CBSE बोर्ड परीक्षाएं रुकवाने हेतु 300 छात्रों ने CJI को लिखा पत्र
CBSE बोर्ड परीक्षाएं रुकवाने हेतु 300 छात्रों ने CJI को लिखा पत्रSocial Media

CBSE बोर्ड परीक्षाएं रुकवाने हेतु 300 छात्रों ने CJI को लिखा पत्र

इस साल कोरोना के चलते ही राज्य की सरकारें बिना परीक्षा के ही परिणाम घोषित करने पर मजबूर हैं। इसी बीच CBSE बोर्ड का फैसला आना बाकी है। इसी बीच 300 छात्रों ने CJI को पत्र लिखा।

CBSE Board Exams 2021: पूरी दुनिया कोरोना वायरस का कहर झेल रही है। जिसका बुरा असर भारत में पिछले साल से ही देखने को मिल रहा है। देश में बढ़ते मामलों के चलते भारत में बहुत सी गतिविधियां पिछले साल से अब तक कई बार रुकी, बहुत से कार्य अधूरे रह गए। इनमें बच्चों की परीक्षाएं भी शामिल हैं। जहां, पिछले साल लगभग सभी राज्यों सहित CBSE की 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं अधूरी रह गई थीं, अधूरे एक्साम्स में ही परिणाम घोषित करने पड़े थे। वहीं, इस साल कोरोना के चलते ही राज्य की सरकारें बिना परीक्षा के ही परिणाम घोषित करने पर मजबूर हैं। इसी बीच CBSE बोर्ड का फैसला आना बाकी है। इसी बीच 300 छात्रों ने CJI को पत्र लिखा।

300 छात्रों ने CJI को पत्र लिखा :

दरअसल, देश में कोरोना के चलते बने हालातों में लोग अपने घर से निकलने में सौ बार सोचते है। ऐसे में परीक्षाओं को लेना बच्चों की जान खतरे में डालने से कम नहीं होगा। ऐसा मानना है इन 300 छात्रों का। क्योंकि, आज 300 छात्रों ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ सैकंडरी एजुकेशन (CBSE) बोर्ड की परीक्षाएं रुकवाने की मांग करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) एनवी रमन्ना को पत्र लिखा है। इन छात्रों ने यह पत्र ऐसे समय में लिखा है जब CBSE बोर्ड द्वारा 12वीं परीक्षाओं को लेकर अंतिम फैसला लेने की तैयारियों में जुटा है।

पत्र में की गई मांग :

बताते चलें, इन 300 छात्रों ने द्वारा लिखे गए पत्र में मांग की गई है कि, 'कोरोना महामारी के बीच CBSE की ओर से भौतिक रूप (ऑफलाइन) से परीक्षाएं कराने के फैसले पर रोक लगाई जाए।' छात्रों द्वारा यह मांग मुख्य न्यायाधीश से की गई है। पत्र में आगे छात्रों ने 25 मई को देश में आए कोरोना मामलों की संख्या का हवाला देते हुए कहा है कि, 'वह (मुख्य न्यायाधीश) केंद्र सरकार को इस संबंध में निर्देश दे कि, वह छात्रों के लिए वैकल्पिक असेसमेंट योजना उपलब्ध कराए।' छात्रों ने में मांग की है कि,

ऐसी महामारी के दौर में भौतिक रूप से परीक्षाएं कराना न सिर्फ अन्यायपूर्ण है बल्कि यह अव्यवहारिक कदम भी है। यदि भौतिक रूप से परीक्षाएं कराई गईं तो इससे लाखों छात्रों, पैरेंट्स, शिक्षकों और सपोर्टिंग स्टाफ के जीवन, स्वास्थ्य और सुरक्षा पर खतरा पैदा होगा। अब तक कई छात्र, अभिभावक और शिक्षक इस महामारी से अपनी जान गंवा चुके हैं। ऐसे में जब कोरोना मामलों में वृद्धि देखने को मिल रही है तो घर के अंदर रहना ही एक विकल्प बचा है।

300 छात्र

बताते चलें, देशभर में इस साल CBSE बोर्ड की 12वीं की परीक्षा देने वाले छात्रों की कुल संख्या 14 लाख 30 हजार से भी ज्यादा है। ऐसे में CBSE बोर्ड द्वारा 12 वीं की परीक्षा को लेकर अंतिम फैसला अभी आना अभी बाकी है।

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