आयात करने क्यों मजबूर हुआ दूसरा सबसे बड़ा प्याज निर्यातक?
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आयात करने क्यों मजबूर हुआ दूसरा सबसे बड़ा प्याज निर्यातक?

“अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि अतिरिक्त विदेश व्यापार महानिदेशालय कार्यालय बेंगलूरू निर्यात की जा रही प्याज की मात्रा की निगरानी करेगा।”

हाइलाइट्स :

  • इतने बढ़े दाम की मच गया कोहराम

  • भारत में प्याज निर्यात प्रतिबंध से पड़ोसी हलाकान

  • भारत को अब नीदरलैंड और मिस्त्र से बंधी मदद की आस

  • प्याज के आसमानी दाम से लेकर आयात-निर्यात के आंकड़ों पर पड़ताल

राज एक्सप्रेस। उपभोक्ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के तहत अंतर मंत्रालय समिति ने प्याज की कीमतों और उपलब्धता की समीक्षा की। PIB से जारी सूचना के अनुसार अंतर-मंत्रालय समिति के माध्यम से प्याज की कीमतों और उपलब्धता की सुनिश्चतता को लेकर बैठक में अहम चर्चा हुई।

प्याज पर गहन मंथन में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, वाणिज्य मंत्रालय, खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय, नैफेड, मदर डेयरी, केंद्रीय भंडार के प्रतिनिधियों, दिल्ली सरकार के प्रतिनिधि, एपीएमसी प्रतिनिधि और उपभोक्ता कार्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

इन मुद्दों पर मंथन :

दीपावली की छुट्टियों से मंडियों में प्याज की आपूर्ति में हुए व्यवधान, कुछ उत्‍पादक क्षेत्रों में बारिश के कारण कटाई प्रभावित होने जैसे मुद्दे चर्चा में अहम रहे। कृषि मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में खरीफ प्याज की कटाई चल रही है जबकि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश एवं राजस्थान में इसकी शुरूआत हो गई है।

देर से खरीफ की बुवाई :

महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात में देर से बुवाई हो पाई है। हालांकि खरीफ के अंतर्गत बुवाई क्षेत्र या रकबा पिछले वर्ष की तुलना में अधिक होने की उम्मीद विभाग कर रहा है।

दिल्ली में जतन :

  • मदर डेयरी दिल्ली के बाजार में खुदरा बिक्री के लिए खुले बाजार से प्याज लाकर प्याज की आपूर्ति बढ़ाई जाएगी। एपीएमसी दिल्ली इस काम में मदर डेयरी की मदद करेगी।

  • प्याज की आवक-जावक को आसान बनाने ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

  • खबरें हैं कि, 80 कंटेनर प्‍याज मिस्र और नीदरलैंड से आयात की जा रही है।

'रोज़ अनियन' एक्सपोर्ट में छूट :

विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) की अधिसूचना के अनुसार बेंगलूरू की खास किस्म की ‘रोज़ प्याज’ को इस वर्ष 30 नवंबर तक कुल 9,000 टन तक निर्यात (Onion Export) करने की अनुमति दी गई है। मतलब अब 30 नवंबर तक सरकार 'रोज़ अनियन' को निर्यात कर सकेगी।

लगा था बैन :

गौरतलब है कि, भारत में उपजी प्याज की कमी और बढ़ते दाम की समस्या के कारण केंद्र सरकार ने सितंबर में प्याज की सभी किस्मों के निर्यात पर रोक लगा दी थी। हालांकि सरकार ने कुछ शर्तों के साथ अब स्पेशल प्याज “रोज़ अनियन” के निर्यात पर लगी रोक में छूट प्रदान की है।

कर्नाटक को राहत :

सरकार के इस अहम निर्णय से कर्नाटक की इस स्पेशल उत्पादक वर्ग को बड़ी राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) की अधिसूचना के अनुसार बेंगलूरू का ‘रोज़ प्याज' केवल चेन्नई बंदरगाह से ही निर्यात किया जा सकेगा।

कर्नाटक को राहत :

