Coronavirus immunity: क्या इंसान को दोबारा जकड़ सकता है कोरोना वायरस?

"कोरोना वायरस से बचकर निकले लोगों के अध्ययन में इस संभावना का पता चला है कि वायरस के प्रति प्रतिरक्षा अल्पकालिक हो सकती है। मतलब बहुरूपिया विलेन covid-19 रिकवरी करने वालों पर फिर से अटैक कर सकता है।"
Coronavirus immunity: क्या इंसान को दोबारा जकड़ सकता है कोरोना वायरस?
रोग प्रतिरोधक शक्ति कितनी कारगर?- Social Media

हाइलाइट्स

  • कोरोनोवायरस से जुड़े अहम सवाल

  • Sars –Mers और एंटीबॉडी पर शोध

  • रोग प्रतिरोधक शक्ति कितनी कारगर?

राज एक्सप्रेस। कोरोनावायरस से ग्रसित और इस महामारी के बाद ठीक हुए लोगों का एक नया अध्ययन इस संभावना को बढ़ाता है कि वायरस के प्रति प्रतिरक्षा शक्ति अल्पकालिक हो सकती है।

कोरोना वायरस से बचकर निकले लोगों के ताजा अध्ययन में इस संभावना का पता चला है कि वायरस के प्रति प्रतिरक्षा अल्पकालिक हो सकती है। मतलब बहुरूपिया विलेन covid-19 रिकवरी करने वालों पर फिर से अटैक कर सकता है।

पता चला है-

किंग्स कॉलेज लंदन के वैज्ञानिकों ने अध्ययन किया है कि कैसे मानवीय शरीर प्राकृतिक रूप से एंटीबॉडी बनाकर वायरस से लड़ता है। साथ ही इस बात का भी पता लगाया है कि पहली बार वायरस से लड़ाई जीतने के बाद प्रतिरक्षा शक्ति कितने दिन तक कितने पॉवर के साथ बरकरार रहती है। इसे पढ़िये- लॉकडाउन से सुधरी वसुंधरा की सेहत

कॉलेज के अध्ययन में शामिल 96 लोगों में से लगभग सभी लोगों में डिटेक्टिव एंटीबॉडी थे जो कोरोनावायरस को बेअसर करने के साथ रोक सकते थे। लेकिन आपको सनद रहे कि इस पड़ताल में तीन माह का समय लगा।

समझें इस तरह से -

हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली संक्रमण के खिलाफ शरीर की रक्षा है। इसे मूल रूप से दो तरह से समझा जा सकता है।

जन्मजात प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया - शरीर में किसी भी बाह्य आक्रमण का पता चलते ही सबसे पहले वह तैयार होता है और हरकत में आता है। यह जन्मजात प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया के रूप में जाना जाता है। मूल रूप से इसमें रसायनों का कमाल होता है।

जो सूजन और सफेद रक्त कोशिकाओं का कारक है। ये कोशिकाएं संक्रमित कोशिकाओं को नष्ट कर सकती हैं। लेकिन यह प्रणाली कोरोनावायरस के खात्मे के लिए नाकाफी है। अध्ययन के मुताबिक यह लड़ाई कोरोनोवायरस से प्रतिरक्षा में काफी नहीं है।

अनुकूल प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया - इसके बजाय मानव को अनुकूल प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया की आवश्यकता है। इसमें ऐसी कोशिकाएं शामिल हैं जो लक्षित एंटीबॉडी का उत्पादन करती हैं जो इसे रोकने के लिए वायरस से चिपक सकती हैं। जबकि टी कोशिकाएं केवल वायरस से संक्रमित कोशिकाओं पर हमला कर सकती हैं। इसे सेलुलर प्रतिक्रिया कहा जाता है।

क्या कोरोनावायरस एंटीबॉडी बना सकते हैं? -

बना तो सकते हैं लेकिन इसमें समय लगता है; अध्ययनों से पता चलता है कि एंटीबॉडी बनाने के लिए लगभग 10 दिन लगते हैं जो कोरोनोवायरस को लक्षित करने में मददगार है। अब तक की स्टडी के मुताबिक सबसे बीमार मरीज सबसे मजबूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया विकसित करते हैं।

यदि अनुकूली प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया पर्याप्त शक्तिशाली है, तब यह संक्रमण की स्थायी स्मृति छोड़ सकता है जो भविष्य में सुरक्षा देगा।

लेकिन ध्यान रहे -

अभी यह ज्ञात नहीं है कि जिन लोगों में केवल हल्के लक्षण हैं, या कोई भी नहीं है, वे पर्याप्त अनुकूली प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया विकसित कर पायेंगे या नहीं। दरअसल टी-कोशिकाओं की भूमिका की समझ अभी भी विकसित हो रही है।

निगेटिव लोग -

लेकिन एक हालिया अध्ययन में पाया गया कि कोरोनोवायरस सबंधी परीक्षण उपरांत नकारात्मक (निगेटिव) नतीजे वाले लोगों की एंटीबॉडी में अभी भी कुछ प्रतिरक्षा शक्ति हो सकती है।

