टमाटर की कीमतें कर रही व्यापारियों का स्वाद खट्टा
Tomato prices less than Rs 1 per kgKavita Singh Rthore -RE

टमाटर की कीमतें कर रही व्यापारियों का स्वाद खट्टा

टमाटर किसी भी सब्जी में मिलते ही सब्जी का स्वाद बढ़ा देता है। वहीं, अब टमाटर की कीमतें गिरकरर ग्राहकों का स्वाद तो बढ़ा रही हैं, लेकिन नुकसान के कारण व्यापारियों का स्वाद खराब कर रही हैं।

राज एक्सप्रेस। टमाटर की गिनती एक ऐसे खाद्य पदार्थ में होती है जो, किसी भी सब्जी में मिलते ही सब्जी का स्वाद कई गुना बढ़ा देता है। वहीं, अब टमाटर की कीमतें सस्ती होकर ग्राहकों का स्वाद तो बढ़ा रही हैं, लेकिन नुकसान के कारण व्यापारियों का स्वाद खराब कर रही हैं। क्योंकि, कोरोना वायरस के चलते टमाटर की कीमतें इतनी अधिक गिर गई हैं कि, टमाटर व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

3 साल के निचले स्तर पर पहुंची कीमतें :

दरअसल, देश में लॉकडाउन के चलते चल रही आर्थिक मंदी के बीच सब्जी मार्केट में टमाटर की कीमत इस हद तक गिरी कि, टमाटर की कीमतें 3 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई हैं। कई मंडियों में तो टमाटर 1 रूपये प्रति किलो से भी कम में बिक रहे हैं। देश की राजधानी दिल्ली स्थित सबसे बड़ी थोक मंडी से लेकर आजादपुर मंडी एपीएमसी में टमाटर की कीमतें 0.75-5.25 रूपये प्रति किलो में चल रही हैं। मंडी के व्यापारियों का कहना है कि, थोक बाजार में सब्जियों के खुदरा व्यापारी न के बराबर आ रहे हैं, इसलिए मांग में कमी आई है और कीमतें गिर गई हैं।

अन्य सब्जियां भी हुई सस्ती :

मंडियों में टमाटर के अलावा प्याज और अन्य हरी सब्जियों के दाम में भी मई माह में भारी गिरावट आई है। बताते चलें, प्रसिद्ध ओखला मंडी में भी टमाटर 2 रुपये प्रति किलो में बिक रहे है परंतु तब भी इसे कोई नहीं खरीदने वाला नहीं है। वहीं, प्याज के भाव का निचला स्तर 2.50 रुपये किलो तक पहुंच गया है। इन कीमतों के गिरने का मुख्य कारण दिल्ली से लाखों लोगों का पलायन कर जाना है।

क्यों हुई सब्जियां सस्ती :

पूरे देश में लॉकडाउन होने के कारण सभी होटल-रेस्तरां, ढाबे इत्यादि बंद है। टमाटर सहित अन्य सब्जियों की सबसे ज्यादा मांग इन्हीं स्थानों पर होती है जो वर्तमान में बंद होने के कारण सब्जियों की खपत एवं मांग में काफी कमी आई है। इसलिए कीमतें गिर रही हैं। इसके अलावा एक बड़ा कारण दिल्ली से हजारों लोगों का एक साथ पलायन कर जाना भी बताया जा रहा है। तीसरा कारण यह भी बताया जा रहा है कि, मंडियों में टोकन सिस्टम से सब्जियां मिल रही हैं जिससे ग्राहकों को इंतजार करना पड़ता है इसलिए वे सब्जी लेने मंडी नहीं जाना चाहते हैं। हालांकि, फलों की कीमतों में कोई कमी नहीं आई है।

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