इंदौर : रिश्वत मामले में प्रधान आरक्षक को 4 साल की सजा
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इंदौर : रिश्वत मामले में प्रधान आरक्षक को 4 साल की सजा

भ्रष्ट्राचार मामले में कोर्ट ने दिए अपने एक निर्णय में टिप्पणी करते हुए गहरी चिंता जताते हुए, कहां महामारी को दूर करने की पूरी संभावना है, लेकिन भारत आजादी के बाद से भ्रष्टाचार वायरस से पीड़ित है?

इंदौर, मध्य प्रदेश। भ्रष्ट्राचार मामले में कोर्ट ने दिए अपने एक निर्णय में टिप्पणी करते हुए गहरी चिंता जताते हुए, कहां महामारी को दूर करने की पूरी संभावना है, लेकिन भारत आजादी के बाद से भ्रष्टाचार वायरस से पीड़ित है?

सात साल पहले लोकायुक्त कार्रवाई में 15 हजार की रिश्वत लेते किशनगंज थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक को विशेष न्यायाधीश ने चार वर्ष सश्रम कारावास एवं 30 हजार रुपए अर्थदंड से दंडित किया। शासन की ओर से पैरवी कर रहीं ज्योति गुप्ता ने बताया विशेष न्यायाधीश विकास शर्मा ने प्रधान आरक्षक रामहंस थाना किशनगंज को भ्रष्ट्राचार निवारण अधिनियम की धारा में दोषी पाते हुए यह सजा सुनाई। जिला लोक अभियोजन अधिकारी मो. अकरम शेख द्वारा बताया कि विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत गठित न्यायालय इंदौर द्वारा वि. प्रकरण क्रमांक 03/2015 विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त इंदौर विरूद्ध रामहंस को धारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 में 4 साल की सजा सुनाई।

यह था मामला :

घटना 8 मार्च 2014 की है। नीलेश ठाकुर उसके मामा एवं रवि की के साथ राकेश एवं मुकेश जाटवा के बीेच में मारपीट की घटना हुई थी, जिसके संबंध में आवेदन थाना किशनगंज पर राकेश जाटवा द्वारा दिया गया था, जिसकी जॉच थाना किशनगंज पर पदस्थ प्रधान आरक्षक रामहंस द्वारा की जा रही थी। रामहंस ने आवेदक एवं उसके मामा व रवि कौशल के खिलाफ हुई शिकायत में राजीनामा करवाने एवं शिकायत को फाईल करने के लिये 30 हजार रूपये की मांग की थी, तद्पश्चात 15 हजार रूपये रिश्वत आरोपी रामहंस को देने की बात तय हुई थी, जिसकी शिकायत नीलेश ठाकुर व्दारा लोकायुक्त कार्यालय इंदौर में की गयी थी लोकायुक्त टेप दल द्वारा कार्यवाही करते हुऐ रामहंस की टेबल से 15 हजार रूपये कीे राशि बरामद की गयी थी।

पुलिस लोकायुक्त द्वारा विवेचना उपरांत अभियोग पत्र सक्षम न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था। उक्त प्रकरण में अभियोजन साक्षीगणों का परीक्षण करवाकर लिखित अंतिम तर्क न्यायदृष्टांतों सहित प्रस्तुत किये गये जिस पर माननीय न्यायालय व्दारा सहमत होते हुऐ अभियुक्त को उक्त धाराओं में दंडित किया गया।

न्यायालय ने अपने निर्णय में की टिप्पणी :

न्यायालय द्वारा अपने निर्णय में भ्रष्टाचार के संबंध में यह भी टिप्पणी की गई कि पूरा देश महामारी यानी कोरोना वायरस से पीड़ित है। निकट भविष्य में ऐसे महामारी को दूर करने की पूरी संभावना है, लेकिन भारत आजादी के बाद से भ्रष्टाचार वायरस से पीड़ित है और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में विभिन्न संशोधनों के बावजूद हालत अभी भी खराब है और भ्रष्टाचार वायरस 70 से अधिक वर्षों के बाद भी बना हुआ है, और हम भारत के लोग हम आज कहाँ खड़े हैं?

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