पॉजिटिव लोग –

एंटीबॉडी के लिए सकारात्मक परीक्षण करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के मामले में पाया गया है कि; दो विशिष्ट टी-कोशिकाएं थीं जो संक्रमित कोशिकाओं को पहचानती हैं और नष्ट करती हैं।

भूलने की आदत! -

सवाल उठता है रोग प्रतिरोधक शक्ति कब तक रहेगी? तो इम्युनिटी यानी रोग प्रतिरोधक शक्ति को स्वयं के प्रयासों से लंबे समय तक बरकरार रखा जा सकता है। दरअसल प्रतिरक्षा प्रणाली की स्मृति हमारे स्वयं के समान है। यह कुछ संक्रमणों को स्पष्ट रूप से तो याद रखती है, लेकिन दूसरों को भूलने की इसकी भी आदत है।

मामले में खसरा बेहद यादगार है। हालांकि कई अन्य वायरस हैं जिनके बारे में प्रतिरक्षा प्रणाली को भूलने की आदत है। जैसे कि बच्चों को एक ही सर्दी के मौसम में कई बार आरएसवी (रेस्पिरेटरी सिंकिटियल वायरस) का सामना कर पड़ता है।

मिल सकते हैं सुराग -

नये कोरोनावायरस, सार्स-सीओवी-2 के बारे में यह जानने पर्याप्त समय नहीं मिल पाया कि प्रतिरक्षा में कितनी शक्ति है? या इसका अंत कब होगा? लेकिन छह अन्य मानव कोरोनावायरस हैं जिनसे अहम सुराग मिल सकता है।

चार सामान्य सर्दी के लक्षण पैदा करते हैं और जिनकी प्रतिरक्षा अल्पकालिक है। अध्ययनों से पता चला कि कुछ रोगी एक साल के भीतर फिर से संक्रमित हो सकते हैं।

दो और कष्टकारक कोरोनावायरस –

आम सर्दी आम तौर पर हल्की होती है। लेकिन दो और कष्टकारक कोरोनावायरस हैं। एक जो गंभीर सिवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (Sars) यानी अति तीव्र श्वसन परिलक्षण का कारण बनता है। और दूसरा है मध्य पूर्व श्वसन सिंड्रोम (Mers) जिसमें कुछ साल बाद एंटीबॉडी का पता चला है।

ईस्ट एंग्लिया विश्वविद्यालय में औषधि के प्रोफेसर पॉल हंटर कहते हैं कि; "सवाल यह नहीं है कि क्या आप में प्रतिरक्षा शक्ति बन जाती है, बल्कि असल प्रश्न यह है कि यह प्रतिरक्षा शक्ति कब तक के लिये है?" उन्होंने कहा: "यह निश्चित रूप से जीवन भर के लिए नहीं होगी।"

मियाद दो साल -

सार्स में एंटीबॉडी अध्ययनों के आधार पर यह संभव है कि प्रतिरक्षा केवल एक से दो साल तक चलेगी। हालांकि अभी कुछ के लिए इस बारे में ज्ञात नहीं है। भले ही आप पूरी तरह से प्रतिरक्षित न हों, तो इस मामले में यह संभव है कि दूसरी बार संक्रमण उतना गंभीर नहीं होगा। इसे पढ़िये- तो क्या हवा, प्लास्टिक, कार्डबोर्ड पर ताकतवर है कोरोना?

क्या यह दोबारा जकड़ सकता है? -

चिकित्सा विज्ञान जगत से जुड़ी रिपोर्ट्स के मुताबिक रोग प्रतिरोधक शक्ति वैक्सीन अनुसंधान को प्रभावित कर सकती है। एक छोटे से कालखंड में लोगों को विभिन्न कोरोनोवायरस संक्रमण दिखाई देने की शुरुआती रिपोर्ट्स थीं।

हालांकि मामले पर वैज्ञानिकों की इस बात पर सहमति रही है कि; परीक्षण इस मामले में एक प्रमुख मुद्दा था। मरीजों को गलत तरीके से कहा गया कि; वे वायरस से मुक्त थे।

रोग प्रतिरोधक शक्ति का परीक्षण करने के लिए किसी को जान-बूझकर वायरस से पुनः संक्रमित नहीं किया गया है। लेकिन रीसस मकाक प्रजाति के बंदरों की एक जोड़ी पर इसे आजमाया गया। इसे पढ़िये - मॉडर्न बनाएगी 1 बिलियन कोरोना खुराक

वे दो बार संक्रमित हुए थे पहले प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया के निर्माण के लिए और फिर दूसरी बार तीन सप्ताह बाद। उन बहुत ही सीमित प्रयोगों से पता चला है कि; उन्होंने इतनी जल्दी पुनः संक्रमण के बाद फिर से लक्षणों का विकास नहीं किया।

(विस्तार से जानने आर्टिकल कोरोना को हराया पूर्वजों ने, अब इंसानों की बारी, कोरोना वायरस का वैक्सीन तैयार, रीसस मकाक में बनने लगी एंटीबॉडी! पर क्लिक करें)

अगर मेरे पास एंटीबॉडीज हैं तो क्या मैं सेफ हूं?

