लॉकडाउन में रेल कर्मियों की अटूट मेहनत का परिणाम है शेषनाग
ये नजारा हुआ आम जब शेषनाग ने भरी रफ्तार।Social Media

लॉकडाउन में रेल कर्मियों की अटूट मेहनत का परिणाम है शेषनाग

"कोविड 19 से निपटने निलंबित ट्रेनों के कारण रेलवे को काफी दिनों से लंबित कामों को निपटाने का खास मौका मिला। इस दौरान भारतीय रेलवे ने रखरखाव संबंधी लंबे समय से लंबित 200 से अधिक कार्यों को अंजाम दिया।"

हाइलाइट्स

FOB का काम पूरा

हटाया ROB का डेक

बढ़ गई ट्रेनों की रफ्तार

2.8 किमी. लंबी शेषनाग

राज एक्सप्रेस। भारतीय रेलवे ने काफी लंबे समय से लंबित रखरखाव से जुड़े कई कामों पर ध्यान केंद्रित किया है। ये वो काम हैं जिनके लिए लंबी अवधि के ट्रैफिक ब्लॉक की आवश्यकता पड़ती। भारतीय रेलवे ने लॉकडाउन के दौरान लंबित सुधार कार्यों को पूरा करने की योजना बनाई और ट्रेन सेवा को प्रभावित किए बिना काम को अंजाम दिया। इसका परिणाम यह है कि रेलवे ने शेषनाग जैसी लंबी ट्रैन का रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया।

दो सैकड़ा से ज्यादा-

कोरोना वायरस डिजीज 19 महामारी से निपटने रेलवे में निलंबित यात्री ट्रेनों-सेवाओं के कारण रेलवे को काफी दिनों से लंबित कामों को निपटाने का खास मौका मिला। इस दौरान भारतीय रेलवे ने रखरखाव संबंधी लंबे समय से लंबित 200 से अधिक कार्यों को अंजाम दिया।

इसमें यार्ड रीमॉडलिंग, पुराने पुलों की मरम्मत, रेल लाइनों का दोहरीकरण और विद्युतीकरण समेत सिज़र क्रॉसओवर से जुड़े कई महत्वपूर्ण कामों को भारतीय रेलवे ने लॉकडाउन के दौरान पूरा किया।

रोकना पड़ता ट्रैफिक -

भारतीय रेलवे ने लॉकडाउन के दौरान यात्री गाड़ियों के न चलने का फायदा उठाते हुए लंबे समय से लंबित अतिदेय रखरखाव संबंधी कई कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया। यह रेलमार्ग के वो काम थे जिसके लिए लंबे समय के लिए रेल रूट को ब्लॉक करने की आवश्यकता पड़ती।

गौरतलब है कि ये कार्य कई वर्षों से लंबित थे और इन लंबित कामों के कारण रेलवे को गंभीर अड़चनों का सामना करना पड़ रहा था। इस वजह से रेल प्रशासन ने लॉकडाउन अवधि के दौरान मिले कम ट्रैफिक के अवसर को भुनाने की योजना बनाई।

महत्वपूर्ण मौका -

गौरतलब है कि सोशल डिस्टेंसिंग के मकसद से भारत में यात्री ट्रेनों का संचालन निलंबित कर दिया गया है। ऐसे में रेलमार्ग पर कुछ गिनी चुनी मालगाड़ियों को ही चलाया जा रहा है। रूट पर कम ट्रैफिक होने से रेलवे को इन लंबित कामों को समेटने का महत्वपूर्ण अवसर मिला। इसे पढ़ें- IRCTC में चूकने वालों को मिलेगा SBI कार्ड IPO से लाभ का मौका

इतनी अड़चनें दूर -

दरअसल रेल प्रशासन ने रेलमार्ग की अड़चनों को दूर करने के साथ ही रेलपथ पर सुरक्षा बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण कामों को अंजाम दिया है।

इसमें 82 पुलों का पुनर्निर्माण-पुनर्वास, 48 सीमित ऊंचाई वाले सबवे और क्रॉसिंग गेट के समीप सड़क अंडर ब्रिज, 16 फुट ओवर ब्रिज का निर्माण एवं उनका सुदृढ़ीकरण, 14 पुराने फुट ओवर ब्रिज को हटाना, 7 रोड ओवर ब्रिज का लोकार्पण, 5 यार्ड्स की रीमॉडलिंग, दोहरीकरण और विद्युतीकरण के एक कमीशनिंग काम के साथ ही 26 अन्य महत्वपूर्ण बड़ी परियोजनाएं।

