CBSE Board 12th 2021 Exam : कोरोना का बुरा असर, रद्द करनी पड़ी बोर्ड परीक्षा
CBSE Board 12th 2021 Exam : कोरोना का बुरा असर, रद्द करनी पड़ी बोर्ड परीक्षाSocial Media

CBSE Board 12th 2021 Exam : कोरोना का बुरा असर, रद्द करनी पड़ी बोर्ड परीक्षा

देश के वर्तमान हालातों के मद्देनजर 12वीं CBSE बोर्ड परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला किया गया है। इस मामले में देश के प्रधानमंत्री ने स्वयं घोषणा कर जानकारी दी है।

CBSE Board 12th 2021 Exam : आज देश कोरोना महामारी जैसी बहुत बड़ी समस्या से जूझ रहा है। देश में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। कोरोना से संक्रमित लोगों का प्रतिदिन का आंकड़ा भी लाखों में सामने आरहा है। ऐसे में देश में पिछले कुछ समय में बहुत से ऐसे जरूरी कामों को भी रोक दिया गया, जिनका रुकना पिछले कई सालों में किसी भी हाल में मुश्किल ही था। चाहे वो रेलवे सेवाएं हो या वहीं विद्यार्थियों की परीक्षा। वहीं, अब देश के वर्तमान हालातों के मद्देनजर 12वीं CBSE बोर्ड परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला किया है। इस मामले में देश के प्रधानमंत्री ने स्वयं घोषणा कर जानकारी दी है।

प्रधानमंत्री ने स्वयं की घोषणा :

दरअसल, देश में अब कोरोना के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे है, ऐसे में 12वीं CBSE बोर्ड परीक्षा का आयोजन करना छात्रों की जान को खतरे में डालने से कम नहीं है, लेकिन 12वीं बोर्ड की परीक्षा अहम मानी जाती है। इसलिए ही इसके आयोजन को लेकर आज पधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक अहम बैठक बुलाई। इस मीटिंग में बेहद खास लोगों के बीच इस मामले पर चर्चा की गई। इस बैठक के खत्म होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं अपने ट्विटर अकाउंट द्वारा ट्वीट कर घोषणा करते हुए लिखा कि,

'भारत सरकार ने बारहवीं कक्षा की सीबीएसई बोर्ड परीक्षा रद्द करने का फैसला किया है। व्यापक विचार-विमर्श के बाद, हमने एक निर्णय लिया है जो छात्रों के अनुकूल है, जो हमारे युवाओं के स्वास्थ्य के साथ-साथ भविष्य की रक्षा करता है।'
नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

निशंक करने वाले थे घोषणा :

बताते चलें, केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक 23 मई को आयोजित हुई उच्च स्तरीय बैठक में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ चर्चा करने के बाद मंगलवार की सुबह 11 बजे 12वीं बोर्ड परीक्षाओं को लेकर घोषणा करने वाले थे, लेकिन उनके कोरोना से ग्रसित होने के बाद उनकी तबियत बिगड़ने के कारण उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया। इसके कारण वह इस पर कोई घोषणा नहीं कर सके उसके बाद आज PM मोदी द्वारा की गई बैठक में चर्चा के बाद 12वीं की परीक्षा रद्द करने का ऐलान किया गया। बता दें, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई इस बैठक में CBSE के चेयरमैन, शिक्षा मंत्रालय के सेक्रेटरी के अलावा केंद्रीय मंत्री अमित शाह, निर्मला सीतारमण, पीयूष गोयल, धर्मेंद्र प्रधान, राजनाथ सिंह और प्रकाश जावड़ेकर शामिल हुए।

परीक्षा देने के इच्छुक छात्र :

बताते चलें, इन 12वीं की परीक्षा रद्द होने के बाद भी यदि कुछ छात्र परीक्षा देने के इच्छुक हैं तो, वह स्थिति अनुकूल होने पर परीक्षा दे सकते हैं। CBSE द्वारा द्वारा जारी की गई प्रेस रिलीज में यह विकप्ल भी रखा गया है। बता दें, इस साल CBSE की 12वीं कक्षा की परीक्षा में लगभग 14.5 लाख छात्र भाग लेने वाले थे, लेकिन प्रधानमंत्री ने CBSE की 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं के संबंध में एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। अधिकारियों ने अब तक हुए व्यापक और व्यापक परामर्श और राज्य सरकारों सहित सभी हितधारकों से प्राप्त विचारों पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी। उसके बाद अंतिम फैसला लिया गया।

बैठक की मुख्य बातें :

  • कक्षा 12वीं के परिणाम समयबद्ध तरीके से एक अच्छी तरह से परिभाषित उद्देश्य मानदंड के अनुसार किए जाएंगे।

  • कक्षा 12वीं CBSE परीक्षाओं पर निर्णय छात्रों के हित में लिया गया है : PM

  • हमारे छात्रों के स्वास्थ्य और सुरक्षा का है अत्यंत महत्व और इस पहलू पर कोई समझौता नहीं होगा: PM

  • छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच चिंता, जिसे समाप्त किया जाना चाहिए : PM

  • छात्रों को ऐसी तनावपूर्ण स्थिति में परीक्षा देने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए: PM

  • सभी हितधारकों को चाहिए छात्रों के प्रति संवेदनशीलता दिखाएं : PM

प्रधानमंत्री का कहना :

प्रधानमंत्री ने कहा कि, 'CBSE की 12वीं की परीक्षा पर फैसला छात्रों के हित में लिया गया है। कोविड-19 ने अकादमिक कैलेंडर को प्रभावित किया है और बोर्ड परीक्षाओं का मुद्दा छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों में अत्यधिक चिंता पैदा कर रहा है, जिसे समाप्त किया जाना चाहिए। देश भर में कोविड की स्थिति एक गतिशील स्थिति है। जबकि देश में संख्या कम हो रही है और कुछ राज्य प्रभावी सूक्ष्म-नियंत्रण के माध्यम से स्थिति का प्रबंधन कर रहे हैं, कुछ राज्यों ने अभी भी तालाबंदी का विकल्प चुना है। ऐसे में छात्रों के स्वास्थ्य को लेकर छात्र, अभिभावक और शिक्षक स्वाभाविक रूप से चिंतित हैं। ऐसी तनावपूर्ण स्थिति में छात्रों को परीक्षा में बैठने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। हमारे छात्रों के स्वास्थ्य और सुरक्षा का अत्यधिक महत्व है और इस पहलू पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। आज के समय में इस तरह की परीक्षाएं हमारे युवाओं को जोखिम में डालने का कारण नहीं हो सकती हैं। सभी हितधारकों को छात्रों के प्रति संवेदनशीलता दिखाने की जरूरत है।'

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