टाटा ग्रुप के हाथ फिर आ सकती Air India की कमान, Tata Sons की सबसे बड़ी बोली
टाटा ग्रुप के हाथ फिर आ सकती Air India की कमानKavita Singh Rathore -RE

टाटा ग्रुप के हाथ फिर आ सकती Air India की कमान, Tata Sons की सबसे बड़ी बोली

Air India के लिए अब बोली की प्रक्रिया भी पूरी हो गई है। वहीं, अब Air India को खरीदने के लिए भारत की नंबर वन कंपनियों में शुमार टाटा संस (Tata Sons) की बोली सबसे ज्यादा पाई गई है।

हाइलाइट्स :

  • 89 साल पहले टाटा ग्रुप के चेयरमेन ने की थी 'Air India' की शुरुआत

  • 89 साल पुराना इतिहास दोहराया जा सकता

  • टाटा ग्रुप ही एक बार फिर संभाल सकता Air India की कमान

  • नेशनलाइजेशन के बाद 'टाटा एयरलाइन्स' का नाम बदल कर Air India हुआ

राज एक्सप्रेस। यह बात बहुत ही कम लोग ही जानते हैं कि, भारत की सरकारी क्षेत्र की हवाई सेवा प्रदान करने वाली एयरलाइन कंपनी 'Air India' की शुरुआत 89 साल पहले टाटा ग्रुप के चेयरमेन 'जहांगीर रतनजी ददभोय टाटा' (JRD Tata) ने की थी और अब एक बार फिर ऐसा समय आने वाला है जब 89 साल पुराना इतिहास दोहराया जा सकता और ऐसा तब होगा जब टाटा ग्रुप ही एक बार फिर इस 'Air India' एयर लाइन की कमान अपने हाथ में लेगा। क्योंकि, Air India नुकसान के चलते बिकने की कगार पर आ चुकी है। जिसके लिए अब बोली की प्रक्रिया भी पूरी हो गई है। वहीं, अब Air India को खरीदने के लिए भारत की नंबर वन कंपनियों में शुमार टाटा संस (Tata Sons) की बोली सबसे ज्यादा पाई गई है।

Tata Sons की बोली सबसे ज्यादा :

दरअसल, घाटे का सामना कर रही एयरलाइन कंपनी Air India अपनी दिवालिया प्रोसेस से गुजर रही थी। एयरलाइन को खरीदने के लिए लगातार अन्य कंपनियों द्वारा बोलियां लगाई जा रही थीं। इस एयरलाइन को खरीदने के लिए टाटा ग्रुप बहुत पहले से अपनी रूचि दिखाते आ रहा है। इतना ही नहीं टाटा ग्रुप इस नेशनल कैरियर के लिए अपनी बोली लगा कर इस डील के काफी करीब पहुंचने की भी बहुत कोशिश की थी। वहीं, अब जब सभी बोलियाँ सामने आगई हैं तब, टाटा संस (Tata Group) द्वारा सबसे बड़े अमाउंट की बोली लगाई गई है। यानी कि, Tata Sons का नाम सबसे बड़े बोलीदाता के रूप में सामने आया है। इसलिए ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि, टाटा ग्रुप एयरलाइन के लिए लगाई गई बोली जीत कर Air India की कमान अपने हाथ में ले सकता है। हालांकि फिलहाल सरकार ने इस तरह की रिपोर्ट्स को खारिज किया है।

सरकार ने मीडिया रिपोर्ट की खारिज :

बताते चलें, भले ही टाटा ग्रुप की कंपनी टाटा संस ने सबसे ज्यादा लगाई हो, लेकिन इसको लेकर आधिकारिक तौर पर जानकारी अगले सप्ताह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अगुवाई में होने वाली कमेटी की बैठक के बाद साझा की जाएगी। एयर इंडिया के निजीकरण पर बनाई गई मंत्रियों की कमेटी अगले कुछ दिनों में मिलेगी। इसके अलावा कमेटी एयरलाइंस के लिए बोली जीतने वाले पर विचार और मंजूरी देगी। वहीं, सामने आई खबरों को सरकार ने खारिज करते हुए ट्वीटर पर जानकारी दी है। निवेश एवं लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग के सेक्रेटरी ने ट्विटर अकॉउंट से ट्वीट कर कहा है कि,

'Air India विनिवेश मामले में भारत सरकार द्वारा वित्तीय बोलियों के अनुमोदन का संकेत देने वाली मीडिया रिपोर्ट गलत हैं। जब इसके बारे में फैसला लिया जाएगा, तब सरकार के निर्णय के बारे में मीडिया को सूचित किया जाएगा।'

Secretary, DIPAM

सरकार की योजना :

सूत्रों की मानें तो, सरकार की योजना विनिवेश प्रक्रिया को पूरा करने और दिसंबर 2021 तक Air India की कमान नए मालिक को सौंपने की है। जबकि, सरकार ने नुकसान उठा रही Air India को बेचने के लिए जनवरी 2020 में विनिवेश प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन कोरोना वायरस के चलते यह प्रक्रिया लगभग 1 साल तक रोक दी गई। लेकिन 15 सितंबर सभी कंपनियों को अंतिम बोली जमा करने के आदेश दिए गए।

Air India का इतिहास :

Air India की शुरुआत साल 1932 में टाटा समूह ने 'टाटा एयरलाइन्स' के नाम से शुरू की थी, लेकिन साल 1946 में इस कंपनी का नाम बदलकर Air India कर दिया गया। साल 1953 में जब नेशनलाइजेशन हुआ तब डोमेस्टिक मूवमेंट के लिए इंडियन एयरलाइन्स और इंटरनेशनल फ्लाइट्स के लिए Air India को चुना गया। Air India की दोनों कंपनियों ने मिलकर एक वायुदूत कंपनी शुरू की, इसी कंपनी का साल 1993 में इंडियन एयरलाइन्स से समझौता हो गया। इससे फायदा होने की जगह कंपनी कर्ज में डूबने लगी।

इसके बाद साल 2005 में कंपनी ने 111 हवाई जहाज खरीदे जिससे कंपनी के ऊपर 70 हजार करोड़ रुपए का कर्ज और बढ़ गया। इसके बाद साल 2007 में एअर इंडिया (Air India) और इंडियन एयरलाइन्स (Indian Airlines) का समझौता हो गया। ये समझौता कंपनी के लिए नुकसान का समझौता साबित हुआ। इसके बाद से कंपनी को लगातार नुकसान होता ही चला गया और कंपनी एक बड़े कर्ज में डूब गई। वहीं साल 2018-19 में भी Air India को 8,556.35 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा था।

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