पृथ्वीराज कपूर बर्थडे
पृथ्वीराज कपूर बर्थडेSyed Dabeer Hussain - RE

हिंदी फिल्म सिनेमा के भीष्म पिता कहलाते थे पृथ्वीराज कपूर, रखी थी पृथ्वी थिएटर की नींव

हिंदी सिनेमा के भीष्म पितामह कहलाने वाले पृथ्वीराज कपूर की आज जन्म जयंती है। अभिनय में अपने महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें कई बड़े अवार्ड्स से भी सम्मानित किया गया।

राज एक्सप्रेस। जब कभी हिंदी फिल्म सिनेमा के सबसे बेहतरीन कलाकारों का जिक्र होता है, तो उनमें पृथ्वीराज कपूर का नाम सबसे ऊपर आता है। उन्होंने फिल्म और रंगमंच की दुनिया में वह मुकाम हासिल किया, जहां तक पहुंचना किसी भी कलाकार के लिए आसान नहीं है। मूक फिल्मों के साथ अपने अभिनय सफ़र की शुरुआत करने के बाद वे रंगीन फिल्मों में भी अपनी अदाकारी के चलते छाए रहे है। पृथ्वीराज कपूर का जन्म आज ही के दिन यानि 3 नवम्बर 1906 को समुंद्री में हुआ था। अपने अभिनय के चलते ही लोग उन्हें बॉलीवुड का गॉड फादर यानि भीष्म पितामह कहते थे। आज इस खास मौके पर चलिए जानते हैं उनके बारे में कुछ खास बातें।

मूक फिल्मों में भी किया है काम :

पृथ्वीराज कपूर के अभिनय सफर की शुरुआत पेशावर के एक थिएटर ग्रुप से हुई थी। कुछ समय एक्टिंग सीखने के बाद साल 1928 के दौरान वे मुंबई आ गए। यहाँ आने के बाद उन्होंने इम्पीरियल थिएटर को ज्वाइन किया। इस दौरान पृथ्वीराज कपूर ने नौ मूक फिल्मों में भी काम किया। जिसके बाद साल 1931 में उनकी झोली में फिल्म ‘आलमआरा’ आई, जिसमें उन्होंने जवानी से लेकर बुढ़ापे तक की भूमिका निभाई थी।

बनाया पृथ्वी थिएटर :

हिंदी फिल्म सिनेमा की बड़ी फिल्मों जैसे सिकंदर, मुगल ए आजम आदि में पृथ्वीराज कपूर ने अपने अभिनय की मिसाल पेश की। इसके बाद साल 1944 के दौरान अभिनेता ने मुंबई में भारत को पहले कमर्शियल स्टूडियो ‘पृथ्वी थिएटर’ की नींव रखी। इस थिएटर को बनाने में उन्होंने अपनी पूरी जमा पूँजी लगा दी। 16 साल तक चले इस थिएटर में कुल 2662 परफॉर्मेंस हुईं।

'मुगल-ए-आजम' के लिए मिली 1 रुपए फीस :

साल 1960 के दौरान आई फिल्म 'मुगल-ए-आजम' में पृथ्वीराज कपूर ने मुगल शासक अकबर का किरदार निभाया था। इस फिल्म के लिए आसिफ ने अभिनेता को एक ब्लैंक चेक देकर कहा कि वे जितनी चाहे उतनी फीस ले सकते हैं। इसका जवाब देते हुए पृथ्वीराज कपूर ने फीस के रूप में महज 1 रुपया लिया।

फिल्म इंडस्ट्री में पृथ्वीराज कपूर को उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें साल 1968 में पद्मभूषण से सम्मानित किया था। जिसके बाद साल 1971 में अभिनेता को दादा साहब फाल्के अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया।

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