इंदौर के ट्रिपल मर्डर मामला फिर पहुंचेगा सुप्रीम कोर्ट
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इंदौर का ट्रिपल मर्डर मामला फिर पहुंचेगा सुप्रीम कोर्ट, शासन दायर करेगा रिव्यू याचिका

इंदौर, मध्यप्रदेश : इंदौर के श्रीनगर क्षेत्र में हुआ ट्रिपल मर्डर मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचेगा। शासन सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू याचिका दायर कर फांसी की सजा को बरकरार रखने की गुहार लगाएगा।

इंदौर, मध्यप्रदेश। इंदौर के श्रीनगर क्षेत्र में हुआ ट्रिपल मर्डर मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचेगा। इंदौर में जून 2011 में तीन महिलाओं की हत्या की गई थी। हत्या नानी, मां और बेटी की हुई थी। इसे अंजाम ब्यूटीशियन नेहा वर्मा और उसके दोस्तों ने दिया था। जिला कोर्ट ने तीनों हत्यारों को फांसी की सजा सुनाई थी। मप्र हाई कोर्ट ने भी इस फैसले पर मुहर लगा दी थी लेकिन पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले में संशोधन करते हुए फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया था। अब शासन सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू याचिका दायर कर फांसी की सजा को बरकरार रखने की गुहार लगाएगा।

11 साल पहले की थी हत्या :

19 जून 2011 को इंदौर के श्रीनगर क्षेत्र में देशपांडे परिवार की तीन महिलाओं मां मेघा, बेटी अश्लेषा और नानी रोहिणी की हत्या कर दी गई थी। लंबी जांच के बाद पुलिस ने इस मामले में नेहा पुत्री अनिल वर्मा निवासी देवेंद्र नगर, राहुल उर्फ गोविंदा निवासी घनश्यामदास नगर, मनोज पुत्र नानूराम अटोदे निवासी विद्या नगर को हिरासत में लिया था। जांच में यह बात सामने आई थी कि नेहा ने जून 2011 में एबी रोड के एक माल में मेघा से दोस्ती की थी। मेघा के गले में सोने का हार, चूड़ी, और अन्य आभूषण देखकर वह समझ गई थी कि वह समृद्ध परिवार से है। उसने मेघा से जान पहचान बढ़ाई और उसके घर आना-जाना शुरू कर दिया। नेहा ने मेघा के अमीर होने और उससे दोस्ती बढ़ाने की बात अपने प्रेमी राहुल को भी दी। राहुल ने नेहा के साथ मिलकर देशपांडे परिवार को लूटने की योजना बनाई। राहुल ने अपने दोस्त मनोज को भी साथ ले लिया।

ऊंचे सपने, लग्जरी लाईफ की थी चाहत :

नेहा के शुरू से ही ऊंचे सपने रहें है साथ ही लग्जरी लाईफ की भी चाहत थी, इसको अंजाम देने के लिए तिहरे हत्याकांड को अंजाम दिया था।

एटीएम से पैसे निकालते वक्त धरी गयी थी :

मृतका के एटीएम से पैसे निकालते वक्त नेहा पकड़ में आई थी। इसके बाद पुलिस ने उसके अन्य साथियों को गिरफ्तार कर लिया था। इंदौर जिला कोर्ट ने दिसंबर 2013 में इन्हें दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। इसके बाद आरोपियों ने हाईकोर्ट का रूख किया था। 2014 में एमपी हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने भी निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा । इसके बाद तीनों सुप्रीम कोर्ट गए थे, जहां से राहत मिली थी।

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