Gap between rich and poor is decreasing rapidly
Gap between rich and poor is decreasing rapidly Raj Express

आय से जुड़ी असमानता में देखने में आई गिरावट, हाल के दिनों में लगातार मजबूत हो रहा मध्य वर्ग

देश में आय से जुड़ी असमानता हाल के वर्षों में घटी है। एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट से यह जानकारी दी गई है। मध्यमवर्ग की हालत लगातार बेहतर हो रही है।

हाईलाइट्स

  • कुल आय में बड़े करदाताओं की भागीदारी घट रही

  • लोगों की इनकम बढ़ने से अफोर्डेबिलिटी बढ़ रही है

  • तेजी से बड़ी कंपनियों में बदल रही छोटी कंपनियां

राज एक्सप्रेस। देश में आय से जुड़ी असमानता हाल के वर्षों में घटी है। एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट से यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार मध्यमवर्ग की हालत लगातार बेहतर हो रही है। अर्थव्यवस्था के कुछ सेक्टर्स में बेहतरी और बाकी के पीछे छूट जाने के दावे सही नहीं हैं। देश के एक तिहाई से अधिक करदाता उच्च आयकर दायरे में आ गए हैं। अर्थव्यवस्था में योगदान के हिसाब से देखें तो कुल आय में बड़े कर दाताओं की हिस्सेदारी तेजी से घट रही है। जोमैटो जैसे ऑनलाइन फूड ऑर्डरिंग प्लैटफॉर्म्स का इस्तेमाल बढ़ने और आईफोन की बिक्री का हवाला देते हुए एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है कि लोगों की आय बढ़ने की वजह से लोगों की क्रय शक्ति में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

घट रही आय में उच्च वर्ग की हिस्सेदारी

एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2014 में देश के 23 लोगों की आमदनी 100 करोड़ रुपये से ज्यादा थी। उनकी कुल आय 29290 करोड़ रुपये थी। वर्ष 2021 में 100 करोड़ रुपये से अधिक आय वालों की संख्या 136 हो गई और उनकी कुल आय 34301 करोड़ रुपये थी। 100 करोड़ रुपये से अधिक कमाने वाले 23 लोगों की आय संयुक्त रूप से वर्ष 2014 में कुल आय की 1.6 प्रतिशत थी। वित्त वर्ष 2021 में टोटल इनकम में इस टॉप समूहों की हिस्सेदारी घटकर 0.77 प्रतिशत रह गई।

आय में लगातार घट रही असमानता

इसी तरह 10 करोड़ रुपये से अधिक कमाई वाले टॉप 2.5 फीसदी कर दाताओं की हिस्सेदारी वर्ष 2014 से 2021 के बीच 2.81 फीसदी से घटकर 2.28 फीसदी पर आ गई है। वहीं, 3.5 लाख रुपये से कम आमदनी वालों में आय की असमानता घटी है। वित्त वर्ष 2014 से 2021 के बीच यह 31.8 फीसदी से 15.8 फीसदी रह गई है। इसका मतलब है कि कुल आय में इस आय समूह की हिस्सेदारी उनकी आबादी की तुलना में 16 फीसदी बढ़ गई है। 36.3 फीसदी करदाता मध्यम आय समूह के निकलकर उच्च आयवर्ग के दायरे में चले गए। हाल के दिनों में सभी आय वर्गों में असमानता घट रही है, जबकि ग्रोथ बढ़ रही है।

आईटीआर दाखिल करने वाले बढ़े

5 लाख से 10 लाख रुपये तक की आय वाले करदाताओं की ओर से दाखिल होने वाले आईटीआर में एवाई 2013–14 और 2021–22 के बीच 295 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। इससे पता चलता है कि ग्रॉस टोटल इनकम की ऊपरी रेंज की ओर माइग्रेशन हो रहा है। इसी दौरान 10 लाख से 25 लाख रुपये तक की आय वाले करदाताओं की ओर से दाखिल किए गए आईटीआर में 291 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है।

के-शेप रिकवरी पर उठाए सवाल

एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना संकट के बाद अर्थव्यवस्था में के शेप की रिकवरी होने के दावे असत्य हैं। जब उल्लेखीनीय है कि अर्थव्यवस्था के कुछ हिस्सों की ग्रोथ होने के साथ दूसरे हिस्से मुश्किल में जा फंसते हैं तो इस स्थिति को के-शेप यानी असमान रिकवरी कहा जाता है। एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है कि महामारी के बाद लोग अपनी बचत रियल एस्टेट सहित फिजिकल असेट्स में लगा रहे हैं। काफी लोग दोपहिया गाड़ियों से यूज्ड या एंट्री लेवल कारों की ओर शिफ्ट हो रहे हैं।

बढ़ रही हैं टैक्स फाइल करने वाली महिलाएं

एसबीआई रिपोर्ट के मुताबिक, इंडिविजुअल टैक्स फाइल करने वालों में महिलाओं की संख्या लगभग 15 फीसदी है। केरल, तमिलनाडु, पंजाब और पश्चिम बंगाल में इनकी हिस्सेदारी अधिक है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मीडियम एंड स्मॉल स्केल उद्यमों के आय पैटर्न में भी बदलाव आया है। 19.5 फीसदी छोटी फर्मों की आय बढ़ गई है और वे अब एमएसएमई कंपनी में तब्दील हो गई हैं। इनमें से 4.8 फीसदी ने स्वयं को स्मॉल, 6.1 फीसदी ने मीडियम और लगभग 9.3 फीसदी ने लार्ज साइज फर्म में बदल दिया है। इससे पता चलता है कि एमएसएमई सेक्टर बड़ा हो रहा है।

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