पुलिस थाना जयंत
पुलिस थाना जयंत|Shashikant Kushwaha
क्राइम एक्सप्रेस

सिंगरौली : बाल दुर्व्यवहार करने वाले आरोपी को पुलिस ने बचाया

सिंगरौली, मध्य प्रदेश : पुलिस के द्वारा बाल दुर्व्यवहार के गंभीर मामले पर की गई लीपा पोती, वीडियो वायरल होने से पुलिस की कार्यवाही पर सवाल हुए खड़े।

Shashikant Kushwaha

सिंगरौली, मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में पुलिस की छवि को धूमिल हुई है बजाय मामला पंजीबद्ध करने के पुलिस ने दोनों पक्ष के मध्य समझौता करा दिया है। वहीं आरोपी युवक पर नाममात्र की कार्यवाही कर मामला दबा दिया गया। शोसल मीडिया में वायरल वीडियो से संबंधित मामला मीडिया के संज्ञान में आने के बाद पीड़ित परिवार से मिलकर घटना की जानकारी प्राप्त करनी चाही।

जाने पूरा मामला :

सिंगरौली जिले का थाना विन्ध्यनगर की जयंत पुलिस चौकी के क्षेत्र में रहने वाले दो परिवारों के बीच कहासुनी हो गई, विवाद बढ़ता देख किसी ने डायल 100 को सूचना दे दी। तत्पश्चात मौके पर पहुची डायल 100 दोनों परिवार को जयंत पुलिस चौकी ले गई।

वायरल वीडियो से पुलिस की भूमिका संदिग्ध :

संबंधित मामले में वायरल वीडियो के अनुसार जयंत पुलिस कार्यवाही करने की बजाय दोनों परिवार के बीच आपसी समझौता करा दिया है। इसके साथ ही आरोपी सहित परिवार को मकान खाली कर अन्य जगह जाने का फरमान जारी किया गया है वहीं अबोध बालक के साथ हुए बाल दुर्व्यवहार की बात को पीड़ित परिवार के लोगों ने मीडिया के कैमरे में कहने की बात से इंकार कर दिया एवं घटना के संबंध में वायरल वीडियो पर हुई बातों पर गौर करें तो मामले की पुष्टि होती है इसके साथ ही जाँच के उपरांत कुछ कह पाना उचित होगा।

क्या होता है बाल दुर्व्यवहार :

बच्चों के साथ शारीरिक, मानसिक, यौनिक अथवा भावनात्मक स्तर पर किया जाने वाला दुर्व्यवहार बाल दुर्व्यवहार कहलाता है। हालाँकि हम बाल दुर्व्यवहार में सामान्यतः यौनिक एवं शारीरिक शोषण को ही शोषण समझाते हैं, जबकि मानसिक तथा भावनात्मक स्तर पर होने वाला शोषण भी बच्चों के मानस पर दीर्घकालिक प्रभाव डालता है। अक्सर इसमें शामिल व्यक्ति हमारे आस-पास के रिश्तेदार, मित्र, पड़ोसी होते हैं, जिनकी हरकतों से उनके कृत्य का पता लगाना कठिन होता है।बाल अधिकारों की रक्षा के लिये ‘संयुक्त राष्ट्र का बाल अधिकार कन्वेंशन (CRC)’ एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है, जो सदस्य देशों को कानूनी रूप से बाल अधिकारों की रक्षा के लिये बाध्य करता है।

भारत में बाल यौन शोषण एवं दुर्व्यवहार के खि़लाफ सबसे प्रमुख कानून 2012 में पारित यौन अपराध के खि़लाफ बच्चों का संरक्षण कानून (POCSO) है। इसमें अपराधों को चिह्नित कर उनके लिये सख्त सजा निर्धारित की गई है। साथ ही त्वरित सुनवाई के लिये स्पेशल कोर्ट का भी प्रावधान है।

पुलिस कप्तान ने कहा :

सम्बंधित मामले पर चर्चा करते हुए सिंगरौली जिला पुलिस कप्तान ने स्पष्ट तौर पर कड़े स्वर में कहा कि मामले की जाँच कराने के उपरांत तथ्यों के आधार पर कार्यवाही की जाएगी।

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