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Merit Animal Review : बढ़िया संदेश देती है फिल्म मेरिट एनिमल

कई सारे नेशनल एंड इंटरनेशनल अवार्ड्स अपने नाम कर चुकी और कई फेस्टिवल्स में जलवा बिखेर चुकी फिल्म मेरिट एनिमल डिजिटल प्लेटफार्म हंगामा प्ले पर रिलीज हो चुकी है। कैसी है फिल्म चलिए आपको बताते हैं।
मेरिट एनिमल(2.5 / 5)

स्टार कास्ट - आदित्य सिंघल, रीना जाधव, बहार उल इस्लाम

डायरेक्टर - जुनैद इमाम

प्रोड्यूसर - प्रदीप देशमुख, रीना जाधव

स्टोरी :

फिल्म में दिखाया गया है कि मुंबई शहर से दूर एक जगह पर साइकिल प्रतिस्पर्धा हो रही है और उस स्पर्धा में शामिल सोलह वर्षीय वरुण (आदित्य सिंघल) अचानक गायब हो जाता है। वरुण के माता-पिता और पुलिस उसकी खोज में लगी हुई है। शहर से दूर बसे एक गांव में रहने वाले एक गरीब दंपत्ति मीरा और मोहनदास को वरुण बेहोश हालत में मिलता है। गरीब दंपत्ति वरुण को अपने घर ले जाता है। वो उसका ख्याल रखता है और जब वरुण को होश आता है तो वो वरुण से उसके घर का पता पूछता है लेकिन वरुण बोलता है कि उसे कुछ याद नहीं है। गरीब दंपत्ति अपने गांव के सरपंच के पास जाता है और वरुण के बारे में बताता है। सरपंच यह सलाह देता है कि वो गांव के किसी व्यक्ति को शहर के पुलिस स्टेशन भेजेगा और सूचना देगा कि गांव में वरुण नाम का एक बच्चा है। फिर उसके बाद पुलिस वरुण के पैरेंट्स को ढूंढ़कर लाएगी और वरुण को उसके पैरेंट्स को सौंप देगी। अब क्या शहर में रहने वाला वरुण गांव में अच्छे से रह पाएगा और क्या वो दोबारा अपने शहर लौटेगा। इन सवालों के जवाब जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।

डायरेक्शन :

फिल्म को डायरेक्ट जुनैद इमाम ने किया है और उनका डायरेक्शन काफी कमजोर है। फिल्म का कॉन्सेप्ट काफी अच्छा है लेकिन स्क्रीनप्ले काफी ढीला है। फिल्म की सिनेमेटोग्राफी ठीक है। फिल्म के गाने फिल्म की कहानी को आगे बढ़ाते हैं। फिल्म की प्रोडक्शन वैल्यू भी ठीक है।

परफॉर्मेंस :

फिल्म में मीरा का किरदार निभाने वाली एक्ट्रेस रीना जाधव की परफॉर्मेंस ठीक है। महेश घाग ने भी ठीक ही काम किया है। आदित्य सिंघल ने भी सराहनीय काम किया है। बहार उल इस्लाम और भाग्यरति बाई कदम ने भी ठीक-ठाक काम किया है। मंगेश नाइक ने भी औसत दर्जे का काम किया है। फिल्म के बाकी कलाकारों का काम भी औसत दर्जे का है।

क्यों देखें :

फिल्म मेरिट एनिमल यह बताती है कि आज कल के पैरेंट्स खुद के सपनों को पूरा करने करने के लिए बच्चों पर क्लास में फर्स्ट आने का दबाव डालते हैं जो कि काफी गलत है। पैरेंट्स यह भूल जाते हैं कि उनके इस दबाव के कारण उनका बच्चा मानसिक तौर पर काफी दवाब महसूस करता है और जिसकी वजह से वो अपना बचपन एंजॉय नहीं कर पाता है। इसलिए सभी पैरेंट्स को चाहिए कि वो बच्चों पर हमेशा मेरिट में आने का प्रेशर न डाले और बच्चों को एक इंसान की तरह ट्रीट करे न कि एक एनिमल की तरह। अगर आप भी इस तरह की संदेश देने वाली फिल्में देखना पसंद करते हैं तो यह फिल्म एक बार तो देख ही सकते हैं।

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