पति से अवैध संबंध के संदेह पर की हत्या
पति से अवैध संबंध के संदेह पर की हत्या|Social Media
क्राइम एक्सप्रेस

बुढ़ार : पति से अवैध संबंध के संदेह पर की हत्या

शहडोल, मध्य प्रदेश : बुढ़ार न्यायालय के अतिरिक्त अपर सत्र न्यायालय द्वारा हत्या की आरोपी रोशनी केवट पति हीरालाल केवट ग्राम पाड़खेर थाना बुढ़ार का जमानत आवेदन पत्र निरस्त कर दिया।

Afsar Khan

शहडोल, मध्य प्रदेश। बुढ़ार न्यायालय के अतिरिक्त अपर सत्र न्यायालय द्वारा हत्या की आरोपी रोशनी केवट पति हीरालाल केवट ग्राम पाड़खेर थाना बुढ़ार का जमानत आवेदन पत्र निरस्त कर दिया। शासन की ओर से प्रकरण में पैरवी करते हुए आर. के. रावत, अतिरिक्त जिला लोक अभियोजन अधिकारी बुढ़ार द्वारा जमानत का सशक्त विरोध किया गया।

रोशनी से रखती थी रंजिश :

संभागीय जनसंपर्क अधिकारी अभियोज नवीन कुमार वर्मा ने बताया कि प्रथम सूचना रिपोर्ट अनुसार 04 जुलाई को 100 डायल को सूचना प्राप्त हुई कि एक महिला का शव पाड़खेर डोंगरी के नीचे खिलाड़ी केवट के खेत में जमीन पर पड़ा है। फरियादी रामनारायण केवट पिता बब्बू केवट के द्वारा इस आशय की रिपार्ट दर्ज कराई गई थी कि वह ग्राम पाड़खेर का रहने वाला है। खेती किसानी का काम करता है, उसकी पत्नि ललिता केवट से गांव के ही रहने वाले हीरालाल केवट की पत्नी रोशनी केवट रंजिश रखती थी और शक करती थी कि ललिता केवट का अवैध संबंध उसके पति के साथ है, इस कारण वह उसकी पत्नि के साथ अक्सर विवाद करती थी।

टांगी से किया था वार :

04 जुलाई को करीब 07 बजे सुबह घर से फरियादी की पत्नी डिब्बा लेकर निस्तार के लिए डोंगरी तरफ गई थी, तब करीब 07:30 बजे सुनील केवट उसके घर पर आकर बताया कि डोंगरी के तरफ ललिता केवट की 'बचाओ बचाओ' की आवाज आ रही है। रोशनी भी डोंगरी तरफ टांगी लेकर जाती दिखी है। तब फरियादी अपनी मां आशाबाई के साथ दौड़कर जाकर देखा कि रोशनी केवट लोहे की टांगी हाथ में रखकर खिलाडी के खेत तरफ से आ रही थी। खेत में जाकर देखा तो उसकी पत्नि के सिर और गले पर चोट के निशान थे। सूचना पर आरोपी के विरूद्ध थाना बुढार में धारा 302 भादवि का अपराध पंजीबद्ध किया गया।

भेजा जेल :

आरोपिया द्वारा न्यायालय के समक्ष उपस्थित होकर जमानत याचिका प्रस्तुत किया गया। जिसका विरोध करते हुये अभियोजन की ओर से आपत्ति की गई कि आरोपिया द्वारा किया गया अपराध संगीन है, यदि उसे जमानत का लाभ दिया जाता है तो उसके फरार होने, साक्ष्य को प्रभावित करने की पूर्ण संभावना है। अत: न्यायहित में आरोपिया को जमानत का लाभ दिया जाना उचित नहीं है। न्यायालय द्वारा अभियोजन के द्वारा प्रस्तुत तर्कों पर विचार करते हुए एवं अपराध की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए हत्या की आरोपी रोशनी की जमानत याचिका खारिज करते हुए जेल भेज दिया।

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