भूमि विकास बैंक जमीन घोटाला मामले में बैंक अधिकारियों को तीन साल की सजा
भूमि विकास बैंक जमीन घोटाला मामले में बैंक अधिकारियों को तीन साल की सजासांकेतिक चित्र

भूमि विकास बैंक जमीन घोटाला मामले में बैंक अधिकारियों को तीन साल की सजा

भोपाल, मध्यप्रदेश : विशेष न्यायाधीश लोकायुक्त संगठन राजीव के पाल की अदालत ने जिला सहकारी कृषि एवं भूमि विकास बैंक के जमीन घोटाला मामले में बैंक अधिकारियों को तीन साल की सजा सुनाई।

भोपाल, मध्यप्रदेश। विशेष न्यायाधीश लोकायुक्त संगठन राजीव के पाल की अदालत ने जिला सहकारी कृषि एवं भूमि विकास बैंक के जमीन घोटाला मामले में एपीएस कुशवाहा सहकारिता विकास सहकारी निरिक्षक, हरिहर प्रसाद मिश्रा जिला सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक मर्यादित के तात्‍कालिक विक्रय अधिकारी अशोक मुखरैयाख, तात्‍कालिक प्रबंधक जगदीश लिटोरिया और तात्‍कालिक महाप्रबंधक बीएस वास्‍केल को दोषी ठहाते हुए तीन वर्ष सश्रम कारावास और आठ हजार रूपए के जुर्माने एवं नीलामी के जरिए जमीन खरीदने के आरोपी अख्‍खतर खान को तीन साल का सश्रम कारावास व 2 हजार रूपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।

अभियोजन के अनुसार 8 अगस्त 2007 को ग्राम रातापानी निवासी किसानों ने पुलिस में शिकायत की थी कि बैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों ने आपसी सांठ-गांठ से बैंक में किसानों की गिरवी रखी करोड़ों रुपए कीमत की जमीन को गलत नीलामी प्रक्रिया से सस्ते दाम पर बेच दिया है। वर्ष 2000-2007 के बीच भूमि विकास बैंक के अधिकारियों ने किसानों द्वारा बैंक में गिरवी रखी गयी जमीन को अवैध तरीके से नीलाम कर दिया गया था। किसानों ने अपनी जमीन अवैध रूप से बेचे जाने की शिकायत की थी। लेकिन जांच ऐजेंसी द्वारा भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ मामले की जांच करने में कोई रूचि नहीं दिखाई गई। इसके बाद एक ऋणी किसान ने मप्र हाइकोर्ट की जबलपुर खण्डपीठ में याचिका दायर थी, जिस पर हाइकोर्ट ने विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त संगठन भोपाल को मामले में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिये थे लोकायुक्त पुलिस ने मामले की जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ भारतीय दण्ड संहिता की धारा 420, 467, 471, 120 बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा-13 (1) ( डी) 13 ( 2) के तहत मामला दर्ज कर विशेष अदालत में चालान पेश किया था।

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