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Mobile Numbers|Kavita Singh Raqthore - RE
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अब जल्द ही मोबाइल और लैंडलाइन नंबर्स में बढ़ जाएगी अंकों की संख्या

अब जल्द ही मोबाइल नंबर्स 11और फिक्स्ड लाइन नंबर्स 10 अंकों के हो जाएंगे, क्योंकि TRAI का विचार है, नबर्स में अंकों की संख्या बढ़ाने से आगे भी कनेक्शंस देने में किसी तरह की कोई मुश्किल नहीं होगी।

Kavita Singh Rathore

Kavita Singh Rathore

हाइलाइट्स :

  • अब बढ़ जाएगी नम्बर्स में अंको की संख्या

  • जरूरतों को देखते हुए TARI लेगा फैसला

  • जल्द होंगे नम्बरिंग प्लान में बदलाव

  • आखिरी बार 1993 और 2003 में हुए थे बदलाव

राज एक्सप्रेस। अपने अभी तक जितने भी मोबाइल नंबर (Mobile Numbers) देखे होंगे, वो 10 अंक के ही देखे होंगे, लेकिन जल्द ही हो सकता है आपका मोबाइल नंबर 11 अंकों (डिजिट) का हो जाये। जी हाँ, अब TRAI (Telecom Regulatory Authority of India) मोबाईल नंबर्स को 11 अंकों में बदलने पर विचार कर रही है। TRAI का विचार है कि, उसे मोबाइल नंबर की संख्याओं में अंकों को बढ़ा देना चाहिए। हो सकता है कि, नंबर की बढ़ती मांग को देखते हुए TRAI जल्द ही ये फैसला ले। TRAI ने इस बारे में फैसला लेने के लिए कई लोगों से राय भी मांगी है। जिसके लिए अथॉरिटी द्वारा 21 अक्टूबर की डेडलाइन तय की गई है।

TRAI के अनुसार :

TRAI के अनुसार, जिस तरह से मोबाइल उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ रही है, उसके मुताबिक, आने वाले सालों में उपभोक्ताओं की संख्या ऐसे ही बढ़ेगी। 2050 तक पूरे देश में 260 करोड़ नम्बर्स की जरूरत पड़ने का अनुमान लगाया गया है, साथ ही मोबाइल कनेक्शन के लिए नंबर कम पड़ने की आशंका जताई जा रही है, इन जरूरतों को देखते हुए, मोबाइल नंबर की संख्या में भी बढ़ोत्तरी करने की जरूरत पड़ेगी। जिसके लिए नम्बर्स में अंकों (डिजिट) को बढ़ाना जरूरी हो जाएगा, जिससे इतने लोगों को आसानी से नंबर्स मिल सके। जानकारी के लिए बता दे, वर्तमान में भारत में 120 करोड़ मोबाइल कनेक्शंस उपलब्ध हैं।

फिक्स्ड लाइन नंबर्स में भी होगी अंकों की बढ़ोत्तरी :

मोबाइल फ़ोन्स की बढ़ती हुई संख्या के बाद भी भारत में फिक्स्ड लाइन कनेक्शंस में कमी नहीं आई है, आज भी लोग अपने घर और ऑफिस में लैंडलाइन कनेक्शंस लेना पसंद करते हैं। इतना ही नहीं ब्रॉडबैंड कनेक्शंस के लिए भी फिक्स्ड लाइन नंबर की आवश्यकता होती है। इन अवश्यकताओं को देखते हुए, TRAI फिक्स्ड लाइन नंबर्स को भी 7 से बढ़ा कर 10 डिजिट का करने पर विचार बना रही है। TRAI का मानना है कि, बढ़ती हुई कनेक्शन की मांग के चलते नम्बरिंग रिसोर्सेज को खतरों का सामना करना पड़ सकता है।

आखिरी बार बदलाव :

आपकी जानकारी के लिए बता दे, इससे पहले भी भारत में फिक्स्ड लाइन नंबर्स के अंकों में बढ़ोत्तरी हो चुकी है और यह बढ़ोत्तरी 1993 और 2003 में की गई थी, जिससे 2003 के नम्बरिंग प्लान में अंकों की संख्या बढ़ाने से 750 मिलियन अतिरिक्त फोन कनेक्शंस और आसानी से बन सके थे, जिन नंबर्स का लोग आज लुफ्त उठा रहे हैं। इससे पहले जब फिक्स्ड लाइन नंबर्स में अंकों की संख्या बढ़ाई गई थी, तब पुराने नंबर्स वही थे, बस सभी नंबर्स के आगे 2 लगाकर इन नंबर्स में अंकों की संख्या को बढ़ाया गया था। इन नंबर्स में 450 मिलियन सेल्युलर और 300 बेसिक लैंडलाइन फोन्स शामिल थे। इसके अलावा डोंगल कनेक्शंस (डाटा वाले नम्बर्स) के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले नंबर्स के अंक 10 से 13 किये जायेंगे।

कनेक्शंस की क्षमता :

जिन नम्बर्स की शुरुआत 9,8 और 7 से होती है, उन मोबाइल नम्बर्स के पास कनेक्शंस की क्षमता 2.1 बिलियन है। ऐसे में आने वाले समय में 11 डिजिट वाले मोबाइल नंबर्स की जरूरत पड़ेगी। आपको बता दे, आखिरी बार नंबरिंग प्लान को 2015 में अपडेट किया गया था। इसके अलावा भारत में इंटनेशनल टेलीकम्यूनिकेशन के लिए कोड नंबर 91अलॉट का इस्तेमाल किया जाता है। भारत में सभी नम्बर्स को नेशनल नंबरिंग प्लान 2003 के अनुसार दूरसंचार विभाग बनाता है।