कुछ प्रमुख कामों पर नजर -

दक्षिणी रेलवे के चेन्नई डिवीजन में जोलारपेट्टी के यार्ड संशोधन का काम 21 मई 2020 को पूरा हुआ। इस महत्वपूर्ण काम के पूरा होने का ही यह परिणाम है यहां रेल पटरियों के वक्र को कम करने से बेंगलुरु के दिशांत में 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक की गति बढ़ाने में मदद मिली है। इसके साथ-साथ अन्य सुविधाओँ का भी यहां विस्तार किया गया।

FOB का काम -

बात करें उत्तर रेलवे के फिरोजपुर डिवीजन में लुधियाना की तो यहां पर पुराने अनुपयोगी फुट ओवर ब्रिज (FOB) को हटा दिया गया। यह काम 5 मई 2020 को पूरा हुआ। 19 ट्रैक्स और 7 यात्री प्लेटफॉर्म्स को कवर करने वाले 135 मीटर लंबे इस FOB का काम साल 2014 से लंबित था।

ROB का डेक -

दक्षिण पश्चिम रेलवे के मैसूरु डिवीजन में तुंग नदी पर बने पुल के री-गर्डरिंग का काम 3 मई 2020 को पूरा हुआ। इसी तरह मध्य रेलवे के मुंबई डिवीजन में डोंबिवली के पास कोपर रोड में रोड ओवर ब्रिज (ROB) के असुरक्षित डेक को हटाने का कार्य 30 अप्रैल 2020 को पूरा हुआ।

इससे यहां पर सुरक्षा के मानकों में वृद्धि हुई है। गौरतलब है कि इस डेक को बीते साल 2019 में सड़क उपयोगकर्ताओं के लिए असुरक्षित घोषित किया गया था। सनद रहे इस ब्रिज के नीचे 6 रेलवे ट्रैक होकर गुजरते हैं।

पीएम की वाराणसी –

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी डिवीजन में दोहरीकरण संग विद्युतिकरण से जुड़े दो प्रोजेक्ट्स को अमलीजामा पहनाया गया। पूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी मंडल में विद्युतीकरण के साथ दोहरीकरण से जुड़ी दो परियोजनाएं 13 जून को पूरी हुईं।

माल भाड़े में कमी-

इनमें से एक परियोजना कछवा रोड से माधोसिंह सेक्शन तक है। जबकि दूसरा मंडुआडीह से प्रयागराज खंड तक 16 किलोमीटर की दूरी का काम है। वाराणसी मंडल में इस महत्वपूर्ण काम के पूरा होने का परिणाम यह हुआ कि पूर्व-पश्चिम मार्ग पर माल ढुलाई की सुविधा में इजाफा होने से माल भाड़े में गिरावट आई। इसे पढ़िये- ICF से वंदे भारत ट्रेन के 44 रैक खरीदेगा इंडियन रेलवे

चेन्नई का ROB -

चेन्नई सेंट्रल स्टेशन के मद्देनजर 8 रेलवे ट्रैक पार करने वाले ROB को ध्वस्त करने का काम 9 मई 2020 को पूरा हुआ। गौरतलब है इस काम के लिए काफी देर ट्रेफिक को रोकना या फिर डायवर्ट करना पड़ता। इस रोड ओवर ब्रिज को असुरक्षित घोषित किया गया था। इस ROB को जुलाई 2016 से भारी वाहनों के लिए बंद कर दिया गया था।

इस काम के लिए दीर्घकालीन ट्रैफिक ब्लॉक करने की जरूरत पड़ती इस कारण यह काम टलता आ रहा था। ऐसा इसलिए क्योंकि मेगा ब्लाक से यात्री राजस्व की हानि के साथ ही ट्रेनों को भी बड़े पैमाने पर रद्द करना या फिर उनके समय या स्थान का पुनर्निर्धारण करना पड़ता।

