अमरकंटक में लाठी-बेसबॉल से दुकान में मारपीट करने वालों की जमानत खारिज
अनूपपुर, मध्य प्रदेश : लाठी-बेसबॉल से दुकान में मारपीट करने वाले आरोपियों के अपराध को गंभीर मानते हुए न्यायालय ने उनके जमानत के आवेदन को निरस्त कर दिया।
अमरकंटक में लाठी-बेसबॉल से दुकान में मारपीट करने वालों की जमानत खारिज
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हाइलाइट्स

  • दुकान में प्रवेश कर की थी आरोपीगणों ने मारपीट

  • दोनों आरोपी दिनांक 15 सितंबर से जेल में है

  • घटना अमरकंटक की 13 सितंबर की रात की

  • लाज की गेट में लगे सीसीटीवी कैमरे से आरोपीगणों की हुई थी पहचान

अनूपपुर, मध्य प्रदेश। न्यायालय श्रीमान् द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश महोदय राजेन्द्रग्राम अविनाश शर्मा के न्यायालय द्वारा आरोपी कान्हा नामदेव पिता लक्ष्मी प्रसाद नामदेव उम्र 24 वर्ष निवासी पेंड्रा रोड थाना, जिलां गौरेला मरवाही छत्तीसगढ़, सुहैल मंसूरी उम्र 25 वर्ष पिता सलीम मंसूरी निवासी गांधी चौक के पास वार्ड नं 5 गौरेला मरवाही छत्तीसगढ़ की ओर जेल से रिहाई हेतु लगाए गए जमानत आवेदन को खारिज कर दिया गया है। दोनों आरोपीगण पर थाना अमरकंटक में अपराध क्रंमाक 104/20 धारा 323, 452, 147, 148, 294, 506, 34 भारतीय दंड संहिता के तहत अपराध दर्ज है। प्रकरण में अभियोजन की ओर से जमानत याचिका का विरोध सहायक जिलां लोक अभियोजन अधिकारी सुश्री शशि धुर्वे द्वारा किया गया।

दुकान में की थी तोड़फोड़ :

मामले की जानकारी देते हुए मीडिया प्रभारी राकेश कुमार पाण्डेय ने बताया की आरोपीगण पर यह आरोप है कि उन्होंने 13 सितंबर की रात्रि 7 से 8 बजे के बीच फरियादी के अमरकंटक स्थिति दुकान में लाठी डंडे, बेसबॉल लेकर प्रवेश कर फरियादी लक्ष्मीचंद्र जैन के कर्मचारी चैन सिंह के साथ मारपीट, गली गलौच की, दुकान, की तोड़ फोड़ की बोल रहे थे, दुकान का मालिक कँहा है, उसे मार डालेंगे और दुकान से 16,500 रुपये निकाल लिए।

यह लिया था आधार :

आरोपी कान्हा ने अपने आवेदन में यह लिया आधार कि वह पेण्ड्रा रोड में स्थिति मनोहर बूट हाउस में काम करता है और अपने मालिक के निर्देश में वसूली हेतु अमरकंटक आया था, वाहन चेकिंग के दौरान पुलिस ने उसे पकड़कर उसके विरुद्ध झूठा मुकदमा बना दिया। आरोपी सुहैल ने यह आधार लिया कि वह घटना स्थल में घटना दिनांक को मौजूद ही नहीं था।

नजर अंदाज करने से समाज में अराजकता फैलेगी :

राज्य की ओर से लोक अभियोजन अधिकारी ने उक्त आधारों का घोर विरोध किया और न्यायलय को बताया कि, दोंनो आरोपीगणों की पहचान सीसीटीवी कैमरे से होने के बाद और फरियादी/ साक्षी से पहचान होने के बाद ही गिरफ्तार किया गया है, आरोपीगणों का कानून का कोई भय नही है, जमानत देने पर ये मामले के साक्ष्यों को प्रभावित कर सकते है दोनों पक्ष को सुनने के बाद माननीय न्यायालय ने अपने आदेश में यह लेख करते हुए (की सीसीटीवी फुटेज और अन्य दस्तावेजो से आरोपियों की अपराध में संलिप्तता दर्शित होती है, एक साथ कई लोग रात में घुसकर अपराध को अंजाम दिए हैं, यदि ऐसी घटनाओं को नजर अंदाज किया गया तो समाज मे अराजकता फैलेगी, ओर कोई भी व्यक्ति अपना स्वयं का व्यवसाय नहीं कर पायेगा, अभियुक्तगण का कार्य गंभीर है इसलिए यह न्यायालय उनके जमानत के आवेदन को खारिज करती है), जमानत आवेदन खारिज कर दिया।

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