज के साथ साझा करना है। KYC को करने और रिकॉर्ड का रखरखाव करने की जिम्मेदारी RIs के पास है और KRAs में केवल केवाईसी रिकॉर्ड रखे जाते हैं।' इस कंसल्टेशन पेपर में यह भी बताया गया है कि, 'मौजूदा केवाईसी प्रक्रिया में, हर RI को इंफ्रास्ट्रक्चर, मैनपावर, टेक्नोलॉजी और लागू करने की प्रक्रिया में निवेश करना होता है जो अक्सर इंटरमीडियरीज में अलग होता है. इसके साथ RI का रजिस्ट्रेशन रद्द होने की स्थिति में, उसके द्वारा जमा किए गए ऑरिजनल केवाईसी दस्तावेजस बाद के RI को नहीं उपलब्ध हो सकते हैं और निवेशक को दोबारा केवाईसी की जरूरत हो सकती है।'

SEBI का कहना :

SEBI ने कहा कि 'प्रस्तावित प्रक्रिया से KYC प्रक्रिया को स्टैंडड्राइज करने के कई उद्देश्यों को हासिल करने में मदद मिलेगी। इससे KYC की प्रक्रिया ज्यादा मजबूत होती, डुप्लीकेशन से बचा जा सकेगा, RI को पैसे की बचत भी होगी. सेबी ने लोगों से प्रस्ताव पर 15 फरवरी तक जवाब मांगे हैं।'

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