दक्षिण मध्य रेलवे के विजयवाड़ा डिवीजन में दो नए पुलों के निर्माण का कार्य 3 मई को पूरा हुआ। ईस्ट कोस्ट रेलवे में हावड़ा- चेन्नई मार्ग पर खुर्दा रोड डिवीजन के सीमित ऊंचाई के सबवे का निर्माण 9 मई 2020 को पूरा हुआ। जिसके परिणाम स्वरूप ट्रेनों की परिचालन क्षमता और सुरक्षा में वृद्धि हुई।

आजमगढ़ में स्पीड बढ़ी -

पूर्वोत्तर रेलवे में वाराणसी मंडल के आजमगढ़ स्टेशन के सिग्नलिंग अपग्रेडेशन का काम 23 मई को पूरा हुआ। मऊ-शाहगंज खंड को एसटीडी- II (R) में अपग्रेड किया गया है। यहां यार्ड की गति 50 किमी प्रति घंटा से अपग्रेड कर 110 किमी प्रति घंटा पहुंचाने में मदद मिली है। साथ ही साथ रिसेप्शन, डिस्पैच और शंटिंग की सुविधा का भी यहां इजाफा हुआ है।

कैंची कटिंग में बदलाव -

दक्षिण मध्य रेलवे के विजयवाड़ा डिवीजन में कैंची कटिंग (scissors crossover) वाले स्थानों के लकड़ी के लेआउट को अलग कर उनके स्थान पर प्री स्ट्रेस कॉंक्रीट (PSC) लेआउट लगाया गया। लंबित यार्ड रीमॉडलिंग के लिए काजीपेट यार्ड में 72 घंटों का एक प्रमुख ब्लॉक लिया गया था।

गौरतलब है कि सिज़र्स क्रॉसओवर की लकड़ियां का आधार 1970 में रखा गया था। इन पुरानी लकड़ियों को हटाकर मानक पीएससी लेआउट लगाने से रेलमार्ग पर सुरक्षा में वृद्धि हुई है।

सेंट्रल रेलवे के मुबंई डिवीजन में तिलक नगर स्टेशन के पास RCC बॉक्स लगाने के लिए 28 और 52 घंटों के दो मेगा ब्लॉक की जरूरत पड़ी। यह काम बारिश के मौसम में हार्बर लाइन पर तिलक नगर स्टेशन के पास होने वाली समस्या के समाधान के लिए किया गया।

बीना में सौर ऊर्जा -

बीना में रेलवे की एक खाली भूमि पर विकसित सौर ऊर्जा से ट्रेनों को चलाने के लिए अभिनव पायलट परियोजना व्यापक परीक्षण के महत्वपूर्ण चरण में है। 25 केवी रेलवे ओवरहेड लाइन को सीधे फीड करने के लिए 1.7 मेगा वाट की यह परियोजना भारतीय रेलवे और भेल का संयुक्त उपक्रम है। इसे पढ़िये - IRCTC एक्सप्रेस पर निवेशकों को रखना होगा इन बातों का खास ध्यान

'शेषनाग' का रिकॉर्ड -

'लॉकडाउन' में रेलमार्गों के दुरुस्तीकरण का ही परिणाम है कि रेल विभाग आए दिन नए प्रतिमान दर्ज कर रहा है। हाल ही में भारतीय रेलवे ने 'शेषनाग' नाम की स्पेशल सबसे लंबी मालगाड़ी चलाकर खुद का ही रिकॉर्ड तोड़ डाला। इसे पढ़िये- ट्रेनों ने अपने निर्धारित समय पर पहुंच कर रचा इतिहास

इसके पहले यह रिकॉर्ड 'सुपर एनाकोंडा' नाम की मालगाड़ी के नाम दर्ज था। गौरतलब है 2.8 किलोमीटर लंबी 'शेषनाग' मालगाड़ी ने महाराष्ट्र के नागपुर से छत्तीसगढ़ के कोरबा तक की दूरी तय की।

इसके पहले 'सुपर एनाकोंडा' जो कि दो किलोमीटर लंबी मालगाड़ी थी को ओडिशा के लाजकुरा और राउरकेला के बीच चलाया गया था।

डिस्क्लेमर – आर्टिकल प्रचलित रिपोर्ट्स पर आधारित है। इसमें शीर्षक-उप शीर्षक और संबंधित अतिरिक्त प्रचलित जानकारी जोड़ी गई हैं। इस आर्टिकल में प्रकाशित तथ्यों की जिम्मेदारी राज एक्सप्रेस की नहीं होगी।

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