सरकार के इस अहम निर्णय से कर्नाटक की इस स्पेशल जिंस के उत्पादक वर्ग को बड़ी राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) की अधिसूचना के अनुसार बेंगलूरु का ‘रोज़ प्याज' केवल चेन्नई बंदरगाह से ही निर्यात किया जा सकेगा।

बाजार में प्याज की आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए तमाम सरकारी उपायों के बावजूद प्याज आम जनता की थाली से दूर होती जा रही थी। अगस्त माह से प्याज की खुदरा कीमतों में भारी उछाल के कारण प्याज का एक्सपोर्ट रोकने का सरकार को निर्णय लेना पड़ा।

बाढ़ का कहर :

भारत के महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्याज उत्पादक अति विशिष्ट राज्यों में बाढ़ के कारण प्याज उत्पादन-आपूर्ति बाधित होने से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और देश के कई प्रदेशों में इस साल खुदरा प्याज का दाम 50-100 रुपए प्रति किलोग्राम तक जा पहुंचा।

रोज़ ऑनियन की खूबी :

बेंगलुरू के ‘रोज़' किस्म के प्याज की पैदावार प्रदेश के चिकबल्लापुर और कोलार जिलों में होती है। प्रदेश में इस खास प्याज का बड़े पैमाने पर उत्पादन हो रहा है। खासियत और पहचान की अगर बात करें तो ये प्याज आकार में छोटे और गहरे गुलाबी रंग का होता है। प्याज की इस खास किस्म की श्रीलंका, मलेशिया और अन्य दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में खासी डिमांड है।

प्याज के आंसू रोए पड़ोसी :

भारत में प्याज निर्यात पर प्रतिबंध लगने से पड़ोसी देशों खासकर नेपाल, बांग्लादेश, मलेशिया और श्रीलंका में प्याज के दाम आसमान पर जा पहुंचे। दुनिया में प्याज के दूसरे सबसे बड़े निर्यातक देश भारत में प्याज निर्यात पर प्रतिबंध के बाद बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना तक को प्याज से तौबा करना पड़ी। भारत से आयात प्रभावित होता देख पड़ोसी देशों ने चीन, म्यांमार, मिस्र और तुर्की से प्याज आयात करने का रास्ता चुना।

उत्पादन प्रभावित :

भारत के प्याज उत्पादक राज्यों में बारिश के कारण प्याज का उत्पादन प्रभावित हुआ है। बोवनी से लेकर स्टोर कीपिंग और मार्केट तक पहुंचाने की कड़ी व्यापक रूप से प्रभावित हुई है। प्याज की फसल में देरी के कारण कीमतें थमने का नाम नहीं ले रही हैं।

मेड इन चाइना :

हाल ही में प्याज की कीमतें 4,500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंचती देखी गईं। यह लगभग छह सालों का उच्च स्तर है। भारत में निर्यात पर बैन लगने से नेपाल में पिछले महीने प्याज की कीमतें जस्ट डबल हो गईं। बांग्लादेश की राजधानी में प्याज 100 रुपये प्रति किलो श्रीलंका में 120 रुपये प्रति किलो तक के आसपास तक बिका।

बांग्लादेश ने म्यांमार, मिस्र, तुर्की और चीन से प्याज की आपूर्ति बढ़ाने का अनुरोध तो किया है लेकिन इन देशों से भारत से होने वाले प्याज के आयात जितनी भरपाई करना बांग्लादेश के लिए बहुत कठिन होगा।

आंकड़ों पर नज़र :

कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण के अनुसार भारत ने वित्तीय वर्ष 2018-19 में लगभग 22 लाख टन प्याज को दूसरे देशों में निर्यात किया।

अब कर रहे आयात :

रिपोर्ट्स के मुताबिक तेजी से बढ़ रहीं प्याज की कीमतों के कारण भारत ने मिस्र और नीदरलैंड्स से प्याज आयात करने का निर्णय लिया है।

प्रमुख प्याज उत्पादक देश :

