बैंक धोखाधड़ी मामला
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बैंक धोखाधड़ी मामला : बैंक प्रबंधक सहित अन्य आरोपियों को पांच वर्ष की कठोर कारावास

तत्कालीन मुख्य प्रबंधक एनके ग्रोवर ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर 7 फर्मों को जाली वेयर हाउस रसीदों के आधार पर 8.1 करोड़ रु.(लगभग) की नगदी स्वीकृत की थी ।

हाइलाइट्स-

  • कोर्ट ने कठोर कारावास के साथ बड़ा जुर्माना भी लगाया ।

  • सीबीआई ने आरोपियों के विरुद्ध 09 अलग-अलग दायर किए आरोप पत्र।

  • 16 आरोपियों के विरुद्ध 30 मार्च 2011 को मामला दर्ज किया गया ।

इंदौर, मध्य प्रदेश। बैंक धोखाधड़ी के मामले में एन के ग्रोवर तत्कालीन मुख्य प्रबंधक, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, स्नेह नगर, शाखा इंदौर को पांच वर्ष की कठोर कारावास के साथ 99 हजार रुपए का जुर्माना, मैसर्स व्यंकटेश्वर ट्रेडर्स, इंदौर के मालिक कैलाश यादव को पांच वर्ष की कठोर कारावास के साथ कुल 15,000 रु. जुर्माना भी लगाया है। वहीं, मोहन यादव (निजी व्यक्ति) को पांच वर्ष की कठोर कारावास के साथ कुल 90,000 रु. जुर्माना लगाया है। मैसर्स माधव ट्रेडर्स इंदौर के मालिक संदीप यादव को पांच वर्ष की कठोर कारावास के साथ 15,000 रु. जुर्माना भी लगाया है।

वहीं, मैसर्स श्रीनाथ ट्रेडर्स, इंदौर के मालिक मनमोहन यादव को पांच वर्ष की कठोर कारावास के साथ 15,000 रु. जुर्माना लगाया है। मैसर्स श्रीराम ट्रेडर्स, इंदौर के मालिक दीपक यादव को पांच वर्ष की कठोर कारावास के साथ 15,000 रु. जुर्माना, मैसर्स चौधरी ग्रेन मर्चेंट, इंदौर के मालिक राकेश चौधरी को पांच वर्ष की कठोर कारावास के साथ 15,000 रु. जुर्माना, मैसर्स गणेश मार्केटिंग, इंदौर के मालिक अनिल पटेल को पांच वर्ष की कठोर कारावास के साथ 15,000 रु. जुर्माना एवं मैसर्स सांवरीवा ट्रेडर्स, इंदौर की प्रोपराइटर रजनी यादव को तीन वर्ष की कठोर कारावास के साथ 9,000 रु. जुर्माने की सजा सुनाई।

सीबीआई ने ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, इंदौर की शिकायत के आधार पर नरेश कुमार ग्रोवर, तत्कालीन मुख्य प्रबंधक, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, स्नेह नगर, शाखा इंदौर, मैसर्स व्यंकटेश्वर ट्रेडर्स, इंदौर के मालिक कैलाश यादव एवं 14 अन्य के विरुद्ध 30 मार्च 2011 को मामला दर्ज किया गया है। जिसमें आरोप है कि, एनके ग्रोवर, तत्कालीन मुख्य प्रबंधक ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर, 7 फर्मों को जाली वेयर हाउस रसीदों के विरुद्ध 8.1 करोड़ रु.(लगभग) की नकद साख सुविधाएं स्वीकृत की। उक्त ऋण,सीसी सुविधा के एवज में समानांतर सुरक्षा (Collateral Security) के रूप में गिरवी रखी गई भूमि के रिकॉर्ड भी झूठे और जाली पाए गए। जांच के बाद सीबीआई ने आरोपियों के विरुद्ध 09 अलग-अलग आरोप पत्र दायर किए। सुनवाई के बाद कोर्ट ने उक्त आरोपियों को कसूरवार पाया एवं उन्हें दोषी ठहराया।

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