रिव्यू : गरीब औरतों की दुर्दशा दिखाती है फीड और ब्लीड इंडिया
रिव्यू : गरीब औरतों की दुर्दशा दिखाती है फीड और ब्लीड इंडियाSocial Media

रिव्यू : गरीब औरतों की दुर्दशा दिखाती है फीड और ब्लीड इंडिया

लेखक-निर्देशक सुशील जांगीरा की डॉक्यूमेंटरी फिल्म फीड और ब्लीड इंडिया भारत की सड़कों पर रहने वाली बेहद गरीब और भिखारी औरतों और उनकी मासिक धर्म से जुड़ी दीनदशा के बारे में ध्यान आकर्षित करती है।

फिल्म - फीड और ब्लीड इंडिया

लेखक -निर्देशक : सुशील जांगीरा

बैनर : सेकण्डओक्ट एंटरटेनमेंट

वितरक : शेमारू यू ट्यूब

अवधि : 15 मिनट

रेटिंग : 3 स्टार

राज एक्सप्रेस। शार्ट फिल्में इन दिनों कई महत्वपूर्ण विषयों पर गहरा असर छोड़ती हैं। मासिक धर्म और सेनेटरी पैड पर कई फिल्में बनी हैं लेकिन लेखक-निर्देशक सुशील जांगीरा की डॉक्यूमेंटरी फिल्म फीड और ब्लीड इंडिया भारत की सड़कों पर रहने वाली बेहद गरीब और भिखारी औरतों और उनकी मासिक धर्म (पीरियड) से जुड़ी दीनदशा के बारे में ध्यान आकर्षित करती है। इसमें ज्वलंत प्रश्न उठाया गया है है कि अगर हम उन्हें एक सेनेटरी पैड दें या रोटी दें तो वो इनमें से पहले क्या उठाएंगी ?

सुशील जांगीरा की इस शार्ट फिल्म की दो ख़ास बात है कि यह फिल्म वास्तविक धरातल पर समस्या से जुड़े लोगों की व्यथा उनके शब्दों में कहती है। फिल्म में किसी भी नाटकीयता या फिक्शन का सहारा नहीं लिया गया है। साथ ही हम देखते हैं कि मुंबई, दिल्ली और अमृतसर शहर कोई भी हो लेकिन सड़क पर रहने वाली औरत की दशा एक जैसी है।

पंद्रह मिनट के फिल्म की एक ख़ास बात यह भी है कि फिल्म में एक बेहद ख़ूबसूरत गीत है। यह बेहद ही पारंपरिक सरल शब्दों में फिल्म की कहानी को संगीतमय तरीके से दोहराती है। फिल्म में फिक्शन नहीं है इसलिए किरदार पूरी तरह वास्तविक है। फिल्म की सिनेमेटोग्राफी और एडिट दोनों ही बहुत नेचुरल है इसलिए यह शार्ट फिल्म वास्तविक समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करने में सफल रही है।

दुनिया के कई फिल्म महोत्सवों में दर्शकों और क्रिटिक्स ने फिल्म को बहुत सराहा है। अब यह फिल्म शेमारू यूट्यूब के चैनल के माध्यम से काफी दर्शकों तक पहुंचेगी।

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