नंबर वन चाईना 930 हैक्टेयर में कुल 20507. 76 मीट्रिक टन प्याज का उत्पादन कर रहा है, जबकि इसके मुकाबले भारत का कुल रकबा (1064 हैक्टेयर) तो ज्यादा है लेकिन उत्पादन चीन की तुलना में कम (15118 मीट्रिक टन) है।

इसके बाद पाकिस्तान, बांग्लादेश, इंडोनेशिया जैसे प्याज उत्पादक देशों का क्रम आता है। दुनिया में चाईना और भारत प्रमुख प्याज उत्पादक देश माने जाते हैं। चाईना का जहां दुनिया के कुल उत्पादन में लगभग 27 फीसदी शेयर है वहीं भारत की 20 फीसदी की हिस्सेदारी है।

प्रमुख उत्पादक राज्य :

भारत में प्याज उत्पादन के मामले में महाराष्ट्र नंबर वन है। इसके बाद कर्नाटक, गुजरात, बिहार, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा का नंबर आता है। मध्य प्रदेश में मुख्य रूप से मालवांचल में प्याज की फसल ली जाती है।

एपीडा के आंकड़े :

एग्रीकल्चर एंड प्रोसेस्ड फूड प्रॉडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (APEDA-एपीडा) के आंकड़ों के मुताबिक भारत ने वर्ष 2018-19 के दौरान अफगानिस्तान से 833 लाख की प्याज आयात की है। हालांकि इस सूची में मात्रा का कॉलम फिलहाल खाली दर्शाया जा रहा है। इसी तरह अफगानिस्तान, यूएई, सिंगापुर को मिलाकर इस सत्र में कुल 841 लाख की प्याज आयात की जानकारी सूची में दी जा रही है।

इनको इतना निर्यात :

भारत ने 2018-19 में बांग्लादेश को 5,78,111 एमटी, मलेशिया 3,32,450 को एमटी प्याज की सप्लाई के अलावा यूएई, नेपाल, सउदी अरब, कुवैत, कतर, ओमान, इंडोनेशिया में भी प्याज एक्सपोर्ट की।

एमपी में रेट :

भारत में मध्य प्रदेश राज्य के मालवा में शाजापुर जिले की प्याज की एशिया के मार्केट्स में तगड़ी मांग है। खास तौर पर गल्फ कंट्रीज़ में शाजापुर का प्याज एक्पोर्ट किया जाता है। शाजापुर कृषि उपज मंडी में नेफेड का एक्सपोर्ट क्वालिटी से कुछ नीची गुणवत्ता का प्याज इन दिनों यहां पर होलसेल रेट पर 70 से 75 रूपया बताया जा रहा है।

“इस साल बारिश की मार से नासिक और महाराष्ट्र में प्याज की पैदावार और बाजार में आने में इस बार टाइम लग सकता है। बाजार में बेहतर क्वालिटी का प्याज फुटकर में 80 रुपया प्रति किलो जबकि छंटनी वाला प्याज 50 से 60 रुपये की रेंज में मौजूद है। इस बार दूसरे उत्पादक राज्यों में भी प्याज उत्पादन और उसकी क्वालिटी पर असर पड़ा है।”

अनोखी लाल राठौर, अनुभवी कृषक एवं कृषि मंडी व्यापारी, शाजापुर

“बीते कुछ सालों से सितंबर से लेकर नवंबर महीने तक प्याज के भावों में थोड़ा-बहुत उतार-चढ़ाव आता रहा है। इससे घबराने की जरूरत नहीं। यह सिर्फ थोड़े समय के लिए ही है। इस बार देश के उन हिस्सों में भी बाढ़ आई, जहां पहले कभी नहीं आती थी। इससे सप्लाई चेन प्रभावित हुई है।”

रामविलास पासवान, केंद्रीय उपभोक्ता कार्य, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री

आर्थिक मंदी से जूझ रहे भारत में प्याज के तीखे दामों से लोगों के घर का बजट और जायका गड़बड़ा गया। नई प्याज की आवक के बाद ही भारत और पड़ोसी देशों को राहत मिलने की उम्मीद व्यापारी और उत्पादक कर रहे हैं।

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