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रिव्यू- बाल मजदूरी की समस्या को दर्शाती है फिल्म 'झलकी'
रिव्यू- बाल मजदूरी की समस्या को दर्शाती है फिल्म 'झलकी'|Sudha Choubey - RE
मनोरंजन

रिव्यू- बाल मजदूरी की समस्या को दर्शाती है फिल्म 'झलकी'

बाल मजदूरी की समस्या पर आधारित फिल्म 'झलकी' आज सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। यह फिल्म अब तक 14 फेस्टिवल्स में दिखाई जा चुकी है।

Pankaj Pandey

Pankaj Pandey

फिल्म से जुड़ी जानकारी :

फिल्म- झलकी

स्टारकास्ट- आरती झा, गोविंद नामदेव, संजय सूरी, दिव्या दत्ता, बोमन इरानी

डायरेक्टर- ब्रह्मानंद सिंह

प्रोड्यूसर- ब्रह्मानंद सिंह, आनंद चव्हाण

रेटिंग- 3.5 स्टार

राज एक्सप्रेस। बाल मजदूरी की समस्या पर आधारित फिल्म 'झलकी' आज सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। यह फिल्म अब तक 14 फेस्टिवल्स में दिखाई जा चुकी है और फिल्म को 13 पुरूष्कार भी मिल चुके हैं। कैसी है फिल्म चलिये जानते हैं।

स्टोरी :

फिल्म की कहानी झलकी (आरती झा) की है। झलकी के छोटे भाई बाबू को गांव में रहने वाला रामप्रसाद (गोविंद नामदेव) अपने साथ मिर्ज़ापुर शहर ले जाता है, जिसके बाद झलकी अपने भाई की तलाश में जुट जाती है। मिर्ज़ापुर शहर पहुंचकर झलकी कलेक्टर संजय भारतीय (संजय सूरी) से मिलती है, लेकिन कलेक्टर भी झलकी की मदद करने से इंकार कर देता है। अब झलकी कैसे अपने खोए हुए भाई को खोजेगी और क्या वो अपने इस मिशन में सफल हो पाएगी। इस सवाल का जवाब आपको फिल्म देखने के बाद पता चलेगा।

डायरेक्शन :

फिल्म को डायरेक्ट ब्रह्मानंद सिंह ने किया है और फिल्म देखने के बाद आसानी से हम कह सकते हैं कि, ब्रह्मानंद सिंह का डायरेक्शन बढ़िया है। फिल्म की स्टोरी बढ़िया है। फिल्म का स्क्रीनप्ले कुछ-कुछ जगहों पर थोड़ा कमजोर है, लेकिन सिनेमेटोग्राफी ठीक है। फिल्म की एडिटिंग भी ठीक है। फिल्म का म्यूजिक भी बढ़िया बन पड़ा है।

परफॉर्मेंस :

परफॉर्मेंस की बात करें तो आरती झा ने झलकी के किरदार में जान भर दी है। संजय सूरी और दिव्या दत्ता का भी काम सराहनीय है। गोविंद नामदेव और अखिलेंद्र मिश्रा ने किरदार के साथ इंसाफ किया है। बोमन ईरानी और तनिष्ठा मुखर्जी ने भी अपने छोटे से रोल को बढ़िया से निभाया है। फिल्म के बाकी कलाकारों ने भी ठीक-ठाक काम किया है।

क्यों देखें :

इस फ़िल्म को देखने की कई वजहें हैं। सबसे पहली वजह यह है कि, यह फिल्म आपको एक खूबसूरत मैसेज देती है। यह फिल्म आपको बताती है कि, कम उम्र के बच्चों से काम करवाकर उनका बचपन खराब ना करें। इसके अलावा यह भी बताती है कि, अगर बच्चों का बचपन सुरक्षित रहेगा, तो ही वो पढ़ लिखकर जीवन में आगे बढ़ पाएंगे इसलिए यह फिल्म बिल्कुल भी मिस ना करें।

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