इसकी गारंटी नहीं दी गई है और इसीलिए विश्व स्वास्थ्य संगठन उन देशों के बारे में घबराया हुआ है जो लॉकडाउन से बाहर निकलने के तरीके के रूप में प्रतिरक्षित पासपोर्ट का उपयोग कर रहे हैं।

विचार यह है कि यदि आप एंटीबॉडी परीक्षण पास कर लेते हैं तो आप काम पर वापस जाने के लिए सुरक्षित हैं। ऐसा करना विशेष रूप से केयर होम या अस्पतालों में काम करने वालों के लिए मूल्यवान होगा। क्योंकि ऐसे सदस्यों के गंभीर लक्षणों के विकास के जोखिम के संपर्क में आने की काफी संभावना रहती है। इसे पढ़िये - कोरोना से जंग में भारतीयों को कितना आनुवांशिक फायदा?

न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडीज –

लेकिन जब आप लगभग हर रोगी में कुछ एंटीबॉडी पाएंगे, तो मामले में सभी समान नहीं हैं। न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडीज वे होते हैं जो कोरोनोवायरस से चिपके रहते हैं। साथ ही अन्य कोशिकाओं को संक्रमित करने से रोकने में भी सक्षम हैं।

चाइना में कोरोना वायरस से रिकवर करने वाले 175 लोगों के अध्ययन में पता चला है कि 30 प्रतिशत में न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडीज का स्तर बहुत कम था। विस्तार से जानने क्लिक करें प्रकट हुई चाइनीज बैट वुमन, वायरस को बताया आइसबर्ग टिप पर।

सेलुलर प्रतिरक्षा -

इसीलिए विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि "सेलुलर प्रतिरक्षा [अनुकूली प्रतिक्रिया का दूसरा हिस्सा] रिकवरी के लिए नाजुक भी हो सकता है।"

सावधान - एक और मुद्दा यह है कि सिर्फ इसलिए कि आप अपने एंटीबॉडी द्वारा संरक्षित हो सकते हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि आप वायरस से सुरक्षित हैं और दूसरों को संक्रमित नहीं कर सकते। इसे पढ़ें - मॉडेर्ना की कोरोना वैक्सीन का इंसान पर ट्रायल सफल पर क्लिक करें।

प्रतिरक्षा क्यों मायने रखती है? -

जाहिर तौर पर प्रतिरक्षा शक्ति यानी रोग प्रतिरोधक शक्ति व्यक्तिगत स्वास्थ्य कारणों के लिए मायने रखती है। खास तौर पर कोरोना वायरस डिजीज (कोविड-19) का सामना करने की स्थिति में तो इसका महत्व और ज्यादा बढ़ जाता है।

प्रतिरक्षा एक और बात से प्रभावित होती है कि वायरस कितना घातक है? यदि लोग कुछ, यहां तक कि अपूर्ण, सुरक्षा को बनाए रखते हैं, तो यह बीमारी को कम खतरनाक बना सकती है।

(इन दवाओं पर जारी कोविड-19 वैक्सीन क्लीनिकल ट्रायल – नीति आयोग)

लॉकडाउन कम करने में मदद -

रोग प्रतिरोधक शक्ति को समझने से लॉकडाउन को कम करने में भी मदद मिल सकती है। क्योंकि यदि यह स्पष्ट है कि वायरस से जकड़ने या फैलाने का जोखिम किसे नहीं है। तो प्रबंधन को जनजीवन सामान्य बनाने में काफी आसानी हो सकती है।

यदि दीर्घकालिक रोग प्रतिरोधक शक्ति पैदा करना बहुत मुश्किल है, तो यह टीका विकसित करने की दिशा में भी एक कठिनाई है। या यह इस बदलाव का कारक बन सकता है कि वैक्सीन को किस तरह उपयोग करने की जरूरत है। एक बार जीवन भर के लिए या फिर फ्लू शॉट की तरह साल में एक बार!

संक्रमण या प्रतिरक्षीकरण द्वारा प्रतिरक्षा की अवधि भी अहम होगी। क्योंकि यह तय करेगी कि हम वायरस को फैलने से रोकने में कितने सक्षम हैं। ये सभी बड़े सवाल हैं जिनके जवाब अभी भी हमारे पास मौजूद नहीं हैं।

डिस्क्लेमर – आर्टिकल प्रचलित रिपोर्ट्स पर आधारित है। इसमें शीर्षक-उप शीर्षक और संबंधित अतिरिक्त प्रचलित जानकारी जोड़ी गई हैं। इस आर्टिकल में प्रकाशित तथ्यों की जिम्मेदारी राज एक्सप्रेस की नहीं होगी।

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